'चुट्टामल्ले' AI वीडियो विवाद पर राम गोपाल वर्मा का तंज: पब्लिसिटी से करोड़ों व्यूज मिले
सारांश
मुख्य बातें
फिल्ममेकर राम गोपाल वर्मा ने 4 अक्टूबर 2026 को फिल्म 'देवरा' के चर्चित गाने 'चुट्टामल्ले' से जुड़े मॉर्फ्ड एआई वीडियो विवाद पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि सेलिब्रिटीज़ का ऐसे कंटेंट पर सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया देना उल्टा उस वीडियो को करोड़ों व्यूज दिला देता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के दुरुपयोग से जुड़ा यह मामला तब सामने आया जब अभिनेता जूनियर एनटीआर ने वायरल वीडियो की कड़ी निंदा करते हुए कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी।
मामला क्या है
सोशल मीडिया पर हाल ही में फिल्म 'देवरा' के गाने 'चुट्टामल्ले' का एक फेक और मॉर्फ्ड वीडियो तेज़ी से वायरल हुआ। इस वीडियो में कथित तौर पर एआई तकनीक का दुरुपयोग करते हुए एक महिला को आपत्तिजनक तरीके से दर्शाया गया था। मामला सामने आने के बाद अभिनेता जूनियर एनटीआर ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर इसकी कड़ी भर्त्सना की।
जूनियर एनटीआर की तीखी प्रतिक्रिया
जूनियर एनटीआर ने अपनी पोस्ट में लिखा, "जिस देश में महिलाओं को मां और देवी के रूप में पूजा जाता है और 'मातृदेवो भव' सिर्फ एक वाक्य नहीं बल्कि संस्कृति का हिस्सा है, वहां कुछ लोग एआई का इस्तेमाल एक महिला का बेहद अपमानजनक तरीके से मजाक बनाने के लिए कर रहे हैं। इस तरह का आपत्तिजनक कंटेंट बनाने वाले लोगों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।" उन्होंने ऐसे कंटेंट निर्माताओं को 'घिनौनी और बीमार मानसिकता' वाला बताया तथा उनके खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाने की चेतावनी दी।
अभिनेता ने आम जनता से भी अपील की कि वे ऐसे कंटेंट को देखने, शेयर करने या किसी भी प्रकार का रिएक्शन देने से बचें। उन्होंने कहा, "आज यह किसी और के साथ हुआ है, लेकिन कल यही किसी की मां, बहन, पत्नी या बेटी के साथ भी हो सकता है।" साथ ही उन्होंने सभी राज्य सरकारों और केंद्र सरकार से एआई के दुरुपयोग को रोकने के लिए कठोर नियम बनाने की माँग की।
राम गोपाल वर्मा की अलग राय
फिल्ममेकर राम गोपाल वर्मा ने इस पूरे प्रकरण पर एक अलग नज़रिया पेश किया। उन्होंने कहा, "ऐसे मामलों में सेलिब्रिटीज़ का सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक एआई कंटेंट के बारे में ज्यादा बात करना कई बार पब्लिसिटी करने जैसा हो जाता है। इससे उस कंटेंट को और ज्यादा लोग देखने लगते हैं, जिससे उसे करोड़ों व्यूज मिल जाते हैं।"
वर्मा ने आगे कहा, "बेहतर तरीका यह होता कि फोकस उस व्यक्ति को पकड़ने पर किया जाता जिसने यह मॉर्फ्ड कंटेंट बनाया था। सेलिब्रिटीज़ के पोस्ट करने से विक्टिम की पहचान और आपत्तिजनक कंटेंट दोनों पर लोगों का ध्यान गया।" उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि ऐसे मामलों में असली आरोपी की बजाय उस कंटेंट को ही ज्यादा चर्चा क्यों मिलती है।
व्यापक संदर्भ: एआई दुरुपयोग की बढ़ती चिंता
गौरतलब है कि यह ऐसी पहली घटना नहीं है — देश विदेश में सेलिब्रिटीज़ और आम महिलाओं को निशाना बनाते हुए डीपफेक और मॉर्फ्ड वीडियो के मामले तेज़ी से बढ़े हैं। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार डिजिटल कंटेंट नियमन को लेकर नई नीतियाँ बनाने की दिशा में कदम उठा रही है। आलोचकों का कहना है कि मौजूदा कानूनी ढाँचा एआई जनित दुर्भावनापूर्ण कंटेंट से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं है।
आगे क्या होगा
अभिनेता जूनियर एनटीआर के बयान के बाद मामले में कानूनी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। वर्मा की टिप्पणी ने यह बहस भी छेड़ दी है कि डिजिटल युग में एआई जनित दुर्व्यवहार के खिलाफ सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देने की रणनीति क्या होनी चाहिए। आने वाले दिनों में इस विषय पर कानूनी और नीतिगत दोनों स्तरों पर सक्रियता देखे जाने की उम्मीद है।