विद्या बालन का खुलासा: 'हम पांच' को लेकर मां की थी अनोखी प्रतिक्रिया, एक्टिंग करियर पर थीं संशय में
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री विद्या बालन ने हाल ही में 'द अनुपम खेर शो : कुछ भी हो सकता है' में शामिल होकर अपने शुरुआती करियर से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा साझा किया — कि जब वह टीवी शो 'हम पांच' का हिस्सा बनीं, तो उनकी मां की प्रतिक्रिया कुछ अलग ही थी। विद्या ने बताया कि उनकी मां एक्टिंग करियर को लेकर शुरू से उत्साहित नहीं थीं, लेकिन 'हम पांच' को लेकर उनका नज़रिया बिल्कुल बदल गया था।
एकता कपूर का फोन और 'हम पांच' में एंट्री
विद्या ने बताया कि उन्हें एकता कपूर का फोन आया था, जिसमें उन्होंने पूछा कि क्या वह 'हम पांच' में काम करना चाहेंगी। उस वक्त यह शो पहले से ही एक साल से प्रसारित हो रहा था और काफी लोकप्रिय था। विद्या ने इस प्रस्ताव को स्वीकार किया और करीब डेढ़ साल तक शो का हिस्सा रहीं।
मां का रिएक्शन — संशय से खुशी तक
विद्या ने अपनी मां की भावनाओं को अपने शब्दों में बयान किया। उन्होंने कहा कि उनकी मां उनके पिता से कहती थीं कि वे उन्हें समझाएं। मां का कहना था, 'यह साउथ इंडियन लड़की, अगर मेरे पिता जिंदा होते, तो वे उसे कभी एक्ट्रेस नहीं बनने देते।' बावजूद इसके, 'हम पांच' उन्हें बेहद पसंद था। उन्हें लगता था कि यह एक पारिवारिक सीरियल है, इसलिए वह इस बात से खुश थीं कि विद्या को इस शो में काम करने का अवसर मिला।
कॉलेज और करियर के बीच मुश्किल चुनाव
विद्या ने यह भी बताया कि 'हम पांच' में काम करते हुए उन्हें कॉलेज में उपस्थिति की समस्या होने लगी, जिसके कारण उन्हें अंततः शो छोड़ना पड़ा। हालांकि, उस समय तक एक्टिंग का जुनून उन पर पूरी तरह हावी हो चुका था।
'हम पांच' के बारे में
यह लोकप्रिय टीवी शो 1995 से 1999 तक प्रसारित हुआ और बाद में 2005-2006 में इसका दूसरा सीज़न भी आया। शो की मुख्य कास्ट में अशोक सराफ, विद्या बालन, राखी टंडन, भैरवी रायचुरा और वंदना पाठक जैसे कलाकार शामिल थे। कहानी आनंद माथुर नामक एक पिता के इर्द-गिर्द बुनी गई थी, जो अपनी पाँच बेटियों — मीनाक्षी, राधिका, स्वीटी, काजल और छोटी — की वजह से हमेशा किसी न किसी उलझन में फंसे रहते थे।
विद्या बालन का सफर
'हम पांच' से शुरू हुआ विद्या का सफर बाद में हिंदी सिनेमा की सबसे सशक्त अभिनेत्रियों में से एक के रूप में स्थापित हुआ। उनकी यह यादें दर्शाती हैं कि एक्टिंग के प्रति उनका जुनून पारिवारिक संशय के बावजूद कभी कम नहीं हुआ।