जम्मू-कश्मीर सेहत स्कीम संकट: सरकार ने ₹175 करोड़ जारी किए, निजी अस्पतालों ने वापस ली हटने की चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर सरकार ने 19 जून 2026 को आयुष्मान भारत पीएम-जेएवाई सेहत योजना को बचाने के लिए ₹175 करोड़ के पैकेज को मंजूरी दी, जिसके बाद केंद्र शासित प्रदेश के निजी अस्पतालों और डायलिसिस सेंटरों ने 1 जुलाई से योजना छोड़ने का अपना प्रस्तावित फैसला अस्थायी रूप से वापस ले लिया। यह राशि लंबे समय से लंबित रीइम्बर्समेंट दावों के निपटारे के लिए स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा अनुमोदित की गई है।
संकट की पृष्ठभूमि
जम्मू-कश्मीर प्राइवेट हॉस्पिटल्स एंड डायलिसिस सेंटर्स एसोसिएशन ने दावों के निपटारे में लगातार हो रही देरी का हवाला देते हुए 1 जुलाई से सेहत योजना से बाहर निकलने की चेतावनी दी थी। एसोसिएशन के अनुसार, बकाया राशि ₹250 करोड़ से अधिक हो गई थी, जिससे अस्पतालों और डायलिसिस सेंटरों के सामने गंभीर वित्तीय संकट खड़ा हो गया था। अस्पताल प्रशासन ने स्पष्ट किया कि विशेष रूप से पिछले तीन महीनों के बकाया भुगतान के बिना सेवाएं जारी रखना संभव नहीं था।
सरकार का हस्तक्षेप और आश्वासन
स्टेट हेल्थ एजेंसी (SHA) के वरिष्ठ अधिकारियों और निजी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रतिनिधियों के बीच हुई बातचीत में सरकार ने मंजूर की गई ₹175 करोड़ की राशि बिना किसी और विलंब के जारी करने का भरोसा दिलाया। अधिकारियों ने बताया कि यह धनराशि स्टेट हेल्थ एजेंसी के माध्यम से वितरित की जाएगी, हालांकि फंड के ट्रांसफर और वितरण में कुछ दिन लग सकते हैं।
जम्मू-कश्मीर की विशेष स्थिति
गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर देश का एकमात्र केंद्र शासित प्रदेश है जहाँ आय सीमा की परवाह किए बिना प्रत्येक परिवार को आयुष्मान भारत-पीएम-जेएवाई सेहत योजना का लाभ मिलता है। यह सार्वभौमिक कवरेज मॉडल लाखों निवासियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान करता है, जिसे बाधित होने से क्षेत्र के स्वास्थ्य ढाँचे पर गंभीर असर पड़ सकता था।
अस्पतालों की प्रतिक्रिया
सरकारी आश्वासन के बाद एसोसिएशन ने अपना प्रस्तावित डी-एम्पैनलमेंट टालते हुए फिलहाल योजना के तहत स्वास्थ्य सेवाएं जारी रखने पर सहमति जताई। स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों ने इस कदम का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि इस वित्तीय सहायता से पैनल में शामिल अस्पतालों का भरोसा बहाल होगा और मरीजों की देखभाल निर्बाध रूप से जारी रहेगी।
आगे की राह
रीइम्बर्समेंट की प्रक्रिया SHA के माध्यम से फंड जारी होने के बाद शुरू होने की उम्मीद है। यह कदम सेहत पहल की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए एक अहम पड़ाव माना जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ₹250 करोड़ से अधिक के कुल बकाए में से केवल ₹175 करोड़ की स्वीकृति के बाद शेष राशि के भुगतान को लेकर सवाल अभी भी बने हुए हैं।