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विजू शाह: क्लास बंक कर स्टूडियो पहुंचे, बॉलीवुड के 'सिंथेसाइजर किंग' बने

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विजू शाह: क्लास बंक कर स्टूडियो पहुंचे, बॉलीवुड के 'सिंथेसाइजर किंग' बने

सारांश

क्लास बंक कर स्टूडियो पहुंचा वह लड़का आगे चलकर बॉलीवुड का 'सिंथेसाइजर किंग' बना। 'डॉन' की सिग्नेचर ट्यून से 'मोहरा' की 80 लाख बिकी एल्बम तक — विजू शाह की कहानी भारतीय सिनेमा में इलेक्ट्रॉनिक संगीत की क्रांति की कहानी है।

मुख्य बातें

विजू शाह का जन्म 5 जून 1959 को बॉम्बे में हुआ; पिता कल्याणजी वीरजी शाह प्रसिद्ध संगीतकार थे।
स्कूल में क्लास बंक कर स्टूडियो पहुंचे और फिल्म 'डॉन' (1978) की सिग्नेचर ट्यून बजाई।
1988 में सोलो एल्बम 'वाय नॉट सिंथेसाइजर' रिलीज; 'मोहरा' (1994) एल्बम की 80 लाख से अधिक प्रतियाँ बिकीं।
'गुप्त' (1997) के लिए 1998 में सर्वश्रेष्ठ बैकग्राउंड स्कोर का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला।
2025 में राजीव राय के साथ फिल्म 'जोरा' से दो दशक बाद वापसी, सीधे यूट्यूब पर रिलीज।

बॉलीवुड के संगीत इतिहास में कुछ नाम ऐसे हैं जो परदे के पीछे रहकर भी पूरी एक पीढ़ी के कानों में बस जाते हैं। विजू शाह — यानी विजय कल्याणजी शाह — ऐसे ही एक संगीतकार हैं, जिन्होंने सिंथेसाइजर को भारतीय सिनेमा की मुख्यधारा में स्थापित किया। 5 जून 1959 को बॉम्बे में जन्मे विजू शाह की संगीत-यात्रा एक स्कूली बच्चे की उस दुस्साहसी हरकत से शुरू हुई, जब वे चुपके से क्लास बंक कर एक रिकॉर्डिंग स्टूडियो जा पहुंचे और वहाँ सिंथेसाइजर पर वह धुन बजाई जो आगे चलकर फिल्म 'डॉन' (1978) की सबसे पहचानी जाने वाली सिग्नेचर ट्यून बनी।

विरासत में मिला संगीत का जुनून

विजू शाह का परिवार मूल रूप से गुजरात के कच्छ से था, जो मुंबई आकर गिरगांव में बस गया। परिवार का किराना स्टोर था, लेकिन संगीत की नींव घर में ही पड़ी थी। उनके पिता कल्याणजी वीरजी शाह और चाचा आनंदजी वीरजी शाह ने संगीत की प्रारंभिक शिक्षा एक ऐसे शिक्षक से ली, जो दुकान से उधार राशन लेने के बदले उन्हें संगीत सिखाता था — यह किस्सा खुद इस परिवार की जिजीविषा का प्रमाण है।

पिता कल्याणजी वीरजी शाह को फिल्म 'नागिन' (1954) में 'बीन' की धुन के लिए क्लेवियोलिन — एक प्रारंभिक इलेक्ट्रॉनिक कीबोर्ड — बजाने के कारण देशव्यापी पहचान मिली। मराठी और गुजराती संस्कृति के बीच पले-बढ़े विजू शाह ने महज 4-5 साल की उम्र में हारमोनियम सीख लिया था। लेकिन उनकी असली दीवानगी तब जगी जब 1970 के दशक में सिंथेसाइजर ने भारत में दस्तक दी।

सिंथेसाइजर से बदला बॉलीवुड का साउंड

निर्देशक फिरोज खान की फिल्मों 'कुर्बानी' (1980) और 'जांबाज' (1986) के इलेक्ट्रॉनिक संगीत को निखारने के बाद विजू शाह ने 1988 में अपना साहसिक सोलो एल्बम 'वाय नॉट सिंथेसाइजर' रिलीज किया — एक ऐसे दौर में जब भारतीय संगीत उद्योग अभी इस वाद्य को पूरी तरह अपनाने में झिझक रहा था।

यह ऐसे समय में आया जब निर्देशक राजीव राय के साथ उनकी जोड़ी परवान चढ़ रही थी। 'त्रिदेव' (1989) का 'ओये ओये' ब्लॉकबस्टर बना, और 'विश्वात्मा' (1992) का 'सात समुंदर पार' ने हिंदी सिनेमा को एक नया श्रव्य अनुभव दिया।

