23 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

नौका संचालनासन: कोर स्ट्रेंथ और पाचन तंत्र मजबूत करने वाला योगाभ्यास, जानें सही विधि

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
नौका संचालनासन: कोर स्ट्रेंथ और पाचन तंत्र मजबूत करने वाला योगाभ्यास, जानें सही विधि

सारांश

आधुनिक सेडेंटरी जीवनशैली में कोर मसल्स और पाचन तंत्र सबसे पहले कमज़ोर पड़ते हैं। नौका संचालनासन — नाव चलाने की क्रिया पर आधारित यह योगाभ्यास — आयुष मंत्रालय के अनुसार पेट, कमर, पेल्विस और तंत्रिका तंत्र को एक साथ सक्रिय करता है। रोज़ 8-10 चक्र, और बदलाव महसूस होने लगता है।

मुख्य बातें

नौका संचालनासन संस्कृत शब्दों 'नौका', 'संचालन' और 'आसन' से बना है — यह नाव खेने की क्रिया पर आधारित योगाभ्यास है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार यह आसन पेट , कमर , पेल्विस , पीठ , कंधे और कूल्हों को एक साथ सक्रिय करता है।
प्रत्येक दिशा में 8 से 10 चक्र — पहले सीधी दिशा में, फिर विपरीत दिशा में — करने की सलाह दी जाती है।
नियमित अभ्यास से ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है, टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं और अनिद्रा में राहत मिलती है।
गर्भवती महिलाओं (दूसरी-तीसरी तिमाही), स्लिप डिस्क पीड़ितों और पेट/कूल्हे की सर्जरी करा चुके लोगों को यह आसन नहीं करना चाहिए।

नौका संचालनासन एक गतिशीलता-आधारित योगाभ्यास है जो कोर स्ट्रेंथ बढ़ाने, पाचन तंत्र को सुदृढ़ करने और पूरे शरीर में ऊर्जा का संचार करने में अत्यंत प्रभावकारी माना जाता है। आधुनिक जीवनशैली में घटती शारीरिक सक्रियता और घंटों एक ही स्थान पर बैठकर काम करने की आदत ने कोर मसल्स और पाचन क्रिया को सबसे अधिक प्रभावित किया है — ऐसे में यह आसन विशेषज्ञों द्वारा विशेष रूप से अनुशंसित है।

नौका संचालनासन का अर्थ और महत्व

नौका संचालनासन संस्कृत के तीन शब्दों से बना है — 'नौका' (नाव), 'संचालन' (चलाना/संचालित करना) और 'आसन' (मुद्रा)। यह आसन नाव खेने की क्रिया की नकल करता है, जिसमें शरीर की मांसपेशियाँ एक समन्वित गोलाकार गति में काम करती हैं। आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह एक बेहतरीन सूक्ष्म व्यायाम है जो पूरे शरीर को खींचता, मजबूत बनाता और लचीला करता है।

यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक हो जाता है जब शहरी भारत में सेडेंटरी लाइफस्टाइल तेज़ी से बढ़ रही है और पाचन संबंधी शिकायतें आम हो चुकी हैं।

अभ्यास की सही विधि

इस आसन को करने के लिए सबसे पहले मैट पर दंडासन की मुद्रा में बैठें — दोनों पैर सामने की ओर सीधे फैलाएँ और रीढ़ सीधी रखें। अब दोनों हाथों की मुट्ठी इस प्रकार बंद करें जैसे आप नाव का चप्पू पकड़ रहे हों।

बाहों को सीधा रखते हुए शरीर को जितना संभव हो पीछे की ओर ले जाएँ और नाभि पर खिंचाव महसूस करें। इसके बाद कमर से आगे की ओर झुकते हुए हाथों को गोलाकार घुमाते हुए पैरों की उँगलियों की दिशा में ले जाएँ — ठीक वैसे जैसे नाव चलाते समय चप्पू चलाया जाता है। इस पूरी गोलाकार प्रक्रिया को 8 से 10 बार दोहराएँ। तत्पश्चात इसी क्रिया को विपरीत दिशा में भी 8 से 10 बार करें।

