तुषार कपूर का सिंगल फादर सफर: 'लक्ष्य मेरे लिए आशीर्वाद है, जब तैयार था तभी पिता बना'
सारांश
मुख्य बातें
बॉलीवुड अभिनेता तुषार कपूर ने अपने बेटे लक्ष्य के साथ अपने रिश्ते और एक सिंगल फादर के रूप में पालन-पोषण के अनुभव को लेकर खुलकर बातें साझा की हैं। मुंबई में हुई इस खास बातचीत में उन्होंने बताया कि 2016 में सरोगेसी के ज़रिए पिता बनने का उनका निर्णय पूरी तरह सोचा-समझा था और उन्होंने इसे कभी बोझ नहीं माना।
वैनिटी वैन और बचपन की यादें
तुषार ने एक दिलचस्प किस्सा साझा करते हुए बताया कि करीब दो-तीन साल पहले जब लक्ष्य पहली बार उनके शूटिंग सेट पर आया, तो वैनिटी वैन देखकर वह बेहद खुश हो गया और उसके अंदर स्लाइड करने लगा। उन्होंने कहा, 'बेटे को इस तरह खुश देखकर मुझे भी काफी अच्छा लगा था।' यह छोटी-सी याद उनके लिए पितृत्व की मिठास का प्रतीक बन गई।
सिंगल पैरेंट की ज़िम्मेदारियाँ
अभिनेता ने बताया कि जब लक्ष्य छोटा था, तो वह उसे गोद में लेकर बाहर घुमाने जाते थे, पार्टियों में साथ ले जाते थे और खुद उसे तैयार करते थे। उन्होंने स्पष्ट किया, 'मेरे पास मदद के लिए लोग ज़रूर हैं, लेकिन बेटे की परवरिश से जुड़े कई कामों की ज़िम्मेदारी मैंने खुद संभाली है।' लक्ष्य की पढ़ाई, स्कूल के काम, पार्टियों का आयोजन और वैक्सीनेशन जैसी ज़रूरी चीज़ें भी उन्होंने स्वयं देखी हैं।
40 की उम्र में पिता बनने का सचेत फैसला
सिंगल पैरेंट के तौर पर आने वाली चुनौतियों पर तुषार ने कहा कि उन्होंने पिता बनने को कभी बोझ नहीं समझा। उनके अनुसार, 'मैंने 40 साल की उम्र में पिता बनने का फैसला किया था और उस समय तक मैं इसके लिए पूरी तरह तैयार और स्पष्ट था।' उन्होंने जोड़ा कि जो व्यक्ति 40 की उम्र में भी यह तय न कर पाए कि वह पिता बनना चाहता है या नहीं, उसके फैसले पर सवाल उठना स्वाभाविक है। इसीलिए उन्हें कभी यह डर नहीं रहा कि वह अकेले बच्चे की परवरिश कैसे करेंगे।
लक्ष्य — जिंदगी को नया अर्थ देने वाला आशीर्वाद
अभिनेता ने अपने बेटे के जन्म को जीवन का सबसे बड़ा आशीर्वाद बताया। उन्होंने कहा, 'जब लक्ष्य मेरी ज़िंदगी में आया, तो उसने मेरी पूरी दुनिया बदल दी और जीवन को एक नया अर्थ दिया।' अब लक्ष्य बड़ा हो चुका है और कई चीज़ें खुद से संभालने लगा है, जो तुषार के लिए संतोष का विषय है। यह सफर बताता है कि पितृत्व का अनुभव परंपरागत ढाँचे से परे भी उतना ही गहरा और पूर्ण हो सकता है।