पवन सिंह को भाजपा ने दिया बिहार एमएलसी टिकट, 'पावर स्टार' की राजनीतिक पारी को नई उड़ान
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 5 जून 2026 को बिहार विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की सूची जारी की, जिसमें भोजपुरी सिनेमा के 'पावर स्टार' पवन सिंह का नाम सबसे अधिक चर्चा में रहा। पार्टी ने उनके साथ संजय मयूख, अनिल कुमार ठाकुर और शीला पंडित को भी उम्मीदवार घोषित किया है। राजपूत समाज में पवन सिंह की व्यापक पकड़ और भोजपुरी पट्टी में उनकी लोकप्रियता को देखते हुए भाजपा ने उन पर यह बड़ा दांव लगाया है।
पवन सिंह का भोजपुरी सफर
पवन सिंह आज भोजपुरी इंडस्ट्री के सबसे बड़े सितारों में गिने जाते हैं, लेकिन यह मुकाम उन्होंने आर्थिक तंगी और कठिन संघर्षों के बीच हासिल किया। उनकी संगीत यात्रा 1997 में एल्बम 'ओढ़निया वाली' से शुरू हुई। इसके बाद 'कांच कसैली' ने उन्हें पहचान दिलाई।
असली सफलता 2008 में आई, जब सुपरहिट गीत 'लॉलीपॉप लागेलू' देश-विदेश में धूम मचाने लगा। इस गाने ने उन्हें भोजपुरी संगीत जगत में अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई और 'पावर स्टार' की उपाधि का आधार बना।
फिल्मी करियर और सुपरस्टार की छवि
गायकी में सफलता के बाद पवन सिंह ने 2007 में फिल्म 'रंगली चुनरिया तोहरे नाम' से अभिनय की दुनिया में कदम रखा। इसके बाद 'प्रतिज्ञा', 'डकैत', 'वांटेड', 'लोहा पहलवान', 'पवन राजा', 'शेर सिंह', 'सत्या' और 'सईयां भईल परदेसी' जैसी कई सफल फिल्मों ने उन्हें भोजपुरी सिनेमा का अपरिहार्य नाम बना दिया।
राजनीतिक सफर और विवाद
पवन सिंह ने 2014 में भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की और पार्टी के कार्यक्रमों में सक्रिय रहे। 2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें पश्चिम बंगाल की आसनसोल लोकसभा सीट से उम्मीदवार घोषित किया। हालांकि, उम्मीदवारी की घोषणा के कुछ ही समय बाद उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए चुनाव न लड़ने का फैसला सुनाया।
उस समय उनके कुछ पुराने गीतों को लेकर विवाद उठ खड़ा हुआ था — विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि कुछ गीतों में महिलाओं और बंगाल को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियाँ हैं। पार्टी के भीतर से भी उनकी उम्मीदवारी पर विरोध की खबरें सामने आई थीं। ऐसे में पवन सिंह ने भाजपा नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए आसनसोल से हटने का निर्णय लिया।
काराकाट से हार और अब एमएलसी की राह
आसनसोल से नाम वापस लेने के बाद पवन सिंह ने बिहार की काराकाट लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने का ऐलान किया। सोशल मीडिया पर उन्होंने कहा था कि उन्होंने अपनी माँ से वादा किया था कि वह चुनाव लड़ेंगे और उसी वादे को निभाने के लिए मैदान में उतरे। हालांकि, उन्हें इस सीट पर हार का सामना करना पड़ा। अब बिहार विधान परिषद चुनाव में भाजपा का टिकट उनकी राजनीतिक पारी को एक नई दिशा देने का अवसर लेकर आया है।