40 साल की उम्र के बाद नियमित आई टेस्ट क्यों है ज़रूरी? NHM की सलाह और आंखों की देखभाल के आसान उपाय
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली — नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के अनुसार, 40 साल की उम्र के बाद आंखों की नियमित जांच (आई टेस्ट) दृष्टि को सुरक्षित रखने का सबसे आसान और प्रभावी तरीका है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि गैजेट्स पर बढ़ती निर्भरता और सेहत के प्रति लापरवाही के कारण आंखों की समस्याएं इस उम्र के बाद और गंभीर हो जाती हैं, इसलिए समय पर नेत्र परीक्षण कराना हर व्यक्ति की प्राथमिकता होनी चाहिए।
40 के बाद आंखों में क्या बदलाव आते हैं
40 साल की उम्र पार करते ही आंखों में कई स्वाभाविक बदलाव शुरू हो जाते हैं। नज़दीक की चीज़ें धुंधली दिखना, रात में कम दिखना, ग्लूकोमा और डायबिटिक रेटिनोपैथी जैसी बीमारियाँ इस उम्र में आम हो जाती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ये बीमारियाँ शुरुआत में बिना किसी बड़े लक्षण के धीरे-धीरे बढ़ती हैं, जिससे व्यक्ति अक्सर इन्हें नज़रअंदाज़ कर देता है। NHM ने स्पष्ट रूप से आगाह किया है कि नज़र कमज़ोर होना या धुंधला दिखना सामान्य मानकर अनदेखा न करें।
कितनी बार कराएं नेत्र परीक्षण
विशेषज्ञों की सलाह है कि 40 साल के बाद हर व्यक्ति को कम से कम साल में एक बार पूर्ण नेत्र परीक्षण अवश्य कराना चाहिए। वहीं, जिन लोगों को डायबिटीज, हाई ब्लडप्रेशर या परिवार में आंखों की बीमारी का इतिहास हो, उन्हें हर छह महीने में एक बार जांच कराना ज़रूरी बताया गया है। NHM का स्पष्ट संदेश है —