फारूक शेख को याद करते हुए शबाना आजमी ने साझा की पुरानी यादें
सारांश
Key Takeaways
- फारूक शेख और शबाना आजमी की गहरी दोस्ती ने फिल्म इंडस्ट्री में एक मिसाल कायम की।
- जयंती पर याद की गई पुरानी यादें आज भी जीवित हैं।
- फारूक शेख का अभिनय का सफर थिएटर से शुरू हुआ।
- उन्होंने कई दिग्गज निर्देशकों के साथ काम किया।
- उनका निधन फिल्म इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा झटका था।
मुंबई, २५ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। फिल्म उद्योग में कुछ संबंध ऐसे होते हैं, जो जीवनभर बने रहते हैं। ऐसे ही एक विशेष संबंध को याद करते हुए प्रसिद्ध अभिनेत्री शबाना आजमी ने अपने पुराने मित्र और अभिनेता फारूक शेख को उनकी जयंती पर नमन किया। उन्होंने अपने पोस्ट में उन यादों का उल्लेख किया, जो आज भी उनके दिल के करीब हैं।
शबाना आजमी ने इंस्टाग्राम पर फारूक शेख की एक पुरानी फोटो साझा की और उनके साथ बिताए कॉलेज के दिनों को याद किया। उन्होंने कहा कि दोनों ने सेंट जेवियर्स कॉलेज में एक साथ पढ़ाई की, जहाँ से उनकी दोस्ती की शुरुआत हुई।
अपने पोस्ट में शबाना ने लिखा, " परीक्षा के समय फारूक हमेशा मेरा ध्यान रखते थे। वह यह सुनिश्चित करते थे कि मेरे पेन में स्याही खत्म न हो, ताकि मैं सही तरीके से लिख सकूं। जब मैं बीमार होती, तब भी वह मेरे साथ होते थे। हालाँकि, इस दौरान वह मुझे चिढ़ाना नहीं भूलते थे। उन्होंने कभी सीधे मेरी तारीफ नहीं की।"
उन्होंने आगे कहा, "कॉलेज के दिनों के बाद भी हमारा साथ बना रहा। हमने लगभग २२ वर्षों तक विभिन्न जगहों पर एक साथ काम किया। हमने प्रसिद्ध नाटक 'तुम्हारी अमृता' में एक साथ प्रदर्शन किया, जिसे फिरोज अब्बास खान ने निर्देशित किया। आज आपके जन्मदिन पर मैं आपको विशेष रूप से याद कर रही हूँ।"
फारूक शेख के करियर की बात करें तो वह हिंदी सिनेमा के उन कलाकारों में शामिल हैं, जिन्होंने अपनी सादगी और बेहतरीन अभिनय से पहचान बनाई। फारूक शेख ने अपने करियर की शुरुआत थिएटर से की और १९७३ में 'गर्म हवा' के साथ फिल्मों में कदम रखा। उन्होंने सत्यजीत रे, साई परांजपे और ऋषिकेश मुखर्जी जैसे दिग्गजों के साथ कार्य किया और 'चश्मे बद्दूर', 'बाजार' और 'उमराव जान' जैसी फिल्मों से प्रसिद्धि प्राप्त की। वह टीवी और थिएटर में भी सक्रिय रहे और अपने सहज अभिनय के लिए जाने जाते थे।
फारूक शेख का निधन २८ दिसंबर २०१३ को दिल का दौरा पड़ने से हुआ। उस समय वह दुबई में अपने परिवार के साथ छुट्टियां मना रहे थे। उनके निधन से फिल्म उद्योग को गहरा सदमा लगा था।