8 नवंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

स्मृति ईरानी पर रावी गुप्ता का खुलासा: 'सेट पर कभी नहीं झलकने देतीं अपना राजनीतिक रुतबा'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
स्मृति ईरानी पर रावी गुप्ता का खुलासा: 'सेट पर कभी नहीं झलकने देतीं अपना राजनीतिक रुतबा'

सारांश

अभिनेत्री रावी गुप्ता ने खुलासा किया कि पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी शूटिंग सेट पर अपना राजनीतिक रुतबा कभी नहीं दिखातीं और वह 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' के आखिरी दिन काफी भावुक हो गई थीं। तुलसी का आइकॉनिक किरदार स्मृति के करियर की पहचान बन चुका है।

मुख्य बातें

अभिनेत्री रावी गुप्ता ने को-स्टार स्मृति ईरानी को बेहद पेशेवर और सहज कलाकार बताया।
रावी के अनुसार, स्मृति अपना राजनीतिक रुतबा कभी भी शूटिंग सेट पर नहीं लाती थीं।
शो 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' के आखिरी दिन सेट पर स्मृति समेत सभी कलाकार भावुक हो गए।
दिवाली सीक्वेंस की शूटिंग का दिन विशेष रूप से भावनात्मक रहा।
कलाकारों को पहले से जानकारी थी कि यह एक सीमित अवधि का शो होगा।

अभिनेत्री रावी गुप्ता ने टीवी के चर्चित शो 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' की अपनी को-स्टार और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की जमकर तारीफ की है। रावी ने 8 नवंबर 2026 को मुंबई में एक विशेष बातचीत में कहा कि स्मृति एक बेहद पेशेवर और सहज कलाकार हैं, जो शूटिंग सेट पर अपनी राजनीतिक पहचान को कभी हावी नहीं होने देतीं।

सेट पर स्मृति का पेशेवर रवैया

जब रावी गुप्ता से पूछा गया कि स्मृति ईरानी की राजनीतिक पृष्ठभूमि शूटिंग के दौरान उनके काम करने के तरीके को कितना प्रभावित करती है, तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'स्मृति बेहद मिलनसार और गर्मजोशी से पेश आने वाली महिला हैं। वह अपने राजनीतिक रुतबे को कभी सेट पर लेकर नहीं आतीं। वह बेहद सरल और स्पष्ट स्वभाव की हैं। मैंने कभी भी स्मृति को अपने रुतबे का दिखावा करते हुए नहीं देखा।'

गौरतलब है कि स्मृति ईरानी ने इस शो में तुलसी का किरदार निभाया, जो भारतीय टेलीविजन इतिहास के सबसे प्रतिष्ठित पात्रों में से एक माना जाता है। राजनीति में प्रवेश के बाद भी उनका यह जुड़ाव दर्शकों की स्मृति में गहरे अंकित रहा।

शो के अंतिम दिनों में भावुक हो गईं स्मृति

रावी ने बताया कि जब शो के समाप्त होने की सूचना मिली, तो सेट का माहौल भावनाओं से भर गया। उनके अनुसार, 'उनका किरदार आइकॉनिक बन चुका है और वह तुलसी हैं। मैंने शूटिंग के आखिरी दिन के कई वीडियो और रील्स देखे हैं। मुझे लगता है कि उस दिन स्मृति समेत सेट पर मौजूद हर कोई भावुक था। यह शो उनके करियर और जिंदगी का बेहद अहम हिस्सा रहा है।'

रावी ने कहा कि यह शो स्मृति के व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन दोनों से गहराई से जुड़ा रहा है, इसलिए उस विदाई का पल काफी गहरा और भावुक करने वाला था।

