सीमा पाहवा का छात्र प्रदर्शन को समर्थन: 'इंसानियत जगाइए, बच्चों के साथ खड़े होइए'
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री सीमा पाहवा ने 22 जुलाई को इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट कर देश में जारी छात्र प्रदर्शन के प्रति अपना खुला समर्थन व्यक्त किया। उन्होंने प्रदर्शनकारी छात्रों, उनके परिवारों और पूरे देश के साथ एकजुटता जताते हुए उन प्रभावशाली लोगों पर भी सवाल उठाए जो इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं।
क्या कहा सीमा पाहवा ने
अपने वीडियो में सीमा पाहवा ने कहा कि छात्रों को जिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है, वह बेहद चिंताजनक है। उनके अनुसार, समाज के हर वर्ग को अपने निजी हितों से ऊपर उठकर देश और मानवता के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। उन्होंने सीधे शब्दों में कहा, 'सिर्फ काम रुक जाने या कुछ पुरस्कार न मिलने के डर से चुप रहना सही नहीं है। देश को इस समय हर क्षेत्र के लोगों के समर्थन की जरूरत है। हर इंसान की जरूरत है, लेकिन हम सब अपनी जगह बचाने की दौड़ में फंसे हुए हैं। हमें सोचना चाहिए कि असली गरिमा और इंसानियत को कैसे बचाया जाए।'
प्रभावशाली लोगों की चुप्पी पर सवाल
सीमा पाहवा ने कहा कि कई प्रभावशाली व्यक्ति इस मसले पर इसलिए मौन हैं क्योंकि उन्हें अपने करियर और काम पर पड़ने वाले असर का भय है। उन्होंने इसे समाज के लिए चिंताजनक बताया और कहा कि ऐसे वक्त में इंसानियत को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब सार्वजनिक हस्तियों की सामाजिक जिम्मेदारी पर बहस तेज हो रही है।
शबाना आज़मी की सराहना
अभिनेत्री ने वरिष्ठ अभिनेत्री शबाना आज़मी का विशेष उल्लेख करते हुए उनकी प्रशंसा की। सीमा पाहवा ने कहा कि वह शबाना आज़मी की प्रशंसक हैं क्योंकि उन्होंने छात्रों के समर्थन में आगे आकर अपनी बात रखने का साहस दिखाया। उन्होंने यह भी कहा कि यदि वह अपनी निजी परिस्थितियों में व्यस्त नहीं होतीं, तो वह स्वयं भी छात्रों के बीच पहुँचतीं।
इंस्टाग्राम कैप्शन में जताई एकजुटता
अपनी इंस्टाग्राम पोस्ट के कैप्शन में सीमा पाहवा ने लिखा, 'मैं इन बच्चों के साथ हूं, इन परिवारों के साथ हूं, इस देश के साथ हूं।' गौरतलब है कि यह पोस्ट ऐसे समय में आई है जब छात्र प्रदर्शन को लेकर मनोरंजन जगत में अधिकांश हस्तियाँ सार्वजनिक टिप्पणी से बचती रही हैं।
आगे क्या
सीमा पाहवा की यह अपील सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है। उनका कहना है कि यदि जनता का समर्थन नहीं होगा तो कोई भी व्यवस्था लंबे समय तक लोगों का भरोसा कायम नहीं रख सकती। उनकी यह आवाज़ अन्य सार्वजनिक हस्तियों पर भी अपना रुख स्पष्ट करने का दबाव बना सकती है।