13 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सुबोध भावे बनेंगे नीम करौली बाबा: 'संत का किरदार महाराज जी की कृपा के बिना संभव नहीं था'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सुबोध भावे बनेंगे नीम करौली बाबा: 'संत का किरदार महाराज जी की कृपा के बिना संभव नहीं था'

सारांश

अभिनेता सुबोध भावे का कहना है कि नीम करौली बाबा का किरदार उन्होंने नहीं चुना — बाबा ने उन्हें चुना। प्रयागराज में शूटिंग के पहले दिन का वह अलौकिक अनुभव, जब बुज़ुर्ग भक्तों ने उन पर महाराज जी का कंबल ओढ़ाया, उनके लिए इस पूरी यात्रा की नींव बन गया।

मुख्य बातें

सुबोध भावे आगामी फिल्म 'श्री बाबा नीब करोरी महाराज' में नीम करौली बाबा की भूमिका निभाएंगे।
फिल्म के निर्देशक शरद सिंह ठाकुर हैं; भावे का कहना है कि वह पहले बाबा के बारे में अधिक नहीं जानते थे।
शूटिंग का पहला दिन प्रयागराज में बाबा के उस घर में हुआ जहाँ वे स्वयं रुका करते थे।
बुज़ुर्ग भक्तों ने भावे पर महाराज जी का कंबल ओढ़ाया और तिलक लगाया — अभिनेता ने इसे अपने जीवन का सबसे अलौकिक अनुभव बताया।
भावे का मानना है कि संत अपने किरदार के लिए अभिनेता को स्वयं चुनते हैं।

अभिनेता सुबोध भावे जल्द ही आगामी फिल्म 'श्री बाबा नीब करोरी महाराज' में नीम करौली बाबा की पवित्र भूमिका में दर्शकों के सामने आएंगे। भावे का कहना है कि यह किरदार उनके जीवन का सबसे सौभाग्यशाली पड़ाव है और यह अवसर उन्हें स्वयं महाराज जी की कृपा से मिला।

किरदार से जुड़ाव और पहली प्रतिक्रिया

सुबोध भावे ने बताया कि जब फिल्म के निर्देशक शरद सिंह ठाकुर उनके पास यह प्रोजेक्ट लेकर आए, तब वह नीम करौली बाबा के बारे में विशेष जानकारी नहीं रखते थे। उन्होंने कहा, "मैंने इंडस्ट्री के कुछ दोस्तों से उनका नाम सुना था, जो अक्सर कैंची धाम जाते रहते थे, लेकिन मैं खुद कभी वहाँ नहीं गया था।"

अभिनेता ने बताया कि जब शरद जी ने उन्हें बाबा के जीवन की कहानी सुनाई, तो उन्होंने गहरा आत्मिक जुड़ाव महसूस किया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें हैरानी हुई कि निर्देशक उन तक कैसे पहुँचे, क्योंकि वे एक-दूसरे को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानते थे। "तभी मुझे एहसास हुआ कि कोई भी एक्टर किसी संत का किरदार खुद नहीं चुनता — संत खुद ही अपने एक्टर को चुनते हैं।"

फिल्म और बाबा की भक्ति का व्यापक दायरा

भावे ने कहा, "मुझे इस बात की बेहद खुशी है कि यह फिल्म आखिरकार रिलीज हो रही है, क्योंकि लोग इसका लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। पूरे भारत और दुनियाभर से लाखों भक्त हर साल बाबा के कैंची धाम आश्रम जाते हैं। उनके प्रति लोगों की आस्था अटूट है।" उन्होंने निर्माताओं और निर्देशक के इस निर्णय को सराहनीय बताया और कहा कि उन्हें गर्व है कि महाराज जी का किरदार निभाने के लिए उनका चयन हुआ।

शूटिंग का पहला दिन — एक अलौकिक अनुभव

अभिनेता ने बताया कि शूटिंग का पहला दिन प्रयागराज में उस घर में था, जहाँ नीम करौली बाबा स्वयं रुका करते थे। वह घर उनके एक शिष्य का था और बाबा के ही निर्देश पर बनवाया गया था। "जिस कमरे में वह सोते थे, उसे बिल्कुल वैसे ही सहेजकर रखा गया है — उनकी तस्वीर, उनका बिस्तर और रोज़ाना की पूजा-अर्चना की परंपरा आज भी उसी तरह निभाई जाती है।"

भावे ने बताया कि जब वह पहली बार उस स्थान पर गए, तो उन्होंने बाबा के सामने नतमस्तक होकर प्रणाम किया। वहाँ उपस्थित कई बुज़ुर्ग भक्त ऐसे थे जिन्होंने बाबा को साक्षात देखा था। "उन्होंने मुझे बैठाया और वही कंबल ओढ़ा दिया जिसे महाराज जी इस्तेमाल किया करते थे। किसी ने चंदन का लेप लगाया, किसी ने माथे पर तिलक लगाया और दूसरों ने फूल चढ़ाए। उस पल उन्हें सचमुच ऐसा लगा जैसे महाराज जी स्वयं उनके सामने आ गए हों।"

संत का किरदार — चुनौती और आस्था

सुबोध भावे ने कहा, "किसी भी संत का किरदार निभाना बेहद मुश्किल होता है, क्योंकि लोग उन्हें अपार श्रद्धा और भक्ति से देखते हैं। उनके दिलों में संतों के लिए एक पवित्र जगह होती है। ऐसे महात्मा का किरदार निभाना कभी आसान नहीं होता, जब तक कि उनका आशीर्वाद न मिल जाए।" उन्होंने कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि वह यह भूमिका केवल इसलिए निभा सके क्योंकि महाराज जी की कृपा उन पर बनी रही।

आगे की राह

भावे ने उस पहले दिन को अपने जीवन का सबसे अलौकिक अनुभव बताते हुए कहा, "उस समय मुझे महसूस हुआ कि मेरे भीतर एक बेहद शक्तिशाली, सकारात्मक और पवित्र ऊर्जा प्रवेश कर रही है — निस्वार्थ प्रेम और करुणा से भरी हुई। शूटिंग का वह पहला दिन हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण था, क्योंकि वहीं हमें बाबा की प्रत्यक्ष स्वीकृति और आशीर्वाद मिला। उसी का परिणाम था कि आगे की पूरी फिल्म की यात्रा हमारे लिए बेहद सरल हो गई।" फिल्म की रिलीज़ का इंतज़ार कर रहे लाखों भक्तों और सिनेमाप्रेमियों की नज़रें अब इस आध्यात्मिक बायोपिक पर टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

और 'श्री बाबा नीब करोरी महाराज' इसी धारा की अगली कड़ी है। सुबोध भावे का यह साक्षात्कार फिल्म की आध्यात्मिक विश्वसनीयता स्थापित करने की सोची-समझी रणनीति भी लगता है — जो दर्शकों में बाबा के प्रति गहरी आस्था रखने वाले करोड़ों भक्तों को लक्षित करती है। गौरतलब है कि नीम करौली बाबा के अनुयायियों में देश-विदेश की著名 हस्तियाँ शामिल रही हैं, जिससे फिल्म की व्यावसायिक संभावनाएँ भी व्यापक हैं। हालाँकि, किसी जीवित आस्था से जुड़े किरदार को पर्दे पर उतारना हमेशा संवेदनशील होता है — और इसकी स्वीकृति अंततः दर्शक ही तय करेंगे।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फिल्म 'श्री बाबा नीब करोरी महाराज' में नीम करौली बाबा का किरदार कौन निभा रहे हैं?
अभिनेता सुबोध भावे इस फिल्म में नीम करौली बाबा की भूमिका निभा रहे हैं। फिल्म का निर्देशन शरद सिंह ठाकुर ने किया है।
सुबोध भावे को नीम करौली बाबा का किरदार कैसे मिला?
निर्देशक शरद सिंह ठाकुर स्वयं सुबोध भावे के पास यह प्रोजेक्ट लेकर आए, जबकि दोनों एक-दूसरे को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानते थे। भावे का मानना है कि यह संयोग नहीं, बल्कि महाराज जी की कृपा थी।
शूटिंग के पहले दिन सुबोध भावे को क्या अनुभव हुआ?
शूटिंग का पहला दिन प्रयागराज में उस घर में था जहाँ नीम करौली बाबा रुका करते थे। वहाँ बुज़ुर्ग भक्तों ने भावे पर महाराज जी का कंबल ओढ़ाया, चंदन का लेप लगाया और तिलक किया। भावे ने इसे अपने जीवन का सबसे अलौकिक अनुभव बताया।
नीम करौली बाबा कौन थे और उनका कैंची धाम क्यों प्रसिद्ध है?
नीम करौली बाबा एक प्रसिद्ध संत थे जिनके लाखों भक्त भारत और दुनियाभर में हैं। उत्तराखंड स्थित कैंची धाम आश्रम उनका प्रमुख तीर्थस्थल है, जहाँ हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।
क्या संत का किरदार निभाना अभिनेताओं के लिए चुनौतीपूर्ण होता है?
सुबोध भावे के अनुसार, किसी भी संत का किरदार निभाना बेहद कठिन होता है क्योंकि भक्तों के दिलों में उनके लिए अपार श्रद्धा होती है। उनका मानना है कि ऐसी भूमिका तभी संभव होती है जब स्वयं उस संत का आशीर्वाद प्राप्त हो।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले