कैसे वर्षा उसगांवकर को 'महाभारत' में उत्तरा का रोल मिला, बिना स्क्रीन टेस्ट के?
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मुंबई, 27 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। 90 के दशक की मशहूर अभिनेत्री वर्षा उसगांवकर, जिन्होंने फिल्म इंडस्ट्री को 'दूध का कर्ज' और 'तिरंगा' जैसी सफल फिल्में दी हैं, 'महाभारत' शो में उत्तरा की भूमिका निभाने के लिए संयोगवश चुनी गई थीं। दिलचस्प बात यह है कि उन्हें यह रोल बिना किसी स्क्रीन टेस्ट के मिला।
वर्षा का जन्म 28 फरवरी 1968 को गोवा में हुआ था। उनके पिता ए.के.एस. उसगांवकर गोवा के पूर्व डिप्टी स्पीकर रह चुके हैं। वर्षा ने अपने करियर की शुरुआत मराठी थिएटर से की और जल्दी ही मराठी सिनेमा में पहचान बनाई। लेकिन उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब उन्होंने बीआर चोपड़ा की 'महाभारत' सीरियल में उत्तरा की भूमिका निभाई। यह उनके पिता की लंबे समय से इच्छा का परिणाम था कि उनकी बेटी इस महाकाव्य का हिस्सा बने।
वर्षा ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने कभी 'महाभारत' के लिए ट्राई नहीं किया। जब सीरियल शुरू हुए एक साल हो चुका था, तब उनके पिता की इच्छा थी कि वह इस शो में कोई भूमिका निभाएं। एक दिन, वर्षा अपने परिवार के साथ महाभारत की शूटिंग देखने गईं। उस समय छोटे अभिमन्यु का शूट चल रहा था और जल्द ही अभिमन्यु के बड़े होने और उत्तरा से शादी का सीन आने वाला था। इसी दौरान, शो में शकुनि मामा का किरदार निभाने वाले गुफी पेंटल ने वर्षा को देखा और उनसे पूछा, "क्या आप उत्तरा का रोल निभाने में रुचि रखती हैं?" वर्षा हैरान रह गईं, लेकिन उनके माता-पिता ने तुरंत हां कर दी।
पिता की इच्छा को देखते हुए, बिना किसी स्क्रीन टेस्ट के वर्षा को उत्तरा का रोल मिल गया। महाभारत में उनकी एंट्री एक डांस से हुई थी, जिसे गोपी जी ने कत्थक शैली में कोरियोग्राफ किया। इस एक दृश्य ने उन्हें रातोंरात पूरे भारत में प्रसिद्ध कर दिया। महाभारत के जरिए हिंदी फिल्म इंडस्ट्री ने उन्हें नोटिस किया।
वर्षा ने कहा कि हिंदी फिल्मों में आने की उनकी इच्छा थी और यह सपना महाभारत के माध्यम से पूरा हुआ। उनकी पहली हिंदी फिल्म 'दूध का कर्ज' थी, जो 1990 में रिलीज हुई जिसमें वह जैकी श्रॉफ के साथ थीं।
हालांकि, वर्षा का अभिनय करियर मराठी थिएटर से शुरू हुआ था। सचिन पिलगांवकर ने उन्हें एक नाटक में देखा और उन्हें 'गंमत जम्मत' में लॉन्च किया। यह फिल्म हीरोइन ओरिएंटेड थी और इसने मराठी सिनेमा में एक नई तरह की हीरोइन पेश की। इसके बाद उन्होंने मराठी में कई सफल फिल्में कीं और कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
मराठी और हिंदी फिल्मों में काम करने के अनुभव पर वर्षा ने कहा कि एक्टिंग में ज्यादा फर्क नहीं है, लेकिन ट्रीटमेंट अलग है। मराठी फिल्में आमतौर पर कॉमेडी और मजबूत कथानक वाली होती हैं, जहां हीरोइन को अच्छा स्पेस मिलता है। हिंदी फिल्मों में ग्लैमर पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है, जहां हीरोइन का अच्छा दिखना जरूरी होता है।
वर्षा ने 'तिरंगा', 'हनीमून', 'सोने की जंजीर', और 'घर आया मेरा परदेसी' जैसी फिल्मों में भी काम किया है। वह एक बेहतरीन गायिका भी हैं और मराठी, हिंदी और कोकणी में सक्रिय हैं।