चिकनगुनिया के संकेत: तेज बुखार और जोड़ों में दर्द से बचें, अपनाएं ये सावधानियाँ
सारांश
Key Takeaways
- चिकनगुनिया
- मच्छरों से बचाव के लिए उचित सावधानी बरतें।
- समय पर चिकित्सीय सलाह लें।
- हल्का और पौष्टिक आहार लें।
- आराम और नींद का ध्यान रखें।
नई दिल्ली, 2 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। चिकनगुनिया एक ऐसी बीमारी है जो मच्छरों के काटने से फैलती है। यदि आपको अचानक तेज बुखार, जोड़ों में दर्द, शरीर में कमजोरी, सिरदर्द, मतली और कभी-कभी चकत्तेदार दाने दिखें, तो इसे हल्के में न लें, क्योंकि ये चिकनगुनिया के प्रारंभिक संकेत हो सकते हैं।
इस बीमारी के लक्षण आमतौर पर मच्छर के काटने के 3-7 दिन बाद प्रकट होते हैं। शुरुआत में तेज बुखार, शरीर में दर्द और थकान होती है। इसके अलावा, कुछ मरीजों को मुंह में स्वाद की कमी, उल्टी, जी मिचलाना और हल्के चकत्तेदार दाने भी दिखाई दे सकते हैं। चिकनगुनिया का एक विशेष लक्षण यह है कि इसमें जोड़ों में दोनों तरफ दर्द होता है और कभी-कभी यह दर्द महीनों तक बना रह सकता है। इसलिए इसे नजरअंदाज करना उचित नहीं है।
जो लोग नवजात शिशु, बुजुर्ग (65 साल से ऊपर) हैं या जिनमें हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या हृदय रोग जैसी स्वास्थ्य समस्याएं हैं, उनमें इसका खतरा अधिक होता है। यदि आप इनमें से किसी श्रेणी में आते हैं या लक्षण गंभीर हैं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। गंभीर लक्षणों में लगातार उल्टी, दस्त, कमजोरी, चक्कर आना या खून की समस्या शामिल हो सकती है।
चिकनगुनिया से बचने का सबसे सरल तरीका मच्छरों से सुरक्षा करना है। घर में पानी जमा न होने दें, सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें, लंबी आस्तीन और पैंट पहनें और मच्छर भगाने वाली क्रीम या तेल का उपयोग करें। नीम, लेमन ग्रास और दालचीनी के तेल से भी मच्छरों को दूर रखा जा सकता है।
खानपान का ध्यान रखना भी बेहद आवश्यक है। हल्का, पोषणयुक्त, गर्म और आसानी से पचने वाला खाना खाएं। ठंडी चीजों और अधिक तैलीय खाने से बचें। पर्याप्त आराम और नींद लेना भी महत्वपूर्ण है। हर्बल उपायों में गुदूची, तुलसी और धनिया का सेवन फायदेमंद होता है।
आराम के साथ कुछ आयुर्वेदिक दवाओं का सेवन किया जा सकता है। अमृतारिष्ट, संजीवनी वटी, योगराज गुग्गुलु और पपीते के पत्तों का रस शरीर को जल्दी ठीक करने में सहायक होते हैं। जोड़ों के दर्द और थकान के लिए हल्की एक्सरसाइज और मसाज भी लाभकारी होती हैं।
अधिकतर मरीज 1 हफ्ते के भीतर ठीक हो जाते हैं, लेकिन जोड़ों का दर्द कभी-कभी महीनों तक बना रह सकता है। इसलिए पूर्णत: स्वस्थ होने तक शरीर को जल्दी थकाने वाले कामों से बचें।