पवन सिंह बोले — 'भाजपा मेरी माँ है', बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए BJP उम्मीदवार घोषित
सारांश
मुख्य बातें
भोजपुरी अभिनेता और गायक पवन सिंह को भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आगामी बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया है। 5 जून 2026 को पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं मुख्यालय प्रभारी अरुण सिंह के हस्ताक्षर से जारी आधिकारिक सूची में चार उम्मीदवारों के नाम शामिल हैं, जिनमें पवन सिंह का नाम सर्वाधिक चर्चित रहा है।
पटना BJP कार्यालय में मुलाकात और मीडिया संबोधन
शनिवार, 6 जून को पवन सिंह पटना स्थित भाजपा कार्यालय पहुँचे, जहाँ उन्होंने पहले बिहार BJP अध्यक्ष संजय सरावगी से और इसके बाद बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात की। मीडिया से बातचीत में पवन सिंह ने कहा, 'भाजपा मेरी माँ है और मैं भाजपा का सच्चा सेवक हूँ — आजीवन ऐसा ही रहूँगा। अपनी माँ से कोई दूर नहीं रह सकता।'
पार्टी नेतृत्व के प्रति आभार
विधान परिषद उम्मीदवार बनाए जाने पर पवन सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, बिहार BJP अध्यक्ष संजय सरावगी और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह जिम्मेदारी उन्हें पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ निभानी है।
बिहार की जनता से वादा
पवन सिंह ने स्पष्ट किया कि उनका एकमात्र उद्देश्य सेवा है। उन्होंने कहा, 'मैं अपने बिहार की जनता को दिल से नमन करता हूँ और वादा करता हूँ कि मुझे सौंपी गई जिम्मेदारी को पूरी ईमानदारी से निभाऊँगा।' उन्होंने पार्टी परिवार और बिहार की जनता दोनों की सेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
राजनीतिक पृष्ठभूमि: चुनाव प्रचार से उम्मीदवारी तक
गौरतलब है कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में पवन सिंह ने NDA उम्मीदवारों के लिए जोरदार प्रचार किया था। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर एक चुनावी गीत भी गाया था, जो चुनाव के दौरान व्यापक रूप से वायरल हुआ था। विश्लेषकों का मानना है कि NDA की सरकार की दोबारा वापसी में उनके प्रचार की भूमिका को देखते हुए यह उम्मीदवारी उसी योगदान की स्वाभाविक परिणति है।
राजनीतिक महत्व
एक लोकप्रिय भोजपुरी सितारे का विधान परिषद उम्मीदवार बनाया जाना BJP की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है जिसमें जन-सम्पर्क रखने वाले चेहरों को संस्थागत राजनीति में स्थान दिया जाता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि पवन सिंह की लोकप्रियता विधान परिषद के चुनावी गणित में किस हद तक काम आती है।