सुबोध भावे बनेंगे नीम करौली बाबा: 'संत का किरदार महाराज जी की कृपा के बिना संभव नहीं था'
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेता सुबोध भावे जल्द ही आगामी फिल्म 'श्री बाबा नीब करोरी महाराज' में नीम करौली बाबा की पवित्र भूमिका में दर्शकों के सामने आएंगे। भावे का कहना है कि यह किरदार उनके जीवन का सबसे सौभाग्यशाली पड़ाव है और यह अवसर उन्हें स्वयं महाराज जी की कृपा से मिला।
किरदार से जुड़ाव और पहली प्रतिक्रिया
सुबोध भावे ने बताया कि जब फिल्म के निर्देशक शरद सिंह ठाकुर उनके पास यह प्रोजेक्ट लेकर आए, तब वह नीम करौली बाबा के बारे में विशेष जानकारी नहीं रखते थे। उन्होंने कहा, "मैंने इंडस्ट्री के कुछ दोस्तों से उनका नाम सुना था, जो अक्सर कैंची धाम जाते रहते थे, लेकिन मैं खुद कभी वहाँ नहीं गया था।"
अभिनेता ने बताया कि जब शरद जी ने उन्हें बाबा के जीवन की कहानी सुनाई, तो उन्होंने गहरा आत्मिक जुड़ाव महसूस किया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें हैरानी हुई कि निर्देशक उन तक कैसे पहुँचे, क्योंकि वे एक-दूसरे को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानते थे। "तभी मुझे एहसास हुआ कि कोई भी एक्टर किसी संत का किरदार खुद नहीं चुनता — संत खुद ही अपने एक्टर को चुनते हैं।"
फिल्म और बाबा की भक्ति का व्यापक दायरा
भावे ने कहा, "मुझे इस बात की बेहद खुशी है कि यह फिल्म आखिरकार रिलीज हो रही है, क्योंकि लोग इसका लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। पूरे भारत और दुनियाभर से लाखों भक्त हर साल बाबा के कैंची धाम आश्रम जाते हैं। उनके प्रति लोगों की आस्था अटूट है।" उन्होंने निर्माताओं और निर्देशक के इस निर्णय को सराहनीय बताया और कहा कि उन्हें गर्व है कि महाराज जी का किरदार निभाने के लिए उनका चयन हुआ।
शूटिंग का पहला दिन — एक अलौकिक अनुभव
अभिनेता ने बताया कि शूटिंग का पहला दिन प्रयागराज में उस घर में था, जहाँ नीम करौली बाबा स्वयं रुका करते थे। वह घर उनके एक शिष्य का था और बाबा के ही निर्देश पर बनवाया गया था। "जिस कमरे में वह सोते थे, उसे बिल्कुल वैसे ही सहेजकर रखा गया है — उनकी तस्वीर, उनका बिस्तर और रोज़ाना की पूजा-अर्चना की परंपरा आज भी उसी तरह निभाई जाती है।"
भावे ने बताया कि जब वह पहली बार उस स्थान पर गए, तो उन्होंने बाबा के सामने नतमस्तक होकर प्रणाम किया। वहाँ उपस्थित कई बुज़ुर्ग भक्त ऐसे थे जिन्होंने बाबा को साक्षात देखा था। "उन्होंने मुझे बैठाया और वही कंबल ओढ़ा दिया जिसे महाराज जी इस्तेमाल किया करते थे। किसी ने चंदन का लेप लगाया, किसी ने माथे पर तिलक लगाया और दूसरों ने फूल चढ़ाए। उस पल उन्हें सचमुच ऐसा लगा जैसे महाराज जी स्वयं उनके सामने आ गए हों।"
संत का किरदार — चुनौती और आस्था
सुबोध भावे ने कहा, "किसी भी संत का किरदार निभाना बेहद मुश्किल होता है, क्योंकि लोग उन्हें अपार श्रद्धा और भक्ति से देखते हैं। उनके दिलों में संतों के लिए एक पवित्र जगह होती है। ऐसे महात्मा का किरदार निभाना कभी आसान नहीं होता, जब तक कि उनका आशीर्वाद न मिल जाए।" उन्होंने कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि वह यह भूमिका केवल इसलिए निभा सके क्योंकि महाराज जी की कृपा उन पर बनी रही।
आगे की राह
भावे ने उस पहले दिन को अपने जीवन का सबसे अलौकिक अनुभव बताते हुए कहा, "उस समय मुझे महसूस हुआ कि मेरे भीतर एक बेहद शक्तिशाली, सकारात्मक और पवित्र ऊर्जा प्रवेश कर रही है — निस्वार्थ प्रेम और करुणा से भरी हुई। शूटिंग का वह पहला दिन हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण था, क्योंकि वहीं हमें बाबा की प्रत्यक्ष स्वीकृति और आशीर्वाद मिला। उसी का परिणाम था कि आगे की पूरी फिल्म की यात्रा हमारे लिए बेहद सरल हो गई।" फिल्म की रिलीज़ का इंतज़ार कर रहे लाखों भक्तों और सिनेमाप्रेमियों की नज़रें अब इस आध्यात्मिक बायोपिक पर टिकी हैं।