6 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

आयुष्मान भारत और महात्मा फुले योजना में 15,407 संदिग्ध दावों की जांच को महाराष्ट्र ने बनाई एसआईटी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
आयुष्मान भारत और महात्मा फुले योजना में 15,407 संदिग्ध दावों की जांच को महाराष्ट्र ने बनाई एसआईटी

सारांश

महाराष्ट्र में दो प्रमुख स्वास्थ्य योजनाओं के तहत 15,407 संदिग्ध दावों की जांच के लिए एसआईटी बनाई गई है। नासिक मंडल आयुक्त की अध्यक्षता में गठित यह दल 30 दिनों में रिपोर्ट देगा — और दोषी अस्पतालों पर एफआईआर से लेकर पैनल से बाहर करने तक की कार्रवाई तय होगी।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र सरकार ने 5 अगस्त 2026 को एसआईटी का गठन किया — आयुष्मान भारत (एबी-पीएमजेएवाई) और महात्मा फुले जन आरोग्य योजना में 15,407 संदिग्ध दावों की जांच के लिए।
एसआईटी की अध्यक्षता नासिक मंडल आयुक्त प्रवीण गेडाम करेंगे; साइबर पुलिस, आर्थिक अपराध शाखा और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी शामिल।
जांच का दायरा: फर्जी दावे, अपकोडिंग , संदिग्ध रोगी पंजीकरण, थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर की भूमिका।
एसआईटी को 30 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपनी होगी; दोषियों पर कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई होगी।
स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने चेतावनी दी — अतिरिक्त शुल्क वसूलने वाले अस्पतालों पर एफआईआर और पैनल से निष्कासन।
निजी अस्पतालों में बेड की उपलब्धता की निगरानी के लिए रियल-टाइम बेड ट्रैकिंग डैशबोर्ड लाने की घोषणा।

महाराष्ट्र सरकार ने 5 अगस्त 2026 को आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) और महात्मा ज्योतिराव फुले जन आरोग्य योजना (एमजेपीजेएवाई) के अंतर्गत 2024 से 2026 के बीच दर्ज 15,407 संदिग्ध चिकित्सा उपचार दावों की व्यापक जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। यह कदम मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में 10 जुलाई को हुई उच्चस्तरीय बैठक के निर्देशों के बाद उठाया गया है।

एसआईटी का गठन और संरचना

नासिक मंडल आयुक्त प्रवीण गेडाम की अध्यक्षता में गठित इस एसआईटी में सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग, सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, साइबर पुलिस, आर्थिक अपराध शाखा और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। जरूरत पड़ने पर चिकित्सा शिक्षा विभाग के विशेषज्ञ चिकित्सक भी जांच में सहयोग करेंगे।

सरकारी प्रस्ताव (जीआर) के अनुसार, एसआईटी को 30 दिनों के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपनी होगी। रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के विरुद्ध कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई तय की जाएगी।

जांच के दायरे में क्या आएगा

एसआईटी कई स्तरों पर संभावित अनियमितताओं की पड़ताल करेगी। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं — अस्पताल स्तर पर फर्जी या चिकित्सकीय रूप से अनावश्यक उपचार दावे, उपचार श्रेणियों को अनुचित तरीके से ऊँचे स्तर पर दर्शाना (अपकोडिंग), पैनल में शामिल करने और नवीनीकरण प्रक्रियाओं में गड़बड़ियाँ, संदिग्ध रोगी पंजीकरण, और एक ही मोबाइल नंबर या पहचान पत्र पर अनेक दावे।

इसके अलावा, थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर, जिला समन्वयकों और अन्य संबंधित पक्षों की संभावित संलिप्तता की भी जांच की जाएगी। एसआईटी को दावा स्वीकृति प्रक्रिया और निगरानी तंत्र में मौजूद खामियों का अध्ययन कर भविष्य में ऐसी गड़बड़ियाँ रोकने के लिए सुधारात्मक सुझाव देने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।

पहले की जांच और विस्तार की वजह

गौरतलब है कि सरकार ने पहले सिविल सर्जनों और जिला स्वास्थ्य अधिकारियों को लाभार्थियों के घर जाकर संदिग्ध दावों का सत्यापन करने के निर्देश दिए थे। हालांकि, प्रारंभिक जांच में सामने आया कि कथित अनियमितताएं कई जिलों में फैली हुई हैं, जिसके बाद एक स्वतंत्र एसआईटी के जरिए व्यापक जांच कराने का फैसला किया गया।

