क्या सुधा कोंगरा ने यूथ कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया? फिल्म में नेहरू और इंदिरा गांधी को दिखाया गया है महान नेता!
सारांश
Key Takeaways
- पराशक्ति फिल्म में 1960 के दशक के एंटी-हिंदी आंदोलन को दर्शाया गया है।
- सुधा कोंगरा ने फिल्म में नेताओं को सकारात्मक भूमिका में प्रस्तुत किया है।
- फिल्म में इंदिरा गांधी और नेहरू का चित्रण विवाद का विषय बना है।
चेन्नई, 14 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। तमिल सिनेमा में हमेशा से इतिहास और राजनीति के महत्वपूर्ण पहलुओं पर फिल्में बनाई जाती रही हैं। हाल ही में एक नई फिल्म 'पराशक्ति' रिलीज हुई है, जो 1960 के दशक के एंटी-हिंदी आंदोलन को प्रदर्शित करती है। इस आंदोलन ने यह विरोध किया था कि हिंदी को देश की एकमात्र आधिकारिक भाषा नहीं बनाया जाना चाहिए। इस फिल्म में इस ऐतिहासिक मुद्दे को बेहद जीवंत तरीके से दर्शाया गया है। फिल्म के निर्देशक सुधा कोंगरा ने इस विषय पर राष्ट्र प्रेस से बातचीत की।
सुधा कोंगरा ने कहा, ''फिल्म में कांग्रेस नेताओं को गलत तरीके से नहीं दिखाया गया है। मैंने इन्हें सकारात्मक और लोकतांत्रिक नेताओं के रूप में प्रस्तुत किया है, विशेष रूप से पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को महान नेता के रूप में। यह फिल्म दर्शकों को यह दिखाती है कि कैसे इन नेताओं ने देश की राजनीति में लोकतंत्र और विश्वास के मूल्यों को बनाए रखा।''
कुछ दिन पहले, तमिलनाडु यूथ कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि फिल्म में उनके नेताओं को गलत तरीके से पेश किया गया है। इस पर सुधा कोंगरा ने कहा, ''यह दावा पूरी तरह से गलत है।'' उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने वादा किया था कि जब तक दक्षिण भारत के लोग सहमत नहीं होंगे, तब तक हिंदी अकेली आधिकारिक भाषा नहीं बनेगी। फिल्म में मुख्य पात्र इस वादे की याद दिलाता है।
सुधा कोंगरा ने कहा, ''फिल्म में इंदिरा गांधी को दिखाने का तरीका भी विशेष है। जब कुछ लोग मुख्य पात्र को रोकने की कोशिश करते हैं, तब इंदिरा गांधी खुद बोलती हैं, 'रुको!' और आगे भाषण देती हैं। यह सीन दिखाता है कि लोकतांत्रिक नेता का काम केवल आदेश देना नहीं, बल्कि लोगों की बात सुनना और सही निर्णय लेना होता है।''
उन्होंने आगे कहा, ''नेहरू और इंदिरा गांधी दोनों ही अत्यंत सकारात्मक और लोकतांत्रिक नेता थे। फिल्म में उन्हें किसी भी तरह से तानाशाह के रूप में नहीं दिखाया गया। हमने दर्शकों को यह दिखाने की कोशिश की है कि ये नेता वास्तव में लोगों की भलाई और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध थे।''
फिल्म में शिवकार्तिकेयन और श्रीलीला मुख्य भूमिकाओं में हैं, जबकि रवि मोहन खलनायक के रूप में नजर आएंगे।
यह फिल्म पोंगल के त्योहार के अवसर पर 10 जनवरी को रिलीज हुई।