बिहार विधान परिषद: पवन सिंह समेत सभी 10 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित, निशांत कुमार बने एमएलसी
सारांश
मुख्य बातें
बिहार विधान परिषद के द्विवार्षिक चुनाव और एक सीट पर हुए उपचुनाव में 11 जून 2026 को सभी 10 उम्मीदवारों को निर्विरोध विजयी घोषित कर दिया गया। भोजपुरी सिनेमा के चर्चित गायक एवं अभिनेता पवन सिंह सहित राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के नौ और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के एक प्रत्याशी ने बिना किसी प्रतिद्वंद्विता के जीत दर्ज की। नाम वापसी की अंतिम तिथि बीतने के बाद निर्वाचन अधिकारियों ने सभी को विजयी घोषित किया।
निर्वाचन का पूरा घटनाक्रम
विधान परिषद की विधानसभा कोटे वाली 9 सीटों पर द्विवार्षिक चुनाव और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा खाली की गई एक सीट पर उपचुनाव हुआ। सोमवार को कुल 10 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया था — नौ सीटों पर NDA और एक सीट पर RJD की ओर से पर्चा भरा गया। गुरुवार को नाम वापसी की अवधि समाप्त होने के बाद सभी को निर्विरोध विजयी घोषित किया गया।
नवनिर्वाचित एमएलसी की सूची
जनता दल (युनाइटेड) (JDU) से निशांत कुमार, भारती मेहता, शिवानी देवी प्रजापति और ललन प्रसाद विजयी घोषित किए गए। भारतीय जनता पार्टी (BJP) से भोजपुरी स्टार पवन सिंह, संजय प्रकाश, मयूख, अनिल ठाकुर और शीला पंडित एमएलसी चुने गए। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अशरफ अंसारी और RJD के सुनील सिंह भी निर्विरोध निर्वाचित हुए।
राष्ट्रीय लोक मोर्चा और मंत्री पद पर संकट
NDA में शामिल राष्ट्रीय लोक मोर्चा को इस बार एक भी सीट नहीं दी गई, जो गठबंधन के भीतर सर्वाधिक चर्चा का विषय बनी हुई है। मोर्चा के नेता दीपक प्रकाश फिलहाल मंत्री पद पर हैं, लेकिन वे किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। संवैधानिक नियमों के अनुसार शपथ ग्रहण के छह महीने के भीतर किसी सदन की सदस्यता अनिवार्य होती है, जिससे उनके मंत्री पद पर खतरा मंडराने लगा है।
RJD में आंतरिक विरोध के स्वर
RJD द्वारा सुनील सिंह को पुनः विधान परिषद भेजने के निर्णय पर पार्टी के भीतर ही असंतोष उभर आया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के पुत्र तेज प्रताप यादव और पुत्री रोहिणी आचार्या ने भी इस फैसले पर सार्वजनिक रूप से सवाल खड़े किए हैं। पूर्व मंत्री शिवचन्द्र राम ने पार्टी के प्रमुख पदों से इस्तीफा दे दिया, हालांकि पार्टी नेतृत्व ने उनका इस्तीफा अस्वीकार कर दिया है।
आगे क्या होगा
नवनिर्वाचित एमएलसी शीघ्र ही शपथ ग्रहण करेंगे और विधान परिषद की कार्यवाही में भाग लेंगे। दीपक प्रकाश के मंत्री पद का भविष्य अब गठबंधन की आंतरिक बातचीत पर निर्भर करेगा, क्योंकि उनके पास सदन की सदस्यता का समय सीमित है। RJD में उभरा आंतरिक विरोध पार्टी की एकजुटता के लिए एक नई चुनौती बन सकता है।