शेखर कपूर ने श्रीदेवी संग साझा की दुर्लभ तस्वीर, बोले — 'कैमरा घूमते ही जादू हो जाता था'
सारांश
मुख्य बातें
निर्देशक शेखर कपूर ने इंस्टाग्राम पर दिवंगत अभिनेत्री श्रीदेवी के साथ अपनी एक दुर्लभ ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर साझा की और 'मिस्टर इंडिया' के सेट पर बिताए उन अविस्मरणीय पलों को याद किया, जब श्रीदेवी की परफॉर्मेंस उन्हें 'कट' बोलना तक भुला देती थी। यह तस्वीर उनके साथ की सबसे शुरुआती तस्वीरों में से एक बताई जा रही है।
दुर्लभ तस्वीर और भावुक कैप्शन
शेखर कपूर ने इस तस्वीर के साथ लिखा, 'श्रीदेवी का चेहरा कभी नहीं बदला। उनकी आंखों में वही चमक दिखाई दे रही है, जो बाद में 'मिस्टर इंडिया' में नज़र आई थी।' उन्होंने आगे जोड़ा कि दुनिया श्रीदेवी को एक बड़ी स्टार के रूप में याद करती है, लेकिन उनके लिए वह सिर्फ स्टार नहीं, बल्कि 'डायरेक्टर की सबसे अच्छी दोस्त' थीं।
'मिस्टर इंडिया' के सेट की यादें
कपूर ने बताया कि 'मिस्टर इंडिया' जैसी फिल्म श्रीदेवी की शानदार साझेदारी के बिना संभव ही नहीं थी। उन्होंने कहा कि हर दिन सेट पर जाने की उत्सुकता इसलिए रहती थी क्योंकि श्रीदेवी हर बार अपने अभिनय से कुछ नया और चौंकाने वाला पेश करती थीं।
निर्देशक ने कैमरे के सामने और पीछे श्रीदेवी के दो बिल्कुल अलग रूपों का भी ज़िक्र किया। उनके अनुसार, कैमरा बंद होने पर श्रीदेवी बेहद शांत स्वभाव की थीं — बिना किसी दिखावे के अपनी कुर्सी पर बैठी रहती थीं। 'लेकिन जैसे ही कैमरा उनकी तरफ घूमता था, सब कुछ बदल जाता था,' कपूर ने लिखा।
जब 'कट' बोलना भी भूल गए
शेखर कपूर ने खुलासा किया कि डांस सीक्वेंस के दौरान वह खुद भी श्रीदेवी की परफॉर्मेंस में इस कदर खो जाते थे कि कैमरा बंद करने के लिए 'कट' बोलना तक याद नहीं रहता था। उन्होंने लिखा, 'उनकी परफॉर्मेंस में एक ऐसी बिजली थी, जो पूरे सेट को अपने प्रभाव में ले लेती थी।' यह ऊर्जा सिर्फ कैमरे तक सीमित नहीं रहती थी, बल्कि सेट पर मौजूद हर व्यक्ति उसे महसूस करता था।
'मिस्टर इंडिया' और श्रीदेवी की विरासत
1987 में रिलीज़ हुई 'मिस्टर इंडिया' में श्रीदेवी ने पत्रकार सीमा सोनी का किरदार निभाया था, जबकि अनिल कपूर अरुण वर्मा की भूमिका में थे। फिल्म में सतीश कौशिक और अमरीश पुरी ने भी अहम किरदार निभाए। फिल्म के गाने 'हवा हवाई' और 'काटे नहीं कटते' में श्रीदेवी के डांस आज भी दर्शकों के ज़हन में ताज़ा हैं।
गौरतलब है कि श्रीदेवी ने 'सदमा' की मानसिक रूप से कमज़ोर लड़की से लेकर 'इंग्लिश विंग्लिश' की आत्मविश्वासी गृहिणी तक — हर किरदार में अपनी अलग छाप छोड़ी। हिंदी सिनेमा में उनकी विरासत आज भी अमिट है।