क्या भटकटैया है जंगल का रहस्यमयी पौधा, जिसके फूल, तने और बीज, सब में छिपे हैं औषधीय गुण?
सारांश
Key Takeaways
- भटकटैया के हर भाग में औषधीय गुण होते हैं।
- यह पेट और पाचन समस्याओं में सहायक है।
- सर्दियों में खांसी में उपयोगी है।
- इसका सेवन करते समय सावधानी बरतें।
- आयुर्वेद में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
नई दिल्ली, 20 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। जंगलों में कई ऐसे पौधे होते हैं जो दिखने में साधारण प्रतीत होते हैं, लेकिन उनके अंदर अद्भुत औषधीय खजाना छिपा होता है। ऐसा ही एक पौधा है भटकटैया, जिसे लोग कटेरी या कंटकारी के नाम से भी जानते हैं। यह केवल दिखने में ही खतरनाक लगता है, लेकिन वास्तव में यह आपके शरीर और मानसिक स्वास्थ्य के लिए एक वरदान साबित हो सकता है।
भटकटैया के हर भाग—फूल, तना, पत्ते और बीज—में औषधीय गुण विद्यमान हैं। इसके बैंगनी और सफेद रंग के फूल और कांटेदार हरे पत्ते इसे एक विशेष पहचान देते हैं। इसकी जड़ भी कम उपयोगी नहीं है। आयुर्वेद में इसे पेट की समस्याओं, सूजन और पाचन संबंधी मुद्दों के उपचार में उपयोग किया जाता है।
इस पौधे की तीन प्रमुख प्रजातियाँ हैं: छोटी कटेरी, बड़ी कटेरी और श्वेत कंटकारी। माइग्रेन, सिरदर्द, अस्थमा और गठिया जैसी समस्याओं के उपचार में इसका उपयोग बेहद लाभदायक माना जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इसके बीज में मौजूद सिलिबिनिन तत्व ब्रेन ट्यूमर और पिट्यूटरी ग्रंथि में होने वाली कुशिंग बीमारी से राहत दिला सकता है।
भटकटैया के फल हरे होते हैं और पकने पर पीले रंग के हो जाते हैं। इसके छोटे और चिकने बीज औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं। इसके कड़वे तने और फूल पैरों में जलन और सूजन को कम करने में सहायक होते हैं। सर्दियों में खांसी या गले की खराश में भटकटैया की जड़ और गुडुची का काढ़ा पीना अत्यंत लाभकारी है। यह आर्थराइटिस और जोड़ों के दर्द में भी राहत प्रदान करता है।
हालांकि, प्राकृतिक औषधि होने के बावजूद, इसके गलत या अधिक सेवन से स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए, किसी भी समस्या के समाधान के लिए इसका सेवन करने से पहले योग्य आयुर्वेदाचार्य से परामर्श लेना आवश्यक है, खासकर बच्चों, गर्भवती महिलाओं, और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए।