7 अगस्त 2026
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नेशनल हैंडलूम डे पर विद्या बालन का बुनकरों को सलाम, बोलीं — 'हर साड़ी की कहानी मशीन नहीं दोहरा सकती'

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नेशनल हैंडलूम डे पर विद्या बालन का बुनकरों को सलाम, बोलीं — 'हर साड़ी की कहानी मशीन नहीं दोहरा सकती'

सारांश

नेशनल हैंडलूम डे पर विद्या बालन ने सिर्फ एक पोस्ट नहीं किया — उन्होंने उस पूरी विरासत को आवाज़ दी जो हर धागे में बुनी है। 'सिल्क मार्क' की अपील के साथ उन्होंने उपभोक्ताओं को असली और नकली हैंडलूम के बीच फर्क करना सिखाया।

मुख्य बातें

अभिनेत्री विद्या बालन ने 7 अगस्त 2026 को नेशनल हैंडलूम डे पर इंस्टाग्राम वीडियो साझा कर बुनकरों को सलाम किया।
विद्या ने कहा — 'हर हैंडलूम सिल्क साड़ी की कहानी कोई मशीन दोहरा नहीं सकती।' उन्होंने असली रेशम की पहचान के लिए 'सिल्क मार्क' देखने की अपील की।
नेशनल हैंडलूम डे की शुरुआत 2015 में भारत सरकार ने की थी; 7 अगस्त 1905 को स्वदेशी आंदोलन के सम्मान में यह तारीख चुनी गई।
हथकरघा उद्योग मशीन-निर्मित कपड़ों की प्रतिस्पर्धा और बुनकरों की घटती आमदनी जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है।

अभिनेत्री विद्या बालन ने 7 अगस्त 2026 को नेशनल हैंडलूम डे के अवसर पर इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने भारतीय हथकरघा परंपरा, हैंडलूम सिल्क साड़ियों की विरासत और उन्हें बुनने वाले कारीगरों की अथक मेहनत को सलाम किया। भारतीय पारंपरिक परिधानों की मुखर समर्थक रही विद्या ने इस मौके पर लोगों से स्थानीय बुनकरों का साथ देने और असली हैंडलूम सिल्क की पहचान के लिए 'सिल्क मार्क' देखने की अपील भी की।

विद्या बालन का संदेश

वीडियो के कैप्शन में विद्या ने लिखा, 'हर हैंडलूम सिल्क साड़ी अपनी एक ऐसी कहानी कहती है, जिसे कोई मशीन कभी दोहरा नहीं सकती। इस नेशनल हैंडलूम डे पर आइए उन अद्भुत कारीगरों का सम्मान करें, जिनके हाथों ने भारत की कालजयी बुनाई परंपराओं को जीवित रखा है। जब भी आप शुद्ध रेशम खरीदें, तो हमेशा 'सिल्क मार्क' जरूर देखें क्योंकि यही असली और शुद्ध रेशम की पहचान है।'

वीडियो में उन्होंने आगे कहा, 'मुझे हैंडलूम सिल्क साड़ियों की सबसे खूबसूरत बात यह लगती है कि इसका हर धागा, हर मोटिफ और हर छोटी-सी बारीकी कलाकारों की मेहनत और पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा को दर्शाती है। यही वजह है कि हर हैंडलूम सिल्क साड़ी अपने आप में अनोखी होती है।'

नेशनल हैंडलूम डे का महत्व

नेशनल हैंडलूम डे प्रतिवर्ष 7 अगस्त को मनाया जाता है। यह दिन भारत की समृद्ध हथकरघा परंपरा और बुनकर समुदाय के योगदान को सम्मान देने के लिए समर्पित है। गौरतलब है कि इस दिवस की शुरुआत भारत सरकार ने वर्ष 2015 में की थी।

7 अगस्त की तारीख का चुनाव ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है — इसी दिन वर्ष 1905 में स्वदेशी आंदोलन की नींव रखी गई थी, जिसने भारतीय उत्पादों और स्वदेशी उद्योगों को प्रोत्साहित करने का मार्ग दिखाया था। यह आंदोलन ब्रिटिश वस्तुओं के बहिष्कार और देशज शिल्प के पुनरुद्धार का प्रतीक बना था।