शरीर पर लाभकारी प्रभाव

आयुष मंत्रालय के अनुसार, इस अभ्यास से पेट, कमर, पेल्विस, पीठ का निचला हिस्सा, पैर, छाती, कंधे और कूल्हे सक्रिय होते हैं। नियमित अभ्यास से शरीर का संतुलन बेहतर होता है, ताकत बढ़ती है और आत्मविश्वास में भी सुधार आता है। इसके अलावा जोड़ों की रेंज ऑफ मोशन में भी उल्लेखनीय सुधार देखा जाता है।

नियमित अभ्यास से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है और शरीर में जमा टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं। जो लोग अनिद्रा जैसी समस्या से जूझ रहे हैं, उनके लिए यह आसन विशेष रूप से लाभकारी बताया जाता है — इसके अभ्यास से एकाग्रता बढ़ती है और तंत्रिका तंत्र शांत रहता है।

किन्हें सावधानी बरतनी चाहिए

विशेषज्ञों के अनुसार, निम्नलिखित स्थितियों में इस आसन से बचना चाहिए:

गर्भवती महिलाएँ — विशेषकर दूसरी और तीसरी तिमाही में; स्लिप डिस्क या रीढ़ की गंभीर समस्याओं से पीड़ित व्यक्ति; तथा पेट या कूल्हे की सर्जरी करा चुके लोग। किसी भी स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में योग्य योग प्रशिक्षक या चिकित्सक की सलाह लेकर ही अभ्यास शुरू करें।

नियमित अभ्यास का महत्व

नौका संचालनासन को दैनिक दिनचर्या में शामिल करने से दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं। यह आसन न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव डालता है। विशेषज्ञ इसे सुबह खाली पेट करने की सलाह देते हैं ताकि पाचन तंत्र को अधिकतम लाभ मिल सके। निरंतर अभ्यास से शरीर की समग्र कार्यक्षमता में सुधार आता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पाचन विकार, पीठ दर्द — तेज़ी से बढ़ रही हैं। आयुष मंत्रालय का इस आसन को 'सूक्ष्म व्यायाम' के रूप में मान्यता देना महत्वपूर्ण है, लेकिन यह भी ध्यान देना ज़रूरी है कि दावे अभी भी बड़े पैमाने पर क्लिनिकल परीक्षणों पर नहीं, बल्कि पारंपरिक ज्ञान पर आधारित हैं। मुख्यधारा की स्वास्थ्य कवरेज अक्सर योग के लाभों को बिना सावधानियों के प्रस्तुत करती है — जबकि गर्भवती महिलाओं और सर्जरी के बाद के मरीज़ों के लिए स्पष्ट मतभेद उतने ही ज़रूरी हैं।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नौका संचालनासन क्या है और इसे क्यों करना चाहिए?
नौका संचालनासन एक गतिशीलता-आधारित योगाभ्यास है जो नाव खेने की क्रिया की नकल करता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह पेट की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है, पाचन तंत्र को सक्रिय करता है और पूरे शरीर में ऊर्जा का संचार करता है।
नौका संचालनासन करने की सही विधि क्या है?
दंडासन में बैठकर मुट्ठी बंद करें जैसे चप्पू पकड़ रहे हों। शरीर को पीछे ले जाएँ, फिर आगे झुकते हुए हाथों को गोलाकार घुमाएँ। यह प्रक्रिया सीधी दिशा में 8 से 10 बार और फिर विपरीत दिशा में 8 से 10 बार दोहराएँ।
नौका संचालनासन से शरीर को क्या-क्या फायदे होते हैं?
इस आसन से पेट, कमर, पेल्विस, पीठ, कंधे और कूल्हे सक्रिय होते हैं। ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है, शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं, एकाग्रता बढ़ती है और अनिद्रा में राहत मिलती है।
किन लोगों को नौका संचालनासन नहीं करना चाहिए?
गर्भवती महिलाएँ (विशेषकर दूसरी और तीसरी तिमाही में), स्लिप डिस्क या रीढ़ की गंभीर समस्याओं से पीड़ित लोग, और पेट या कूल्हे की सर्जरी करा चुके व्यक्तियों को यह आसन नहीं करना चाहिए।
नौका संचालनासन को दिनचर्या में कब और कैसे शामिल करें?
विशेषज्ञ इसे सुबह खाली पेट करने की सलाह देते हैं ताकि पाचन तंत्र को अधिकतम लाभ मिले। किसी भी स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में योग्य योग प्रशिक्षक या चिकित्सक की सलाह लेकर ही अभ्यास शुरू करें।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 महीने पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 7 महीने पहले