विद्या बालन को 'परिणीता' मिलने की कहानी: जब हार मान चुकी थीं, तभी आया विधु विनोद चोपड़ा का वो फोन
सारांश
मुख्य बातें
बॉलीवुड अभिनेत्री विद्या बालन आज भले ही 'परिणीता', 'कहानी', 'द डर्टी पिक्चर' और 'भूलभुलैया' जैसी फिल्मों से करोड़ों दर्शकों की चहेती हों, लेकिन उनके करियर की शुरुआत बेहद कठिन रही। बार-बार के रिजेक्शन के बाद जब उन्होंने लगभग उम्मीद छोड़ दी थी, तभी एक फोन कॉल ने उनकी पूरी ज़िंदगी पलट दी। यह वह पल था जब निर्माता विधु विनोद चोपड़ा ने उन्हें बताया कि 'परिणीता' की मुख्य भूमिका उन्हीं की है।
बार-बार रिजेक्शन, फिर भी डटी रहीं
अभिनेत्री सिमी ग्रेवाल के चर्चित चैट शो 'रेन्जेव्यू विद सिमी ग्रेवाल' में विद्या बालन ने अपने करियर के शुरुआती संघर्ष को खुलकर साझा किया। उन्होंने बताया, 'उस समय मैं कई ऑडिशन दे चुकी थी और धीरे-धीरे मुझे लगने लगा था कि शायद यह फिल्म भी मेरे हाथ से निकल जाएगी। ऐसे में मैंने उम्मीद लगभग छोड़ दी थी।' यह बयान उस मानसिक थकान को उजागर करता है जो हर बार के इनकार के बाद किसी भी कलाकार को तोड़ सकती है।
कॉन्सर्ट में बंद था फोन, दोस्त के ज़रिए आई खबर
विद्या ने बताया कि जिस दिन उनकी किस्मत बदलने वाली थी, उस दिन वे मशहूर सिंगर एनरिक इग्लेसियस के कॉन्सर्ट में थीं और उन्होंने अपना मोबाइल फोन बंद कर रखा था। उनके साथ एक दोस्त था, जो निर्देशक प्रदीप सरकार के साथ भी काम करता था। उसी दोस्त के पास अचानक 'दादा' यानी प्रदीप सरकार का फोन आया।
विद्या ने कहा, 'दादा ने मेरे दोस्त से पूछा कि विद्या कहाँ है? क्या वह कॉन्सर्ट में है? उसने कहा कि हाँ, वह यहीं है। इसके बाद मैंने फोन लिया तो उन्होंने बताया कि मिस्टर चोपड़ा यानी विधु विनोद चोपड़ा आपसे बात करना चाहते हैं।'
वो शब्द जिसने ज़िंदगी बदल दी
विद्या ने स्वीकार किया कि उस वक्त उनके मन में यही आया कि शायद इस बार भी रिजेक्शन की खबर आने वाली है। लेकिन अगले ही पल विधु विनोद चोपड़ा ने जो कहा, उसने सब बदल दिया। उनके शब्द थे, 'विद्या बालन, तुम ही मेरी परिणीता हो। मैं तुम पर भरोसा करता हूँ और मुझे पूरा विश्वास है कि तुम हमेशा हमारे इस भरोसे का सम्मान करोगी।'
विद्या ने कहा, 'उस समय पूरा यकीन था कि मुझे यह बताने के लिए फोन किया गया है कि मैं फिल्म के लिए सेलेक्ट नहीं हो पाई हूँ। हालाँकि अगले ही पल जो शब्द मैंने सुने, उसने मेरी पूरी ज़िंदगी बदल दी।'
फिल्म 'परिणीता' की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि 'परिणीता' बांग्ला के मशहूर उपन्यासकार शरतचंद्र चट्टोपाध्याय के 1914 में प्रकाशित इसी नाम के उपन्यास पर आधारित थी। यह निर्देशक प्रदीप सरकार की पहली फीचर फिल्म भी थी, जिसका निर्माण विधु विनोद चोपड़ा ने किया था। फिल्म में संजय दत्त, सैफ अली खान और विद्या बालन मुख्य भूमिकाओं में थे, जबकि राइमा सेन, सब्यसाची चक्रवर्ती और दीया मिर्जा ने भी अहम किरदार निभाए।
10 जून 2005 को रिलीज हुई इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया और आलोचकों से भी खूब सराहना बटोरी। विद्या बालन के लिए यह फिल्म महज़ एक डेब्यू नहीं, बल्कि बॉलीवुड में उनकी पहचान की नींव बन गई।
संघर्ष से सफलता तक का सफर
विद्या बालन की यह कहानी उन तमाम कलाकारों के लिए प्रेरणा है जो बार-बार के रिजेक्शन के बाद हार मान लेते हैं। एक एनरिक इग्लेसियस कॉन्सर्ट में बंद पड़े फोन से शुरू हुई यह यात्रा आज बॉलीवुड की सबसे सम्मानित अभिनेत्रियों में उनकी गिनती कराती है। आने वाले समय में भी विद्या बालन की फिल्में दर्शकों को उनकी अदाकारी का नया रंग दिखाती रहेंगी।