दिवाली सीक्वेंस की शूटिंग रही खास

रावी गुप्ता ने बताया कि कलाकारों को पहले से ही यह जानकारी दे दी गई थी कि यह एक सीमित अवधि का शो होगा। आखिरी कुछ दिनों में सभी को इस विदाई का आभास होने लगा था। उन्होंने खास तौर पर दिवाली सीक्वेंस की शूटिंग का उल्लेख करते हुए कहा, 'जिस दिन हमने दिवाली सीक्वेंस शूट किया, वह दिन खास तौर पर भावुक कर देने वाला था। सेट का माहौल बाकी दिनों से बिल्कुल अलग था। सभी लोग बाकी दिनों के मुकाबले शांत थे। खुशी तो थी, लेकिन साथ ही इस बात का एहसास भी था कि कुछ खत्म होने जा रहा है।'

यह ऐसे समय में आया है जब शो की वापसी को लेकर दर्शकों में पहले से ही जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा था। शो के अंतिम दिनों की यह भावनात्मक झलक उस बंधन की गहराई को दर्शाती है जो कलाकारों और इस धारावाहिक के बीच वर्षों में बना।

स्मृति ईरानी की दोहरी पहचान

स्मृति ईरानी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) की राजनेता के रूप में देश की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और वह पूर्व में केंद्रीय मंत्री भी रह चुकी हैं। रावी गुप्ता की यह टिप्पणी इस बात को रेखांकित करती है कि स्मृति ने अपने दोनों क्षेत्रों — मनोरंजन और राजनीति — के बीच एक स्पष्ट और सम्मानजनक सीमा बनाए रखी। आगे देखना यह होगा कि शो की समाप्ति के बाद स्मृति किस नई भूमिका में सामने आती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एक बड़े सवाल को छूता है — क्या राजनीति और मनोरंजन की दोहरी दुनिया में एक रेखा खींचना उतना ही आसान है जितना बताया जा रहा है? स्मृति ईरानी का उदाहरण अनूठा है: वह एक ऐसी हस्ती हैं जो टेलीविजन की 'तुलसी' से लेकर केंद्र सरकार के मंत्रालय तक का सफर तय कर चुकी हैं। गौरतलब है कि मनोरंजन जगत में राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले कलाकारों के लिए यह संतुलन बनाना हमेशा चर्चा का विषय रहा है। इस बातचीत का असली महत्व यह है कि यह दर्शाता है कि पेशेवरता किसी भी पहचान से बड़ी होती है।
RashtraPress
8 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रावी गुप्ता ने स्मृति ईरानी के बारे में क्या कहा?
रावी गुप्ता ने कहा कि स्मृति ईरानी एक बेहद मिलनसार और सहज कलाकार हैं जो अपना राजनीतिक रुतबा कभी भी शूटिंग सेट पर नहीं लाती थीं। उन्होंने स्मृति को एक बेहतरीन प्रोफेशनल बताया।
क्योंकि सास भी कभी बहू थी के आखिरी दिन सेट पर क्या हुआ?
शो के आखिरी दिन सेट पर स्मृति ईरानी समेत सभी कलाकार भावुक हो गए थे। रावी गुप्ता के अनुसार, दिवाली सीक्वेंस की शूटिंग के दौरान माहौल खास तौर पर भावनात्मक हो गया था और सभी उदास थे।
स्मृति ईरानी का तुलसी किरदार क्यों आइकॉनिक माना जाता है?
तुलसी का किरदार भारतीय टेलीविजन इतिहास के सबसे लोकप्रिय पात्रों में से एक है और यह शो स्मृति ईरानी के करियर की पहचान बन गया। रावी गुप्ता ने कहा कि यह शो स्मृति के करियर और जिंदगी का बेहद अहम हिस्सा रहा।
क्या कलाकारों को पहले से पता था कि शो बंद होगा?
हाँ, रावी गुप्ता ने बताया कि कलाकारों को पहले ही सूचित किया गया था कि यह एक सीमित अवधि का शो होगा। इसलिए सभी को आखिर से पहले ही यह एहसास था कि विदाई का समय आने वाला है।
स्मृति ईरानी की राजनीतिक पृष्ठभूमि क्या है?
स्मृति ईरानी भारतीय जनता पार्टी (BJP) की वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री हैं। वह मनोरंजन जगत से राजनीति में आने वाली प्रमुख हस्तियों में से एक हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 महीने पहले
  2. 4 महीने पहले
  3. 5 महीने पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 11 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले