6 अगस्त 2026
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पीएमजेएवाई-सेहत धोखाधड़ी: जम्मू-कश्मीर में कार्डियोलॉजिस्ट के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई, बर्खास्तगी तक का खतरा

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पीएमजेएवाई-सेहत धोखाधड़ी: जम्मू-कश्मीर में कार्डियोलॉजिस्ट के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई, बर्खास्तगी तक का खतरा

सारांश

जम्मू-कश्मीर में पीएमजेएवाई-सेहत स्कीम के तहत बीमा क्लेम में धोखाधड़ी, मेडिकल रिकॉर्ड में हेरफेर और मरीजों के शोषण के आरोप में एक सरकारी कार्डियोलॉजिस्ट के खिलाफ कार्रवाई — और यह तब, जब सरकार ने योजना बचाने के लिए ₹175 करोड़ का पैकेज जारी किया है।

मुख्य बातें

जम्मू-कश्मीर सरकार ने 20 जून 2026 को एक सरकारी मेडिकल कॉलेज के कार्डियोलॉजिस्ट के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की।
डॉक्टर पर पीएमजेएवाई-सेहत स्कीम में धोखाधड़ी से क्लेम, मेडिकल रिकॉर्ड में हेरफेर और मरीजों के आर्थिक शोषण के आरोप हैं।
आरोप प्रमाणित होने पर नौकरी से बर्खास्तगी तक की कार्रवाई संभव; विभाग ने लिखित जवाब तलब किया।
19 जून को प्राइवेट अस्पतालों के योजना से हटने के बाद सरकार ने ₹175 करोड़ का पैकेज जारी कर बकाया भुगतान का भरोसा दिलाया।
जांच का आधार ऑडिट रिपोर्ट, मरीजों के रिकॉर्ड और धोखाधड़ी-रोधी जांच के निष्कर्ष हैं।

जम्मू-कश्मीर सरकार ने 20 जून 2026 को एक सरकारी मेडिकल कॉलेज में तैनात कार्डियोलॉजिस्ट के खिलाफ औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की है। आरोप है कि डॉक्टर ने पीएमजेएवाई-सेहत स्कीम के तहत धोखाधड़ी से बीमा क्लेम किए, मेडिकल रिकॉर्ड में हेरफेर किया और कैशलेस इलाज के हकदार मरीजों का आर्थिक शोषण किया। यह कार्रवाई ऑडिट निष्कर्षों, मरीजों के रिकॉर्ड और धोखाधड़ी-रोधी जांच के आधार पर की गई है।

मुख्य आरोप क्या हैं

सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, डॉक्टर पर जम्मू-कश्मीर सिविल सर्विस नियमों के तहत कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। कथित तौर पर डॉक्टर ने पेसमेकर सहित कार्डियक प्रक्रियाओं के बारे में बीमा क्लेम हासिल करने के लिए गलत जानकारी दी।

इसके अलावा खरीद नियमों की अनदेखी करते हुए प्राइवेट वेंडरों से मेडिकल इम्प्लांट की अनियमित खरीद का भी आरोप है। जांच में यह भी सामने आया है कि ऐसी चिकित्सा प्रक्रियाएं की गईं जिनका कोई स्थापित मेडिकल आधार नहीं था।

जांच का दायरा और विभागीय कदम

विभाग ने ऑडिट रिपोर्ट, मरीजों के रिकॉर्ड और धोखाधड़ी-रोधी जांच के निष्कर्षों के आधार पर डॉक्टर से लिखित जवाब तलब किया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि आरोप प्रमाणित होते हैं, तो नौकरी से बर्खास्तगी सहित कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

गौरतलब है कि यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब जम्मू-कश्मीर में पीएमजेएवाई-सेहत योजना पहले से ही वित्तीय दबाव में है।

₹175 करोड़ का पैकेज और प्राइवेट अस्पतालों की वापसी

19 जून को प्राइवेट अस्पतालों के आयुष्मान भारत पीएम-जेएवाई सेहत योजना से हटने के बाद जम्मू-कश्मीर सरकार ने योजना को पुनः सक्रिय करने के लिए ₹175 करोड़ का पैकेज जारी किया। स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग ने पैनलबद्ध प्राइवेट स्वास्थ्य संस्थानों के लंबे समय से लंबित बकाया भुगतान चुकाने के लिए यह राशि मंजूर की।

अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि अलग-अलग अस्पतालों के बकाया बिलों का शीघ्र निपटारा किया जाएगा, ताकि योजना के तहत सेवाएं बाधित न हों।

आम जनता पर असर और आगे की राह

पीएमजेएवाई-सेहत योजना जम्मू-कश्मीर के लाखों लाभार्थियों को कैशलेस स्वास्थ्य सेवा प्रदान करती है। इस तरह की धोखाधड़ी सीधे उन गरीब मरीजों को नुकसान पहुँचाती है जो इस योजना पर निर्भर हैं। विभाग की यह कार्रवाई योजना की विश्वसनीयता बहाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। आने वाले हफ्तों में डॉक्टर के जवाब और जांच के अगले चरण पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

या व्यापक प्रणालीगत सुधार की शुरुआत होगी।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएमजेएवाई-सेहत स्कीम में धोखाधड़ी के क्या आरोप हैं?
कार्डियोलॉजिस्ट पर आरोप है कि उन्होंने पेसमेकर सहित कार्डियक प्रक्रियाओं के बारे में गलत जानकारी देकर बीमा क्लेम हासिल किए, मेडिकल रिकॉर्ड में हेरफेर किया और प्राइवेट वेंडरों से अनियमित रूप से मेडिकल इम्प्लांट खरीदे। इसके अलावा कैशलेस इलाज के हकदार मरीजों से भी पैसे वसूले गए।
जम्मू-कश्मीर में पीएमजेएवाई-सेहत स्कीम क्या है?
आयुष्मान भारत पीएम-जेएवाई सेहत योजना जम्मू-कश्मीर के निवासियों को कैशलेस स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करती है। इसके तहत पैनलबद्ध सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में इलाज का खर्च बीमा क्लेम के जरिए वहन किया जाता है।
डॉक्टर के खिलाफ क्या कार्रवाई हो सकती है?
विभाग ने डॉक्टर से लिखित जवाब मांगा है। यदि आरोप साबित होते हैं, तो जम्मू-कश्मीर सिविल सर्विस नियमों के तहत नौकरी से बर्खास्तगी सहित कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
₹175 करोड़ का पैकेज क्यों जारी किया गया?
19 जून को प्राइवेट अस्पतालों के पीएमजेएवाई-सेहत योजना से हटने के बाद सरकार ने योजना को पुनः सक्रिय करने के लिए ₹175 करोड़ जारी किए। यह राशि पैनलबद्ध प्राइवेट अस्पतालों के लंबे समय से लंबित बकाया रीइम्बर्समेंट क्लेम के निपटारे के लिए मंजूर की गई।
इस मामले की जांच किस आधार पर हो रही है?
जांच ऑडिट रिपोर्ट, मरीजों के रिकॉर्ड और धोखाधड़ी-रोधी जांच के निष्कर्षों पर आधारित है। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर विभाग ने औपचारिक अनुशासनात्मक प्रक्रिया शुरू की है।
राष्ट्र प्रेस
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