10 जुलाई 2026
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जन आरोग्य योजना घोटाला: महाराष्ट्र में SIT गठित, नासिक के 5 अस्पतालों की मान्यता रद्द, 16,000 संदिग्ध दावे जांच के घेरे में

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जन आरोग्य योजना घोटाला: महाराष्ट्र में SIT गठित, नासिक के 5 अस्पतालों की मान्यता रद्द, 16,000 संदिग्ध दावे जांच के घेरे में

सारांश

महाराष्ट्र में सरकारी स्वास्थ्य योजना में बड़ा घोटाला उजागर — 2024-26 के बीच 16,000 संदिग्ध दावे, नासिक से 9,500 मामले। CM फडणवीस ने SIT गठित की, 5 अस्पतालों की मान्यता रद्द और 13 लाख मामलों की AI-आधारित जांच का आदेश दिया।

मुख्य बातें

CM देवेंद्र फडणवीस ने 10 जुलाई 2026 को महात्मा ज्योतिराव फुले जन आरोग्य योजना में धोखाधड़ी की जांच के लिए SIT गठित करने का आदेश दिया।
SIT की अध्यक्षता नासिक मंडल के आयुक्त प्रवीण गेदाम करेंगे।
2024 से 2026 के बीच लगभग 16,000 संदिग्ध दावे और सर्जरी चिन्हित; इनमें से 9,500 से अधिक मामले नासिक जिले से।
प्रारंभिक जांच में नासिक के 5 अस्पतालों की मान्यता रद्द की गई।
सरकार AI और डेटा एनालिटिक्स के जरिए 13 लाख संदिग्ध मामलों की चरणबद्ध जांच करेगी।
हर जिले में एडवांस्ड डैशबोर्ड सिस्टम से जुड़ा समर्पित निगरानी तंत्र विकसित किया जाएगा।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 10 जुलाई 2026 को महात्मा ज्योतिराव फुले जन आरोग्य योजना में सामने आई धोखाधड़ी की व्यापक जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का आदेश दिया। यह घोषणा मुंबई में आयोजित आयुष्मान भारत–प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और महात्मा ज्योतिराव फुले जन आरोग्य योजना की संयुक्त समीक्षा बैठक के दौरान की गई, जिसमें वरिष्ठ मंत्री, पुलिस अधिकारी और स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख शामिल रहे। 2024 से 2026 के बीच की जांच में लगभग 16,000 संदिग्ध दावे और सर्जरी चिन्हित की गई हैं, जिनमें से करीब 9,500 मामले अकेले नासिक जिले से जुड़े हैं।

मुख्य घटनाक्रम

समीक्षा बैठक में राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले, सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश अबितकर, राज्य मंत्री मेघना सकोरे बोरदिकार, विधायक डॉ. राहुल अहेर, पुलिस महानिदेशक सदानंद दाते और स्टेट हेल्थ गारंटी सोसायटी के अधिकारी उपस्थित रहे। विधायक डॉ. अहेर ने बैठक में नासिक जिले के कथित धोखाधड़ी मामलों का विस्तृत विवरण सरकार के समक्ष रखा।

मुख्यमंत्री फडणवीस ने बताया कि प्रस्तावित SIT की अध्यक्षता नासिक मंडल के आयुक्त प्रवीण गेदाम करेंगे और इसमें विभिन्न विभागों के विशेषज्ञ सदस्य शामिल होंगे। प्रारंभिक जांच के आधार पर नासिक के पाँच अस्पतालों की मान्यता पहले ही रद्द की जा चुकी है।

धोखाधड़ी की व्यापकता

स्टेट हेल्थ गारंटी सोसायटी की जांच में वर्ष 2024 से 2026 के बीच लगभग 16,000 संदिग्ध दावे और सर्जरी सामने आई हैं। इनमें से 9,500 से अधिक मामले अकेले नासिक जिले से संबंधित हैं — जो इस घोटाले का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। सरकार अब एक 'एडवांस्ड एनालिसिस सिस्टम' के जरिए करीब 13 लाख संदिग्ध मामलों की चरणबद्ध जांच करने की योजना बना रही है।

गौरतलब है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में फर्जी दावों की समस्या केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है — देशभर में ऐसी योजनाओं में अनियमितताओं की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार आयुष्मान भारत के दायरे को और विस्तार देने की तैयारी कर रही है।

तकनीक से होगी निगरानी

फडणवीस ने स्पष्ट किया कि भविष्य में ऐसी धोखाधड़ी रोकने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा एनालिटिक्स का व्यापक उपयोग किया जाएगा। महाराष्ट्र साइबर पुलिस स्वास्थ्य योजनाओं में साइबर धोखाधड़ी की निगरानी और कार्रवाई में सक्रिय भूमिका निभाएगी। राज्य के प्रत्येक जिले में एक समर्पित निगरानी तंत्र विकसित किया जाएगा, जिसे एडवांस्ड डैशबोर्ड सिस्टम से जोड़ा जाएगा — जिससे संदिग्ध लेनदेन की रियल-टाइम मॉनिटरिंग और त्वरित कार्रवाई संभव होगी।

बड़े उपचार दावों का विशेष ऑडिट और सभी संदिग्ध मामलों का फोरेंसिक ऑडिट कराने का भी निर्देश दिया गया है। इसके साथ ही गलत तरीके से हासिल किए गए सरकारी धन की वसूली भी सुनिश्चित की जाएगी।

सरकार का रुख

मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि गरीब और जरूरतमंद नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण और पारदर्शी स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्वास्थ्य योजनाओं में किसी भी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

SIT की रिपोर्ट मिलने के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है। इन कदमों से प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और महात्मा ज्योतिराव फुले जन आरोग्य योजना में पारदर्शिता और जवाबदेही मजबूत होगी तथा वास्तविक लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ अधिक सुरक्षित और प्रभावी ढंग से पहुँच सकेगा।

आगे क्या होगा

SIT जल्द ही अपनी जांच शुरू करेगी और 13 लाख संदिग्ध मामलों की चरणबद्ध समीक्षा AI-आधारित विश्लेषण प्रणाली के माध्यम से की जाएगी। नासिक के पाँच अस्पतालों की मान्यता रद्द होने के बाद अन्य संदिग्ध अस्पतालों पर भी कार्रवाई की संभावना बनी हुई है। जिला स्तरीय निगरानी तंत्र स्थापित होने के बाद यह पूरा ढाँचा राज्य भर में लागू किया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 संदिग्ध दावे और उनमें से 9,500 अकेले नासिक से — यह आँकड़ा बताता है कि यह छिटपुट अनियमितता नहीं, बल्कि एक संगठित तंत्र की ओर इशारा करता है। असली सवाल यह है कि स्टेट हेल्थ गारंटी सोसायटी की नियमित ऑडिट व्यवस्था इतने वर्षों तक इसे क्यों नहीं पकड़ पाई। SIT का गठन और AI-आधारित निगरानी स्वागतयोग्य कदम हैं, लेकिन 13 लाख संदिग्ध मामलों की जांच का दायरा दर्शाता है कि समस्या की जड़ें कहीं गहरी हैं। जब तक अस्पतालों के पैनलीकरण और दावा-अनुमोदन की प्रक्रिया में संरचनात्मक सुधार नहीं होते, SIT की रिपोर्ट एक और दस्तावेज़ बनकर रह जाने का जोखिम उठाती है।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र में जन आरोग्य योजना में क्या धोखाधड़ी सामने आई है?
स्टेट हेल्थ गारंटी सोसायटी की जांच में 2024 से 2026 के बीच लगभग 16,000 संदिग्ध दावे और सर्जरी चिन्हित की गई हैं, जिनमें से करीब 9,500 मामले अकेले नासिक जिले से जुड़े हैं। इन मामलों में फर्जी या अनावश्यक उपचार दावों के जरिए सरकारी धन हड़पने का आरोप है।
SIT का गठन किसने और क्यों किया?
CM देवेंद्र फडणवीस ने 10 जुलाई 2026 को मुंबई में आयोजित संयुक्त समीक्षा बैठक के दौरान SIT गठित करने की घोषणा की। SIT की अध्यक्षता नासिक मंडल के आयुक्त प्रवीण गेदाम करेंगे और इसमें विभिन्न विभागों के विशेषज्ञ शामिल होंगे।
नासिक के किन अस्पतालों पर कार्रवाई हुई है?
प्रारंभिक जांच के आधार पर नासिक के पाँच अस्पतालों की मान्यता रद्द कर दी गई है। हालाँकि सरकार ने अभी तक इन अस्पतालों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं।
भविष्य में इस तरह की धोखाधड़ी रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएँगे?
सरकार AI और डेटा एनालिटिक्स के जरिए 13 लाख संदिग्ध मामलों की चरणबद्ध जांच करेगी। इसके अलावा हर जिले में एडवांस्ड डैशबोर्ड सिस्टम से जुड़ा निगरानी तंत्र बनाया जाएगा, बड़े दावों का फोरेंसिक ऑडिट होगा और महाराष्ट्र साइबर पुलिस सक्रिय भूमिका निभाएगी।
इस घोटाले से आम लाभार्थियों पर क्या असर पड़ेगा?
मुख्यमंत्री फडणवीस ने आश्वासन दिया है कि वास्तविक लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ पहुँचाना सर्वोच्च प्राथमिकता है। जांच का उद्देश्य फर्जी दावेदारों को हटाकर पारदर्शिता बढ़ाना है, ताकि जरूरतमंद नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ मिल सकें।
राष्ट्र प्रेस
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