सोनू निगम का खुलासा: 'मैं भी ऑटो-ट्यून इस्तेमाल करता हूँ, लेकिन 99% खुद देता हूँ'
सारांश
मुख्य बातें
मशहूर प्लेबैक सिंगर सोनू निगम ने स्वीकार किया है कि वह अपने कुछ गानों में ऑटो-ट्यून का सीमित उपयोग करते हैं — और उन्होंने इसे डिजिटल युग की अनिवार्यता बताया। 12 अगस्त को बॉक्स ऑफिस ट्रेड एक्सपर्ट कोमल नाहटा के पॉडकास्ट 'गेम चेंजर्स: द म्यूजिक सीरीज' में दिए साक्षात्कार में उन्होंने संगीत उद्योग में आए तकनीकी बदलावों पर बेबाकी से अपनी राय रखी।
क्या बोले सोनू निगम
निगम ने कहा, 'ऑटो-ट्यून के दौर ने निश्चित रूप से बहुत सारे बदलाव किए हैं। लोग इसके बारे में बहुत सी बुरी बातें कहते हैं, लेकिन मैं कहता हूँ कि जो भी हुआ है, अच्छा हुआ है।' उन्होंने जोड़ा कि पहले के दिनों में बिना ऑटो-ट्यून के गाना पड़ता था और लाइव सारंगी व स्ट्रिंग्स के साथ पिच का एकदम सटीक होना उतना ज़रूरी नहीं था।
उनके अनुसार, 'अब सब कुछ 440 (पिच-परफेक्ट) है — पहले सब कुछ लाइव होता था।' उन्होंने माना कि वह अपने गानों में ऑटो-ट्यून का प्रयोग करते हैं, परंतु इसे एक सहायक उपकरण के रूप में देखते हैं, न कि प्रतिस्थापन के रूप में।
डिजिटल युग और रॉ आवाज़ की चुनौती
सोनू निगम ने समझाया कि आधुनिक डिजिटल रिकॉर्डिंग परिवेश में बिना ट्रीटमेंट की रॉ आवाज़ गाने के साथ मेल नहीं खाती। उन्होंने कहा, 'अब सब कुछ डिजिटलाइज़ हो गया है, सब कुछ एक सीधी लाइन में चल रहा है — अगर आपकी आवाज़ रॉ होगी तो वह अजीब लगेगी।' पहले लाइव म्यूज़िक के हिसाब से आवाज़ खुद-ब-खुद एडजस्ट हो जाती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं होता।
ऑटो-ट्यून की सीमा और ज़िम्मेदारी
निगम ने स्पष्ट किया कि ऑटो-ट्यून का नैतिक उपयोग और दुरुपयोग दो अलग बातें हैं। उनके शब्दों में, 'यह हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम उन लोगों की आवाज़ ठीक करने के लिए इन साधनों का इस्तेमाल न करें जो गा नहीं सकते।' उन्होंने इसे एक फ़ॉर्मूले में समेटा — 'आप अपना 99 प्रतिशत देते हैं और ऑटो-ट्यून से उसे 100 प्रतिशत तक ले जाते हैं।'
अभिनेताओं के गाने पर सोनू का नज़रिया
कई अभिनेताओं द्वारा अपने गानों में ऑटो-ट्यून के इस्तेमाल पर निगम ने कहा कि यदि वे अपने सपनों को पूरा करने के लिए इसका उपयोग करते हैं तो यह बिल्कुल ठीक है। हालाँकि उन्होंने साफ़ किया, 'वे सिंगर्स की जगह नहीं ले सकते।' गौरतलब है कि सोनू निगम दशकों से अपनी शास्त्रीय प्रशिक्षण और लाइव परफॉर्मेंस के लिए पहचाने जाते हैं, और उन्होंने लाइव ऑर्केस्ट्रा रिकॉर्डिंग के दौर से आधुनिक डिजिटल युग तक का सफ़र खुद देखा है।
संगीत उद्योग पर व्यापक असर
यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारतीय संगीत उद्योग में ऑटो-ट्यून और एआई-आधारित वॉइस टूल्स को लेकर बहस तेज़ हो रही है। प्रशिक्षित गायकों और तकनीकी सहायता के बीच की रेखा को लेकर सोनू निगम का यह संतुलित दृष्टिकोण उद्योग में एक अहम परिप्रेक्ष्य जोड़ता है।