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ओम पुरी ने बताया: एनएसडी में अंग्रेजी से संघर्ष और अलकाजी की सलाह ने बदली जिंदगी

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ओम पुरी ने बताया: एनएसडी में अंग्रेजी से संघर्ष और अलकाजी की सलाह ने बदली जिंदगी

सारांश

पंजाबी माध्यम से पढ़े ओम पुरी को एनएसडी में अंग्रेजी ने घेरा, कॉन्वेंट-शिक्षित सहपाठियों के बीच हीन भावना आई — लेकिन अलकाजी की एक सलाह ने सब बदल दिया। वही अभिनेता आगे नौ भाषाओं में काम करने वाला कलाकार बना।

मुख्य बातें

ओम पुरी ने एनएसडी में अंग्रेजी को लेकर गहरी हीन भावना महसूस की, क्योंकि उनकी पढ़ाई पंजाबी माध्यम से हुई थी।
एनएसडी निदेशक इब्राहिम अलकाजी ने उन्हें हिंदी में बोलने की अनुमति दी और अखबार पढ़कर अंग्रेजी सुधारने की सलाह दी।
सहपाठी नसीरुद्दीन शाह ने उन्हें पुणे के एफटीआईआई में दाखिला लेने के लिए प्रेरित किया।
ओम पुरी ने अपने करियर की शुरुआत 1976 की मराठी फिल्म 'घासीराम कोतवाल' से की।
उन्होंने अंग्रेजी, पंजाबी, मराठी सहित नौ भाषाओं में काम किया।

दिवंगत दिग्गज अभिनेता ओम पुरी ने एक बार खुलासा किया था कि नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) में अपने प्रशिक्षण के दौरान उन्हें अंग्रेजी भाषा को लेकर गहरी हीन भावना से जूझना पड़ा था। पंजाबी माध्यम से पढ़े होने के कारण कॉन्वेंट-शिक्षित सहपाठियों के बीच वे खुद को कमतर महसूस करते थे — लेकिन एनएसडी के तत्कालीन निदेशक इब्राहिम अलकाजी की एक सलाह ने उनका नज़रिया हमेशा के लिए बदल दिया।

एनएसडी में अंग्रेजी की चुनौती

अभिनेता अनुपम खेर के चर्चित शो 'द अनुपम खेर शो — कुछ भी हो सकता है' में ओम पुरी ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा था: 'मुझे एनएसडी में अंग्रेजी को लेकर बहुत कठिनाई होती थी क्योंकि मैंने पढ़ाई पंजाबी माध्यम से की थी, जबकि यहाँ हमें अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाया जाता था। कुछ छात्र कॉन्वेंट से थे, जिनकी अंग्रेजी बहुत अच्छी थी। इसलिए मुझे हीन भावना महसूस होती थी।'

यह वह दौर था जब एनएसडी भारत के सर्वश्रेष्ठ अभिनय प्रतिभाओं को एक छत के नीचे तराश रहा था। भाषाई असमानता एक वास्तविक बाधा थी — और ओम पुरी इससे अकेले नहीं जूझ रहे थे, लेकिन उन्होंने इसे सबसे गहराई से महसूस किया।

अलकाजी की दूरदर्शी सलाह

जब इब्राहिम अलकाजी को ओम पुरी की इस परेशानी का पता चला, तो उन्होंने पहले अन्य लोगों से उन पर नज़र रखने को कहा। बाद में जब ओम पुरी ने स्वीकार किया कि वे दूसरों की तरह अंग्रेजी नहीं बोल सकते, तो अलकाजी ने उन्हें सहज भाषा में — यानी हिंदी में — बोलने की अनुमति दी।

साथ ही अलकाजी ने व्यावहारिक मार्ग भी सुझाया: अंग्रेजी अखबार पढ़ें और दोस्तों के साथ अंग्रेजी में बातचीत करें। उनके शब्द थे — 'भले ही लोग हंसे, लेकिन चिंता मत करो।' यह सलाह महज़ भाषा सीखने की नहीं थी; यह आत्मविश्वास बनाने का पाठ था।

एफटीआईआई और करियर की नींव

एनएसडी के बाद ओम पुरी के सहपाठी और मित्र नसीरुद्दीन शाह ने उन्हें पुणे स्थित फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एफटीआईआई) में दाखिला लेने के लिए प्रेरित किया। यह कदम उनके अभिनय जीवन की दिशा तय करने में निर्णायक साबित हुआ।

ओम पुरी ने अपने करियर की शुरुआत 1976 की मराठी फिल्म 'घासीराम कोतवाल' से की, जो विजय तेंदुलकर के प्रसिद्ध नाटक पर आधारित थी। गौरतलब है कि जो अभिनेता एनएसडी में अंग्रेजी से घबराता था, उसने आगे चलकर अंग्रेजी, पंजाबी, कन्नड़, तेलुगु, मलयालम, बंगाली, गुजराती, उर्दू और मराठी — कुल नौ भाषाओं में काम किया।

यादगार फिल्में और विरासत

ओम पुरी की प्रमुख फिल्मों में आक्रोश (1980), आरोहण (1982), अर्धसत्य (1983), डिस्को डांसर (1982), जाने भी दो यारो (1983), चाची 420 (1997), हेराफेरी (2000) और चुप चुप के (2006) शामिल हैं। उनकी यह यात्रा इस बात का प्रमाण है कि भाषाई संघर्ष किसी असाधारण प्रतिभा की राह नहीं रोक सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारत की उस बड़ी सच्चाई की है जहाँ सरकारी और पंजाबी-हिंदी माध्यम से पढ़े लाखों प्रतिभाशाली युवा अंग्रेजी की दीवार से टकराते हैं। अलकाजी ने जो किया — भाषा को बाधा नहीं, माध्यम बनाया — वह आज भी हमारी शिक्षा नीति के लिए एक सबक है। विडंबना यह है कि जो अभिनेता एनएसडी में अंग्रेजी से घबराता था, उसने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन किया। प्रतिभा और भाषा का समीकरण हमेशा एक नहीं होता।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओम पुरी को एनएसडी में अंग्रेजी से क्यों संघर्ष करना पड़ा?
ओम पुरी की प्रारंभिक शिक्षा पंजाबी माध्यम से हुई थी, जबकि एनएसडी में शिक्षण अंग्रेजी माध्यम में होता था। कॉन्वेंट-शिक्षित सहपाठियों के बीच उन्हें गहरी हीन भावना महसूस होती थी।
इब्राहिम अलकाजी ने ओम पुरी को क्या सलाह दी थी?
अलकाजी ने ओम पुरी को सहज महसूस होने पर हिंदी में बोलने की अनुमति दी। साथ ही उन्होंने अंग्रेजी अखबार पढ़ने और दोस्तों के साथ अंग्रेजी में बातचीत करने की सलाह दी, यह कहते हुए कि लोगों के हँसने की परवाह न करें।
ओम पुरी ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत कब और किस फिल्म से की?
ओम पुरी ने 1976 की मराठी फिल्म 'घासीराम कोतवाल' से अपने करियर की शुरुआत की, जो विजय तेंदुलकर के प्रसिद्ध नाटक पर आधारित थी।
ओम पुरी ने कितनी भाषाओं में काम किया?
ओम पुरी ने नौ भाषाओं में काम किया — अंग्रेजी, पंजाबी, कन्नड़, तेलुगु, मलयालम, बंगाली, गुजराती, उर्दू और मराठी।
नसीरुद्दीन शाह का ओम पुरी के करियर में क्या योगदान था?
एनएसडी में सहपाठी रहे नसीरुद्दीन शाह ने ओम पुरी को पुणे स्थित फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एफटीआईआई) में दाखिला लेने के लिए प्रेरित किया, जो उनके अभिनय करियर की नींव बनी।
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