कृति खरबंदा ने उठाया सोशल मीडिया का दर्द: 'खुद को बेहतर दिखाने की होड़ में जी रहे युवा'
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री कृति खरबंदा ने गुरुवार, 11 जून को इंस्टाग्राम स्टोरी के ज़रिए सोशल मीडिया के बढ़ते दबाव और युवाओं पर इसके मानसिक व भावनात्मक असर को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि हाल ही में एक कार्यक्रम में उनकी मुलाकात कुछ ऐसे युवाओं से हुई, जो डिजिटल दुनिया की अपेक्षाओं के बोझ तले दबे हुए थे।
कार्यक्रम में मिले युवाओं का हाल
कृति ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा, 'आज मैं कुछ लोगों से मिली। वे सभी भावनात्मक, शारीरिक और मानसिक रूप से बुरी तरह थके हुए थे।' उन्होंने आगे जोड़ा कि इन युवाओं का काम बेहद मुश्किल और अनिश्चितताओं से भरा था, और इन सबके बावजूद वे सोशल मीडिया पर लगातार सक्रिय बने रहने का दबाव झेल रहे थे।
अभिनेत्री ने कहा कि इन सभी युवाओं में एक बात समान थी — वे इंटरनेट पर हमेशा मौजूद रहने और खुद को दूसरों से बेहतर दिखाने की अंतहीन होड़ में उलझे हुए थे। उनके पास बड़े सपने थे और उन्हें पूरा करने का जज़्बा भी, लेकिन सोशल मीडिया की यह दौड़ उनके असली लक्ष्यों के बीच रुकावट बन रही थी।
तुलना और दिखावे का दुष्चक्र
कृति ने लिखा कि ये युवा लगातार दूसरों से अपनी तुलना करते रहते हैं और बिना चाहे भी कुछ न कुछ पोस्ट करने के दबाव में जीते हैं। उनमें से कई अपनी निजी ज़िंदगी को सोशल मीडिया से दूर रखना चाहते थे, लेकिन उन्हें यह डर सताता था कि ऐसा करने पर वे दूसरों की नज़रों में कम आकर्षक या प्रासंगिक लगने लगेंगे।
यह ऐसे समय में आया है जब विश्वभर में किशोरों और युवाओं पर सोशल मीडिया के मनोवैज्ञानिक प्रभाव को लेकर चिंताएँ बढ़ रही हैं। कई देशों में इस विषय पर नीतिगत बहस भी तेज़ हो रही है।
कृति का संदेश: ज़िंदगी सोशल मीडिया से बड़ी है
अभिनेत्री ने दुख जताते हुए लिखा, 'यह देखकर मेरा दिल बैठ गया। काश लोग समझ पाते कि सोशल मीडिया ज़िंदगी का सिर्फ एक छोटा सा हिस्सा है, पूरी ज़िंदगी नहीं।' उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया के बिना भी एक खूबसूरत और सुकूनभरी ज़िंदगी जी जा सकती है।
युवाओं से अपील
कृति ने युवाओं से मानसिक शांति को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि निजी बातें साझा न करना और लोगों को अपनी ज़िंदगी में शामिल न करना पूरी तरह सामान्य है। उनके शब्दों में, 'किसी भी इंसान की कीमत उसके सोशल मीडिया अकाउंट से तय नहीं होनी चाहिए।'
कृति ने माना कि उनकी यह बात शायद शिकायत जैसी लग सकती है, लेकिन उन्हें विश्वास है कि बहुत से लोग मन ही मन ऐसा ही सोचते हैं। उनकी यह अपील सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा की जा रही है और युवाओं में चर्चा का विषय बनी हुई है।