हथकरघा — एक जीवंत विरासत

भारत में हथकरघा महज कपड़ा बनाने की तकनीक नहीं, बल्कि यह देश की सांस्कृतिक पहचान और ऐतिहासिक विरासत का अभिन्न हिस्सा है। देश के विभिन्न क्षेत्रों में हजारों वर्षों से बुनकर अपनी कुशलता और रचनात्मकता से अनूठे वस्त्र तैयार करते आए हैं — चाहे वह बनारस की बनारसी सिल्क हो, कांचीपुरम की कांजीवरम साड़ी हो या ओडिशा की संबलपुरी बुनावट।

इस दिवस का मुख्य उद्देश्य हथकरघा क्षेत्र को प्रोत्साहन देना, बुनकर समुदाय की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करना और आम जनता को भारतीय हस्तनिर्मित वस्त्रों के महत्व के प्रति जागरूक करना है।

विद्या बालन और हैंडलूम का नाता

विद्या बालन लंबे समय से भारतीय साड़ियों और हथकरघा वस्त्रों की प्रबल समर्थक रही हैं। सार्वजनिक कार्यक्रमों और फिल्म प्रमोशन के दौरान वे अक्सर देशी बुनावट की साड़ियाँ पहनकर हथकरघा शिल्प को मंच देती आई हैं। इस बार 'सिल्क मार्क' का उल्लेख कर उन्होंने उपभोक्ताओं को नकली रेशम से सावधान करने का भी प्रयास किया।

यह पहल ऐसे समय में आई है जब हथकरघा उद्योग मशीन-निर्मित कपड़ों की बढ़ती प्रतिस्पर्धा और बुनकरों की घटती आमदनी जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे में जानी-मानी हस्तियों का समर्थन इस क्षेत्र को व्यापक जनसमर्थन दिलाने में सहायक माना जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या यह महज सांस्कृतिक प्रतीकवाद बनकर रह जाता है। हथकरघा क्षेत्र को आज जो चाहिए वह है — नीतिगत समर्थन, उचित मूल्य-श्रृंखला और डिजिटल बाज़ार तक बुनकरों की सीधी पहुँच।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेशनल हैंडलूम डे कब और क्यों मनाया जाता है?
नेशनल हैंडलूम डे हर साल 7 अगस्त को मनाया जाता है। यह तारीख वर्ष 1905 के स्वदेशी आंदोलन की याद में चुनी गई थी, और इस दिवस की शुरुआत भारत सरकार ने 2015 में की थी।
विद्या बालन ने नेशनल हैंडलूम डे पर क्या संदेश दिया?
विद्या बालन ने इंस्टाग्राम पर वीडियो साझा कर बुनकरों की मेहनत को सलाम किया और लोगों से असली हैंडलूम सिल्क खरीदते समय 'सिल्क मार्क' देखने की अपील की। उन्होंने कहा कि हर हैंडलूम साड़ी की कहानी कोई मशीन दोहरा नहीं सकती।
'सिल्क मार्क' क्या है और यह क्यों ज़रूरी है?
'सिल्क मार्क' भारत सरकार द्वारा प्रमाणित एक पहचान चिह्न है जो असली और शुद्ध रेशम उत्पादों पर लगाया जाता है। यह उपभोक्ताओं को नकली या मिलावटी रेशम से बचाने में मदद करता है।
भारत में हथकरघा उद्योग के सामने क्या चुनौतियाँ हैं?
भारतीय हथकरघा उद्योग मशीन-निर्मित कपड़ों की बढ़ती प्रतिस्पर्धा, बुनकरों की घटती आमदनी और बाज़ार तक सीमित पहुँच जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र को नीतिगत समर्थन और डिजिटल बाज़ार तक सीधी पहुँच की ज़रूरत है।
विद्या बालन हथकरघा की समर्थक क्यों मानी जाती हैं?
विद्या बालन लंबे समय से सार्वजनिक कार्यक्रमों और फिल्म प्रमोशन में भारतीय हैंडलूम साड़ियाँ पहनती आई हैं। वे नियमित रूप से देशी बुनावट और पारंपरिक परिधानों को मंच देकर हथकरघा शिल्प को प्रोत्साहित करती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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