आयुष्मान भारत और महात्मा फुले योजना में 15,407 संदिग्ध दावों की जांच को महाराष्ट्र ने बनाई एसआईटी
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र सरकार ने 5 अगस्त 2026 को आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) और महात्मा ज्योतिराव फुले जन आरोग्य योजना (एमजेपीजेएवाई) के अंतर्गत 2024 से 2026 के बीच दर्ज 15,407 संदिग्ध चिकित्सा उपचार दावों की व्यापक जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। यह कदम मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में 10 जुलाई को हुई उच्चस्तरीय बैठक के निर्देशों के बाद उठाया गया है।
एसआईटी का गठन और संरचना
नासिक मंडल आयुक्त प्रवीण गेडाम की अध्यक्षता में गठित इस एसआईटी में सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग, सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, साइबर पुलिस, आर्थिक अपराध शाखा और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। जरूरत पड़ने पर चिकित्सा शिक्षा विभाग के विशेषज्ञ चिकित्सक भी जांच में सहयोग करेंगे।
सरकारी प्रस्ताव (जीआर) के अनुसार, एसआईटी को 30 दिनों के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपनी होगी। रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के विरुद्ध कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई तय की जाएगी।
जांच के दायरे में क्या आएगा
एसआईटी कई स्तरों पर संभावित अनियमितताओं की पड़ताल करेगी। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं — अस्पताल स्तर पर फर्जी या चिकित्सकीय रूप से अनावश्यक उपचार दावे, उपचार श्रेणियों को अनुचित तरीके से ऊँचे स्तर पर दर्शाना (अपकोडिंग), पैनल में शामिल करने और नवीनीकरण प्रक्रियाओं में गड़बड़ियाँ, संदिग्ध रोगी पंजीकरण, और एक ही मोबाइल नंबर या पहचान पत्र पर अनेक दावे।
इसके अलावा, थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर, जिला समन्वयकों और अन्य संबंधित पक्षों की संभावित संलिप्तता की भी जांच की जाएगी। एसआईटी को दावा स्वीकृति प्रक्रिया और निगरानी तंत्र में मौजूद खामियों का अध्ययन कर भविष्य में ऐसी गड़बड़ियाँ रोकने के लिए सुधारात्मक सुझाव देने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।
पहले की जांच और विस्तार की वजह
गौरतलब है कि सरकार ने पहले सिविल सर्जनों और जिला स्वास्थ्य अधिकारियों को लाभार्थियों के घर जाकर संदिग्ध दावों का सत्यापन करने के निर्देश दिए थे। हालांकि, प्रारंभिक जांच में सामने आया कि कथित अनियमितताएं कई जिलों में फैली हुई हैं, जिसके बाद एक स्वतंत्र एसआईटी के जरिए व्यापक जांच कराने का फैसला किया गया।
सरकार की प्रतिक्रिया और चेतावनी
मानसून सत्र के दौरान राज्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने विधानसभा में स्पष्ट किया कि महात्मा फुले जन आरोग्य योजना और आयुष्मान भारत योजना के तहत ₹5 लाख तक का इलाज पूरी तरह निःशुल्क और कैशलेस है। उन्होंने कहा कि मरीजों से 'एक रुपया भी अतिरिक्त' नहीं लिया जाना चाहिए।
आबिटकर ने चेतावनी दी कि यदि कोई अस्पताल लाभार्थियों से अतिरिक्त शुल्क वसूलते पाया गया, तो उसे तुरंत योजना से बाहर किया जाएगा और एफआईआर सहित आपराधिक कार्रवाई की जाएगी।
आम जनता पर असर और आगे की राह
मंत्री ने यह भी बताया कि कुछ निजी अस्पताल योजना के लाभार्थियों को बेड उपलब्ध न होने का बहाना बनाते हैं। इसे रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने रियल-टाइम बेड ट्रैकिंग डैशबोर्ड शुरू करने की घोषणा की है। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर स्वास्थ्य योजनाओं में पारदर्शिता की माँग तेज हो रही है। एसआईटी की रिपोर्ट आने के बाद यह तय होगा कि कितने अस्पतालों और अधिकारियों पर कार्रवाई होती है।