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'गंगा माई की बेटियां' ने दी शुभांगी लाटकर को असली ज़िंदगी में हिम्मत, बोलीं— 'गंगा का हौसला मेरी ताकत बना'

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'गंगा माई की बेटियां' ने दी शुभांगी लाटकर को असली ज़िंदगी में हिम्मत, बोलीं— 'गंगा का हौसला मेरी ताकत बना'

सारांश

पर्दे पर गंगा माई की भूमिका निभाना शुभांगी लाटकर के लिए महज़ अभिनय नहीं रहा — यह उनकी निजी ज़िंदगी की कठिन घड़ियों में असली सहारा बना। एक ऐसे किरदार की कहानी जिसने अभिनेत्री को भी हार न मानना सिखाया।

मुख्य बातें

शुभांगी लाटकर टीवी सीरियल 'गंगा माई की बेटियां' में गंगा माई की मुख्य भूमिका निभा रही हैं।
अभिनेत्री ने बताया कि इस किरदार ने उनके निजी जीवन के मुश्किल दौर में हिम्मत और प्रेरणा दी।
सीरियल की कहानी में गंगा का ढाबा आग में जलकर नष्ट हो जाता है, लेकिन वह हार नहीं मानती।
गंगा एक कुकिंग कॉम्पिटिशन में हिस्सा लेकर नए सिरे से ज़िंदगी बनाने का फैसला करती है।
शुभांगी ने कहा कि गंगा का 'कभी हार न मानने वाला जज्बा' उन्हें गहराई से प्रेरित करता है।

टेलीविजन अभिनेत्री शुभांगी लाटकर इन दिनों टीवी सीरियल 'गंगा माई की बेटियां' में गंगा माई की केंद्रीय भूमिका निभा रही हैं। अभिनेत्री ने खुलासा किया है कि यह किरदार सिर्फ एक अभिनय-चुनौती नहीं, बल्कि उनके निजी जीवन के कठिन दौर में उनका सबसे बड़ा सहारा बना।

किरदार से मिली असली प्रेरणा

शुभांगी ने बताया कि पर्दे पर एक दृढ़ और साहसी महिला को जीते हुए उन्हें अपनी ज़िंदगी की चुनौतियों से लड़ने की ताकत मिली। उन्होंने कहा, 'सीरियल में गंगा का किरदार निभाने से मुझे बहुत हिम्मत मिली है और शो के अलावा भी कई तरीकों से मुझे प्रेरणा मिली। भले ही मैं पर्सनली उनके हालात से रिलेट न कर पाऊं लेकिन मैं उनके कभी हार न मानने वाले जज्बे से गहराई से जुड़ती हूं।'

उतार-चढ़ाव और वापसी का हौसला

अभिनेत्री ने स्वीकार किया कि उनकी अपनी ज़िंदगी भी संघर्षों से अछूती नहीं रही। उन्होंने कहा, 'गंगा की तरह, मेरी जिंदगी में भी उतार-चढ़ाव आए हैं और ऐसे पल भी आए जब अपने पैरों पर वापस खड़े होने की हिम्मत जुटाना मुश्किल लगा लेकिन हर बार मैंने अपने डर का सामना करने, खुद को संभालने और आगे बढ़ने का फैसला किया। गंगा का सफर मुझे याद दिलाता है कि मुश्किलें आपको हिला सकती हैं लेकिन वे कभी भी आपको पराजित नहीं कर सकतीं।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि उन्हें उम्मीद है कि गंगा की यह कहानी दर्शकों को भी उसी तरह प्रेरित करती रहेगी।

सीरियल की कहानी

'गंगा माई की बेटियां' की कथा उस पल से शुरू होती है जब गंगा का वर्षों की मेहनत और यादों से सजा प्यारा ढाबा आग की लपटों में जलकर राख हो जाता है। यह नुकसान किसी को भी तोड़ देने के लिए काफी होता, लेकिन गंगा हार नहीं मानती। वह नए सिरे से शुरुआत करने का साहस जुटाती है और एक कुकिंग कॉम्पिटिशन में हिस्सा लेती है, इस उम्मीद के साथ कि यह मंच उसे खोई हुई ज़िंदगी वापस दिलाएगा।

दर्शकों पर असर

यह सीरियल उस वर्ग की महिलाओं की कहानी कहता है जो समाज और परिस्थितियों की मार झेलते हुए भी डटी रहती हैं। शुभांगी का मानना है कि गंगा का 'कभी न झुकने वाला' स्वभाव दर्शकों — खासकर महिलाओं — के लिए एक प्रेरणास्रोत बन सकता है। इस किरदार के ज़रिये वे खुद को और अपने दर्शकों को एक ही संदेश देना चाहती हैं — संघर्ष अंत नहीं, बल्कि नई शुरुआत की भूमिका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या अभिनेताओं को भी गढ़ते हैं? गंगा जैसे किरदार, जो आपदा के बाद पुनर्निर्माण की कहानी कहते हैं, मुख्यधारा के टीवी में दुर्लभ हैं जहाँ अक्सर पारिवारिक षड्यंत्र और भावनात्मक नाटकीयता हावी रहती है। यह भी उल्लेखनीय है कि एक वरिष्ठ अभिनेत्री का किसी किरदार से इस स्तर पर जुड़ाव स्वीकार करना, दर्शकों के साथ एक ईमानदार संवाद है — जो टीवी इंडस्ट्री में कम देखने को मिलता है।
RashtraPress
20 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'गंगा माई की बेटियां' सीरियल की कहानी क्या है?
यह सीरियल गंगा (शुभांगी लाटकर) की कहानी है, जिसका वर्षों की मेहनत से बना ढाबा आग में जलकर राख हो जाता है। इस नुकसान के बावजूद वह हार नहीं मानती और एक कुकिंग कॉम्पिटिशन में हिस्सा लेकर नई शुरुआत करती है।
शुभांगी लाटकर को 'गंगा माई की बेटियां' से क्या प्रेरणा मिली?
शुभांगी ने बताया कि गंगा के 'कभी हार न मानने वाले जज्बे' ने उन्हें अपनी निजी ज़िंदगी के कठिन उतार-चढ़ाव से उबरने में मदद की। उन्होंने कहा कि यह किरदार उनके मुश्किल दौर में हिम्मत का असली ज़रिया बना।
शुभांगी लाटकर 'गंगा माई की बेटियां' में कौन-सा किरदार निभा रही हैं?
शुभांगी लाटकर इस सीरियल में केंद्रीय पात्र 'गंगा माई' की भूमिका में हैं, जो एक साहसी और दृढ़-इच्छाशक्ति वाली महिला की कहानी है।
क्या 'गंगा माई की बेटियां' महिला दर्शकों के लिए प्रेरणादायक है?
शुभांगी लाटकर के अनुसार, गंगा की कहानी हर उस इंसान को प्रेरित कर सकती है जिसने जीवन में कठिन परिस्थितियों का सामना किया हो। उन्हें उम्मीद है कि यह कहानी सीरियल देखने वाले सभी दर्शकों को आगे बढ़ने की ताकत देगी।
शुभांगी लाटकर ने अपनी निजी मुश्किलों के बारे में क्या कहा?
अभिनेत्री ने माना कि उनकी ज़िंदगी में भी ऐसे पल आए जब खुद को संभालना कठिन लगा। उन्होंने कहा कि हर बार उन्होंने डर का सामना करने और आगे बढ़ने का फैसला किया, और गंगा का सफर उन्हें यही याद दिलाता है।
राष्ट्र प्रेस
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