सरकार की प्रतिक्रिया और चेतावनी

मानसून सत्र के दौरान राज्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने विधानसभा में स्पष्ट किया कि महात्मा फुले जन आरोग्य योजना और आयुष्मान भारत योजना के तहत ₹5 लाख तक का इलाज पूरी तरह निःशुल्क और कैशलेस है। उन्होंने कहा कि मरीजों से 'एक रुपया भी अतिरिक्त' नहीं लिया जाना चाहिए।

आबिटकर ने चेतावनी दी कि यदि कोई अस्पताल लाभार्थियों से अतिरिक्त शुल्क वसूलते पाया गया, तो उसे तुरंत योजना से बाहर किया जाएगा और एफआईआर सहित आपराधिक कार्रवाई की जाएगी।

आम जनता पर असर और आगे की राह

मंत्री ने यह भी बताया कि कुछ निजी अस्पताल योजना के लाभार्थियों को बेड उपलब्ध न होने का बहाना बनाते हैं। इसे रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने रियल-टाइम बेड ट्रैकिंग डैशबोर्ड शुरू करने की घोषणा की है। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर स्वास्थ्य योजनाओं में पारदर्शिता की माँग तेज हो रही है। एसआईटी की रिपोर्ट आने के बाद यह तय होगा कि कितने अस्पतालों और अधिकारियों पर कार्रवाई होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

407 संदिग्ध दावों का यह आँकड़ा केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य वित्त पोषण में गहरी संरचनात्मक कमजोरियों का संकेत है। अपकोडिंग और फर्जी पंजीकरण जैसी गड़बड़ियाँ अकेले किसी एक अस्पताल से संभव नहीं — इनके लिए प्रणाली के कई स्तरों पर मिलीभगत जरूरी है, जिसे एसआईटी को बेबाकी से उजागर करना होगा। असली परीक्षा यह है कि 30 दिन की समयसीमा में जांच केवल छोटे अस्पतालों तक सिमटे नहीं, बल्कि थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर और जिला समन्वयकों तक भी पहुँचे। बिना स्वतंत्र ऑडिट तंत्र और सार्वजनिक जवाबदेही के, यह जांच भी पिछली ऐसी कवायदों की तरह सुर्खियों तक सिमट सकती है।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र एसआईटी किन योजनाओं में जांच करेगी?
एसआईटी आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) और महात्मा ज्योतिराव फुले जन आरोग्य योजना (एमजेपीजेएवाई) में 2024 से 2026 के बीच दर्ज 15,407 संदिग्ध चिकित्सा उपचार दावों की जांच करेगी। दोनों योजनाएं महाराष्ट्र में गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को कैशलेस इलाज प्रदान करती हैं।
एसआईटी का नेतृत्व कौन करेगा और इसमें कौन शामिल है?
नासिक मंडल आयुक्त प्रवीण गेडाम एसआईटी की अध्यक्षता करेंगे। इसमें सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग, सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, साइबर पुलिस, आर्थिक अपराध शाखा और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। जरूरत पड़ने पर चिकित्सा शिक्षा विभाग के विशेषज्ञ चिकित्सक भी सहयोग करेंगे।
एसआईटी कितने समय में रिपोर्ट देगी और आगे क्या होगा?
सरकारी आदेश के अनुसार एसआईटी को 30 दिनों के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपनी होगी। रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के विरुद्ध कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई तय की जाएगी।
इन योजनाओं में किस तरह की गड़बड़ियाँ सामने आई हैं?
प्रारंभिक जांच में फर्जी या चिकित्सकीय रूप से अनावश्यक उपचार दावे, अपकोडिंग (उपचार श्रेणी को ऊँचा दिखाना), एक ही मोबाइल नंबर या पहचान पत्र पर अनेक दावे, और संदिग्ध रोगी पंजीकरण जैसी अनियमितताएं कई जिलों में फैली पाई गईं। थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर और जिला समन्वयकों की संभावित भूमिका भी जांच के दायरे में है।
लाभार्थियों के लिए योजना में क्या प्रावधान हैं और उनके अधिकार क्या हैं?
स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने विधानसभा में स्पष्ट किया है कि दोनों योजनाओं के तहत ₹5 लाख तक का इलाज पूरी तरह निःशुल्क और कैशलेस है। यदि कोई अस्पताल लाभार्थी से अतिरिक्त शुल्क वसूलता है, तो उसे योजना से तुरंत बाहर किया जाएगा और एफआईआर दर्ज की जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 9 घंटे पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले