5 अगस्त 2026
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जम्मू-कश्मीर सेहत स्कीम संकट: सरकार ने ₹175 करोड़ जारी किए, निजी अस्पतालों ने वापस ली हटने की चेतावनी

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जम्मू-कश्मीर सेहत स्कीम संकट: सरकार ने ₹175 करोड़ जारी किए, निजी अस्पतालों ने वापस ली हटने की चेतावनी

सारांश

₹250 करोड़ से अधिक के बकाए और 1 जुलाई की डी-एम्पैनलमेंट की चेतावनी के बीच जम्मू-कश्मीर सरकार ने ₹175 करोड़ की मंजूरी देकर सेहत योजना को फिलहाल बचा लिया। देश के एकमात्र सार्वभौमिक आयुष्मान कवरेज वाले केंद्र शासित प्रदेश में यह संकट रीइम्बर्समेंट तंत्र की गहरी खामियों को उजागर करता है।

मुख्य बातें

जम्मू-कश्मीर सरकार ने 19 जून 2026 को आयुष्मान भारत पीएम-जेएवाई सेहत योजना के तहत निजी अस्पतालों के बकाया चुकाने के लिए ₹175 करोड़ मंजूर किए।
जम्मू-कश्मीर प्राइवेट हॉस्पिटल्स एंड डायलिसिस सेंटर्स एसोसिएशन ने 1 जुलाई से योजना छोड़ने की चेतावनी अस्थायी रूप से वापस ली।
एसोसिएशन के अनुसार कुल बकाया राशि ₹250 करोड़ से अधिक थी; विशेष रूप से पिछले तीन महीनों के भुगतान लंबित थे।
फंड स्टेट हेल्थ एजेंसी (SHA) के माध्यम से जारी होगा; वितरण में कुछ दिन लगने की संभावना।
जम्मू-कश्मीर देश का एकमात्र केंद्र शासित प्रदेश है जहाँ आय सीमा के बिना हर परिवार को सेहत योजना का लाभ मिलता है।

जम्मू-कश्मीर सरकार ने 19 जून 2026 को आयुष्मान भारत पीएम-जेएवाई सेहत योजना को बचाने के लिए ₹175 करोड़ के पैकेज को मंजूरी दी, जिसके बाद केंद्र शासित प्रदेश के निजी अस्पतालों और डायलिसिस सेंटरों ने 1 जुलाई से योजना छोड़ने का अपना प्रस्तावित फैसला अस्थायी रूप से वापस ले लिया। यह राशि लंबे समय से लंबित रीइम्बर्समेंट दावों के निपटारे के लिए स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा अनुमोदित की गई है।

संकट की पृष्ठभूमि

जम्मू-कश्मीर प्राइवेट हॉस्पिटल्स एंड डायलिसिस सेंटर्स एसोसिएशन ने दावों के निपटारे में लगातार हो रही देरी का हवाला देते हुए 1 जुलाई से सेहत योजना से बाहर निकलने की चेतावनी दी थी। एसोसिएशन के अनुसार, बकाया राशि ₹250 करोड़ से अधिक हो गई थी, जिससे अस्पतालों और डायलिसिस सेंटरों के सामने गंभीर वित्तीय संकट खड़ा हो गया था। अस्पताल प्रशासन ने स्पष्ट किया कि विशेष रूप से पिछले तीन महीनों के बकाया भुगतान के बिना सेवाएं जारी रखना संभव नहीं था।

सरकार का हस्तक्षेप और आश्वासन

स्टेट हेल्थ एजेंसी (SHA) के वरिष्ठ अधिकारियों और निजी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रतिनिधियों के बीच हुई बातचीत में सरकार ने मंजूर की गई ₹175 करोड़ की राशि बिना किसी और विलंब के जारी करने का भरोसा दिलाया। अधिकारियों ने बताया कि यह धनराशि स्टेट हेल्थ एजेंसी के माध्यम से वितरित की जाएगी, हालांकि फंड के ट्रांसफर और वितरण में कुछ दिन लग सकते हैं।

जम्मू-कश्मीर की विशेष स्थिति

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर देश का एकमात्र केंद्र शासित प्रदेश है जहाँ आय सीमा की परवाह किए बिना प्रत्येक परिवार को आयुष्मान भारत-पीएम-जेएवाई सेहत योजना का लाभ मिलता है। यह सार्वभौमिक कवरेज मॉडल लाखों निवासियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान करता है, जिसे बाधित होने से क्षेत्र के स्वास्थ्य ढाँचे पर गंभीर असर पड़ सकता था।