मोहरा और गुप्त: करियर का शिखर

विजू शाह के करियर का सबसे चमकदार अध्याय 'मोहरा' (1994) के साथ लिखा गया। 'तू चीज बड़ी है मस्त मस्त' और 'टिप टिप बरसा पानी' ने सफलता के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए — इस एल्बम की 80 लाख से अधिक प्रतियाँ बिकीं। गौरतलब है कि यह उस दौर की सबसे अधिक बिकने वाली फिल्म संगीत एल्बमों में से एक थी।

इसके बाद 'गुप्त' (1997) में उन्होंने पहली बार भारतीय सिनेमा में डार्क ट्रान्स और गैराज संगीत का परिचय कराया। इस फिल्म के बैकग्राउंड स्कोर ने उन्हें 1998 में सर्वश्रेष्ठ बैकग्राउंड स्कोर का फिल्मफेयर पुरस्कार दिलाया।

वापसी और नई पारी

मुख्यधारा से कुछ वर्षों की दूरी के बाद, 2020 में नेटफ्लिक्स की फिल्म 'क्लास ऑफ 83' के साथ विजू शाह ने प्रामाणिक 1980 के दशक के सिंथ स्कोर के साथ वापसी की। फिर लगभग दो दशकों के अंतराल के बाद, राजीव राय और विजू शाह की जोड़ी ने 2025 में सस्पेंस-थ्रिलर फिल्म 'जोरा' के साथ पुनः साथ काम किया, जिसे सीधे यूट्यूब पर रिलीज किया गया। यह वापसी इस बात का संकेत है कि विजू शाह का सिंथ-साउंड आज भी प्रासंगिक है — चाहे मंच कोई भी हो।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन जिसने उसकी पहचान बदल दी। गौरतलब है कि जब विजू शाह सिंथेसाइजर को मुख्यधारा में ला रहे थे, तब शास्त्रीय संगीत की पृष्ठभूमि वाले कई संगीतकार इसे 'असली संगीत' नहीं मानते थे। 'गुप्त' में डार्क ट्रान्स का प्रयोग आज भी उतना ही अग्रगामी लगता है — यह दर्शाता है कि उनकी दृष्टि अपने समय से आगे थी। 2025 में यूट्यूब पर 'जोरा' की रिलीज यह भी रेखांकित करती है कि नई पीढ़ी के दर्शकों तक पहुंचने के लिए वे परंपरागत वितरण के मोह से मुक्त हैं।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विजू शाह कौन हैं और वे क्यों प्रसिद्ध हैं?
विजू शाह — पूरा नाम विजय कल्याणजी शाह — बॉलीवुड के प्रमुख संगीतकार हैं जिन्हें 'सिंथेसाइजर किंग' कहा जाता है। 'मोहरा' (1994) और 'गुप्त' (1997) जैसी फिल्मों के संगीत ने उन्हें 1990 के दशक का सबसे प्रयोगशील संगीतकार बनाया।
विजू शाह ने 'डॉन' (1978) की सिग्नेचर ट्यून कैसे बजाई?
बचपन में विजू शाह स्कूल की क्लास बंक कर बॉम्बे के एक रिकॉर्डिंग स्टूडियो पहुंचे और वहाँ सिंथेसाइजर पर वह धुन बजाई जो 'ये मेरा दिल यार का दीवाना' गाने में बैकग्राउंड में सुनाई देती है और 'डॉन' की पहचान बनी।
'मोहरा' के संगीत ने कितनी सफलता पाई?
'मोहरा' (1994) का संगीत एल्बम 80 लाख से अधिक प्रतियाँ बिकने के साथ उस दौर की सबसे सफल फिल्म संगीत एल्बमों में से एक रही। 'तू चीज बड़ी है मस्त मस्त' और 'टिप टिप बरसा पानी' इसके सबसे लोकप्रिय गाने रहे।
विजू शाह को फिल्मफेयर पुरस्कार किस फिल्म के लिए मिला?
विजू शाह को 1998 में फिल्म 'गुप्त' (1997) के बैकग्राउंड स्कोर के लिए सर्वश्रेष्ठ बैकग्राउंड स्कोर का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला। इस फिल्म में उन्होंने पहली बार भारतीय सिनेमा में डार्क ट्रान्स और गैराज संगीत का प्रयोग किया था।
विजू शाह ने 2025 में कौन-सी फिल्म में वापसी की?
विजू शाह ने 2025 में निर्देशक राजीव राय के साथ सस्पेंस-थ्रिलर फिल्म 'जोरा' में संगीत दिया, जिसे सीधे यूट्यूब पर रिलीज किया गया। यह दोनों की लगभग दो दशकों के अंतराल के बाद की वापसी थी।
राष्ट्र प्रेस
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