बकासन (क्राउ पोज़) सही तरीके से कैसे करें? मोरारजी देसाई योग संस्थान ने बताए सटीक चरण
सारांश
मुख्य बातें
बकासन — जिसे अंग्रेजी में क्राउ पोज़ कहते हैं — योग के उन आसनों में से एक है जो शुरुआती अभ्यासियों को चुनौतीपूर्ण लग सकता है, लेकिन सही तकनीक और धैर्य के साथ इसमें महारत हासिल की जा सकती है। नई दिल्ली स्थित मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किए गए पोस्ट में बकासन के सटीक चरण और सावधानियाँ विस्तार से बताई हैं। इस आसन में शरीर का सारा भार हाथों पर संतुलित करना होता है, इसलिए सांस, दृष्टि और मांसपेशियों की सक्रियता — तीनों पर एक साथ ध्यान देना ज़रूरी है।
बकासन की सही शुरुआत: आधार तैयार करें
संस्थान के अनुसार, बकासन की शुरुआत योग मैट पर सीधे खड़े होकर या स्क्वाट की स्थिति में आने से होती है। इसके बाद दोनों हथेलियों को कंधों की चौड़ाई के बराबर अंतर पर जमीन पर मजबूती से टिकाएं। उँगलियों को पूरी तरह फैलाना अनिवार्य है, क्योंकि इससे हथेलियों का आधार चौड़ा बनता है और शरीर का संतुलन साधना आसान हो जाता है।
भार स्थानांतरण: पैरों से हाथों की ओर
अगले चरण में धीरे-धीरे घुटनों को ऊपरी बाजुओं के पास टिकाएं। फिर कूल्हों को ऊपर उठाते हुए शरीर का पूरा भार हाथों पर स्थानांतरित करें। इस दौरान यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि टेलबोन अंदर की ओर रहे और शरीर अत्यधिक आगे या पीछे न झुके — दोनों स्थितियाँ संतुलन बिगाड़ती हैं।
जब हाथों पर पर्याप्त स्थिरता महसूस हो, तो पहले एक-एक पैर उठाकर अभ्यास करें। धीरे-धीरे जब संतुलन दृढ़ हो जाए, तब दोनों पैरों को एक साथ जमीन से ऊपर उठाएं। भुजाओं को जितना संभव हो सीधा और कंधों को स्थिर रखें।
दृष्टि और पकड़: दो सबसे ज़रूरी तत्त्व
बकासन में दृष्टि सामने की ओर रखना अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। नीचे देखते ही शरीर का गुरुत्व केंद्र बदलता है और संतुलन टूट सकता है। साथ ही पंजों को तानकर पैरों को सक्रिय रखें — ढीले पैर आसन की स्थिरता को कमजोर करते हैं। उँगलियों और हथेलियों से ज़मीन पर मजबूत पकड़ बनाए रखें।
सांस और समय: क्रमिक प्रगति का सिद्धांत
संस्थान के अनुसार, आसन के दौरान सांस रोकना नहीं चाहिए — बल्कि सामान्य और नियंत्रित श्वास लेते रहना चाहिए। शुरुआत में कुछ सेकंड तक संतुलन बना लेना ही पर्याप्त उपलब्धि है। नियमित अभ्यास के साथ इस अवधि को क्रमशः बढ़ाया जा सकता है।
बकासन के लाभ: शरीर और मन पर असर
यह आसन कलाई, हाथ, कंधे और बाजुओं की मांसपेशियों को सक्रिय और मजबूत बनाता है। इसके साथ ही पेट और कोर की मांसपेशियाँ भी इस दौरान संलग्न रहती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, बकासन के नियमित अभ्यास से शरीर पर नियंत्रण, एकाग्रता और आत्मविश्वास में उल्लेखनीय सुधार हो सकता है। यह आसन उन योगाभ्यासियों के लिए एक महत्त्वपूर्ण पड़ाव है जो भुजा-संतुलन आधारित आसनों की ओर आगे बढ़ना चाहते हैं।