पीएमजेएवाई-सेहत धोखाधड़ी: जम्मू-कश्मीर में कार्डियोलॉजिस्ट के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई, बर्खास्तगी तक का खतरा
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर सरकार ने 20 जून 2026 को एक सरकारी मेडिकल कॉलेज में तैनात कार्डियोलॉजिस्ट के खिलाफ औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की है। आरोप है कि डॉक्टर ने पीएमजेएवाई-सेहत स्कीम के तहत धोखाधड़ी से बीमा क्लेम किए, मेडिकल रिकॉर्ड में हेरफेर किया और कैशलेस इलाज के हकदार मरीजों का आर्थिक शोषण किया। यह कार्रवाई ऑडिट निष्कर्षों, मरीजों के रिकॉर्ड और धोखाधड़ी-रोधी जांच के आधार पर की गई है।
मुख्य आरोप क्या हैं
सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, डॉक्टर पर जम्मू-कश्मीर सिविल सर्विस नियमों के तहत कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। कथित तौर पर डॉक्टर ने पेसमेकर सहित कार्डियक प्रक्रियाओं के बारे में बीमा क्लेम हासिल करने के लिए गलत जानकारी दी।
इसके अलावा खरीद नियमों की अनदेखी करते हुए प्राइवेट वेंडरों से मेडिकल इम्प्लांट की अनियमित खरीद का भी आरोप है। जांच में यह भी सामने आया है कि ऐसी चिकित्सा प्रक्रियाएं की गईं जिनका कोई स्थापित मेडिकल आधार नहीं था।
जांच का दायरा और विभागीय कदम
विभाग ने ऑडिट रिपोर्ट, मरीजों के रिकॉर्ड और धोखाधड़ी-रोधी जांच के निष्कर्षों के आधार पर डॉक्टर से लिखित जवाब तलब किया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि आरोप प्रमाणित होते हैं, तो नौकरी से बर्खास्तगी सहित कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
गौरतलब है कि यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब जम्मू-कश्मीर में पीएमजेएवाई-सेहत योजना पहले से ही वित्तीय दबाव में है।
₹175 करोड़ का पैकेज और प्राइवेट अस्पतालों की वापसी
19 जून को प्राइवेट अस्पतालों के आयुष्मान भारत पीएम-जेएवाई सेहत योजना से हटने के बाद जम्मू-कश्मीर सरकार ने योजना को पुनः सक्रिय करने के लिए ₹175 करोड़ का पैकेज जारी किया। स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग ने पैनलबद्ध प्राइवेट स्वास्थ्य संस्थानों के लंबे समय से लंबित बकाया भुगतान चुकाने के लिए यह राशि मंजूर की।
अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि अलग-अलग अस्पतालों के बकाया बिलों का शीघ्र निपटारा किया जाएगा, ताकि योजना के तहत सेवाएं बाधित न हों।
आम जनता पर असर और आगे की राह
पीएमजेएवाई-सेहत योजना जम्मू-कश्मीर के लाखों लाभार्थियों को कैशलेस स्वास्थ्य सेवा प्रदान करती है। इस तरह की धोखाधड़ी सीधे उन गरीब मरीजों को नुकसान पहुँचाती है जो इस योजना पर निर्भर हैं। विभाग की यह कार्रवाई योजना की विश्वसनीयता बहाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। आने वाले हफ्तों में डॉक्टर के जवाब और जांच के अगले चरण पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।