अस्पतालों की प्रतिक्रिया

सरकारी आश्वासन के बाद एसोसिएशन ने अपना प्रस्तावित डी-एम्पैनलमेंट टालते हुए फिलहाल योजना के तहत स्वास्थ्य सेवाएं जारी रखने पर सहमति जताई। स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों ने इस कदम का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि इस वित्तीय सहायता से पैनल में शामिल अस्पतालों का भरोसा बहाल होगा और मरीजों की देखभाल निर्बाध रूप से जारी रहेगी।

आगे की राह

रीइम्बर्समेंट की प्रक्रिया SHA के माध्यम से फंड जारी होने के बाद शुरू होने की उम्मीद है। यह कदम सेहत पहल की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए एक अहम पड़ाव माना जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ₹250 करोड़ से अधिक के कुल बकाए में से केवल ₹175 करोड़ की स्वीकृति के बाद शेष राशि के भुगतान को लेकर सवाल अभी भी बने हुए हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ₹250 करोड़ से अधिक के कुल बकाए को देखते हुए यह आंशिक समाधान ही है — शेष राशि का क्या होगा, यह अभी अनुत्तरित है। असली सवाल यह है कि जम्मू-कश्मीर जैसी सार्वभौमिक योजना, जो देश में अपनी तरह की अकेली है, बार-बार रीइम्बर्समेंट संकट में क्यों फँसती है। यदि भुगतान तंत्र को दुरुस्त नहीं किया गया, तो हर कुछ महीनों में अस्पतालों की हड़ताल और सरकारी पैकेज का यह चक्र जारी रहेगा — और इसका सबसे बड़ा नुकसान उन मरीजों को होगा जिनके पास कैशलेस इलाज के अलावा कोई विकल्प नहीं है।
RashtraPress
5 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जम्मू-कश्मीर सेहत स्कीम क्या है और इसमें कौन शामिल है?
आयुष्मान भारत पीएम-जेएवाई सेहत योजना जम्मू-कश्मीर की एक स्वास्थ्य बीमा पहल है जो केंद्र शासित प्रदेश के प्रत्येक परिवार को — चाहे उनकी आय कुछ भी हो — कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान करती है। यह देश में अपनी तरह की एकमात्र सार्वभौमिक कवरेज योजना है।
जम्मू-कश्मीर में निजी अस्पतालों ने सेहत स्कीम छोड़ने की चेतावनी क्यों दी थी?
जम्मू-कश्मीर प्राइवेट हॉस्पिटल्स एंड डायलिसिस सेंटर्स एसोसिएशन ने ₹250 करोड़ से अधिक के लंबित रीइम्बर्समेंट दावों और विशेष रूप से पिछले तीन महीनों के बकाया भुगतान न होने के कारण 1 जुलाई से योजना से हटने की घोषणा की थी। अस्पतालों ने कहा कि इस वित्तीय संकट में सेवाएं जारी रखना संभव नहीं था।
सरकार ने ₹175 करोड़ का पैकेज कब और कैसे जारी किया?
19 जून 2026 को जम्मू-कश्मीर के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने पैनल में शामिल निजी स्वास्थ्य संस्थानों के बकाया चुकाने के लिए ₹175 करोड़ मंजूर किए। यह राशि स्टेट हेल्थ एजेंसी (SHA) के माध्यम से जारी होगी और वितरण में कुछ दिन लग सकते हैं।
क्या ₹175 करोड़ से पूरा बकाया चुकता हो जाएगा?
नहीं। एसोसिएशन के अनुसार कुल बकाया ₹250 करोड़ से अधिक था, जबकि सरकार ने ₹175 करोड़ ही मंजूर किए हैं। शेष राशि के भुगतान को लेकर अभी तक कोई स्पष्ट समयसीमा नहीं दी गई है।
सेहत स्कीम के मरीजों पर इस संकट का क्या असर पड़ा?
फिलहाल निजी अस्पतालों ने अपना डी-एम्पैनलमेंट का फैसला टाल दिया है, इसलिए मरीजों की कैशलेस सेवाएं जारी हैं। हालांकि, यदि शेष बकाया समय पर नहीं चुकाया गया तो भविष्य में फिर से ऐसा संकट उत्पन्न हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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