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'गंगा माई की बेटियां' की वैष्णवी प्रजापति बोलीं — 'सोनी का दर्द जीना आसान नहीं था'

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'गंगा माई की बेटियां' की वैष्णवी प्रजापति बोलीं — 'सोनी का दर्द जीना आसान नहीं था'

सारांश

'गंगा माई की बेटियां' में रैगिंग का दर्द सिर्फ पर्दे पर नहीं था — वैष्णवी प्रजापति ने इसे भीतर तक महसूस किया। सोनी की चुप्पी को कमज़ोरी नहीं, मानसिक आघात बताकर उन्होंने एक ज़रूरी सामाजिक बहस छेड़ी है।

मुख्य बातें

अभिनेत्री वैष्णवी प्रजापति ने जी टीवी के शो 'गंगा माई की बेटियां' में रैगिंग सीन्स की शूटिंग को अपने करियर का सबसे भावनात्मक अनुभव बताया।
उन्होंने कहा कि किरदार सोनी की मानसिक स्थिति को समझना सिर्फ डायलॉग बोलने से कहीं ज़्यादा मुश्किल था।
सोनी के कपड़े फटने वाला सीन उनके लिए शो का सबसे कठिन दृश्य रहा।
वैष्णवी ने स्पष्ट किया कि सोनी की चुप्पी कमज़ोरी नहीं, बल्कि डर और मानसिक आघात की अभिव्यक्ति है।
आने वाले एपिसोड में छात्रा शिवानी पूरे मामले को पलटने की कोशिश करेगी, जिससे कहानी में नया संघर्ष जुड़ेगा।
शो में अमनदीप सिद्धू और शहीर खान भी मुख्य भूमिकाओं में हैं।

अभिनेत्री वैष्णवी प्रजापति ने बताया कि जी टीवी के शो 'गंगा माई की बेटियां' में रैगिंग से जुड़े सीन्स की शूटिंग उनके अभिनय करियर के सबसे भावनात्मक अनुभवों में से एक रही। 7 अगस्त को दिए एक विशेष इंटरव्यू में उन्होंने खुलासा किया कि किरदार सोनी की पीड़ा और मजबूरी को पर्दे पर जीवंत करना तकनीकी रूप से नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक रूप से अत्यंत कठिन था।

स्क्रिप्ट पढ़ते ही जुड़ गया भावनात्मक तार

वैष्णवी ने बताया, 'जब मैंने रैगिंग से जुड़े सीन की स्क्रिप्ट पढ़ी, तभी से मैं कहानी से भावनात्मक रूप से जुड़ गई थी। इन सीन्स को निभाने के लिए केवल डायलॉग बोलना ही काफी नहीं था, बल्कि अपने किरदार की मानसिक स्थिति को समझना और महसूस करना भी था।' उन्होंने स्वीकार किया कि उनकी अधिकांश पढ़ाई ऑनलाइन हुई है, इसलिए उन्होंने व्यक्तिगत रूप से कभी रैगिंग का सामना नहीं किया। फिर भी उन्होंने शोध और कल्पनाशीलता के ज़रिए सोनी की मनःस्थिति को गहराई से समझा।

रैगिंग और मस्ती में फर्क — वैष्णवी की नज़र से

वैष्णवी ने रैगिंग की परिभाषा को सरल शब्दों में रखा। उन्होंने कहा, 'दोस्तों के बीच हल्की-फुल्की हंसी-मजाक और किसी को मानसिक रूप से परेशान करने वाली हरकतों में बड़ा फर्क होता है। किसी भी व्यक्ति के आत्मसम्मान को चोट पहुंचाने वाली या उसे डराने वाली रैगिंग को कभी सही नहीं ठहराया जा सकता।' यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब देश में रैगिंग-विरोधी जागरूकता को लेकर सामाजिक बहस तेज़ है।

सबसे मुश्किल सीन और उसके पीछे की सोच

वैष्णवी ने शो के एक विशेष दृश्य का उल्लेख करते हुए कहा, 'सोनी के कपड़े फटने वाला सीन मेरे लिए सबसे मुश्किल सीन्स में से एक था। उस सीन को करते समय मेरे मन में बार-बार यह विचार आ रहा था कि अगर असल जिंदगी में किसी के साथ ऐसा कुछ होता है तो वह कितना दर्दनाक हो सकता है।' उन्होंने यह भी साझा किया कि शूटिंग से पहले उनके मन में सवाल था कि सोनी जैसी मज़बूत लड़की विरोध क्यों नहीं करती — लेकिन किरदार को गहराई से समझने पर एहसास हुआ कि 'डर, दबाव और मानसिक आघात किसी भी व्यक्ति को अंदर से तोड़ सकते हैं।'

सोनी की चुप्पी — कमज़ोरी नहीं, मानसिक अवस्था

वैष्णवी ने दर्शकों को एक ज़रूरी संदेश दिया: 'सोनी का चुप रहना उसकी कमज़ोरी नहीं, बल्कि उस समय की उसकी मानसिक स्थिति को दिखाता है।' उन्होंने कहा कि एक कलाकार के तौर पर इन सीन्स की शूटिंग के दौरान वे कई बार भावुक हुईं, लेकिन साथ ही गर्व भी महसूस हुआ कि वे एक ऐसी कहानी का हिस्सा हैं जो एक महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दे पर बात करती है।

आगे क्या होगा शो में

आने वाले एपिसोड में कहानी एक नए मोड़ पर पहुंचेगी। रैगिंग के लिए जिम्मेदार छात्रा शिवानी अपनी चालाकी से पूरे मामले को पलटने की कोशिश करेगी और घटनाओं को इस तरह पेश करेगी जैसे सोनी ने ही उसे परेशान किया हो। इस नए संघर्ष के साथ शो की कहानी और गहरी होने की उम्मीद है। 'गंगा माई की बेटियां' में वैष्णवी प्रजापति के साथ अमनदीप सिद्धू और शहीर खान भी मुख्य भूमिकाओं में हैं और यह शो प्रतिदिन जी टीवी पर प्रसारित होता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह कहानी दर्शकों में जागरूकता लाती है या महज़ नाटकीय तत्व बनकर रह जाती है। वैष्णवी का यह कहना कि 'सोनी की चुप्पी कमज़ोरी नहीं' — यह संदेश उन लाखों छात्रों के लिए प्रासंगिक है जो रैगिंग के शिकार होकर भी आवाज़ नहीं उठा पाते। भारत में रैगिंग-विरोधी कानून दशकों पुराने हैं, फिर भी घटनाएँ थमती नहीं — ऐसे में एंटरटेनमेंट का यह माध्यम जागरूकता का एक ज़रूरी पुल बन सकता है, बशर्ते कहानी सनसनीखेज़ी से बचे और पीड़ित के नज़रिए को केंद्र में रखे।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'गंगा माई की बेटियां' में वैष्णवी प्रजापति कौन-सा किरदार निभा रही हैं?
वैष्णवी प्रजापति जी टीवी के शो 'गंगा माई की बेटियां' में 'सोनी' का किरदार निभा रही हैं, जो रैगिंग की शिकार एक छात्रा है। यह शो प्रतिदिन जी टीवी पर प्रसारित होता है।
वैष्णवी प्रजापति के लिए शो का सबसे मुश्किल सीन कौन-सा था?
वैष्णवी ने बताया कि सोनी के कपड़े फटने वाला दृश्य उनके लिए शो का सबसे कठिन सीन था। उस दौरान उनके मन में बार-बार यह विचार आया कि असल जिंदगी में ऐसी घटना कितनी दर्दनाक हो सकती है।
शो में सोनी रैगिंग का विरोध क्यों नहीं करती?
वैष्णवी ने समझाया कि सोनी की चुप्पी उसकी कमज़ोरी नहीं, बल्कि डर, दबाव और मानसिक आघात का नतीजा है। उनके अनुसार, ये तीनों कारक किसी भी व्यक्ति को भीतर से तोड़ सकते हैं।
'गंगा माई की बेटियां' में आगे क्या होगा?
आने वाले एपिसोड में रैगिंग के लिए जिम्मेदार छात्रा शिवानी घटनाओं को इस तरह पेश करेगी जैसे सोनी ने ही उसे परेशान किया हो। इस नए मोड़ से कहानी में एक बड़ा संघर्ष जुड़ेगा।
'गंगा माई की बेटियां' में मुख्य कलाकार कौन-कौन हैं?
शो में वैष्णवी प्रजापति के साथ अमनदीप सिद्धू और शहीर खान मुख्य भूमिकाओं में हैं। यह शो जी टीवी पर रोज़ाना प्रसारित होता है।
राष्ट्र प्रेस
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