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KGMU दवा घोटाला: कैंसर मरीज़ों की करोड़ों की दवाइयाँ बाहर भेजी गईं, प्रवक्ता बोले- सख्त कार्रवाई होगी

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KGMU दवा घोटाला: कैंसर मरीज़ों की करोड़ों की दवाइयाँ बाहर भेजी गईं, प्रवक्ता बोले- सख्त कार्रवाई होगी

सारांश

लखनऊ के KGMU में ‘असाध्य योजना’ की कैंसर दवाइयाँ कथित तौर पर बाहर भेजे जाने की पुष्टि अब खुद विश्वविद्यालय प्रवक्ता ने कर दी है। मासिक खपत कुछ ही समय में ₹5-7 लाख से बढ़कर लाखों गुना हो गई; कई ‘मरीज़’ या तो कैंसर पीड़ित नहीं थे या जीवित नहीं थे। कुलपति की समिति जाँच में जुटी, सियासत भी गरमाई।

मुख्य बातें

केके सिंह ने 2 जून को कैंसर दवाइयों के घोटाले की पुष्टि की।
‘ असाध्य योजना ’ की दवाइयाँ कथित तौर पर संस्थान से हटाकर बाहर भेजी गईं।
एक विभाग की मासिक खपत ₹5-7 लाख से कई गुना बढ़ी, जो जाँच का पहला सुराग बनी।
कुछ ‘मरीज़’ कैंसर पीड़ित नहीं थे, कुछ की मृत्यु हो चुकी थी — फिर भी दवाइयाँ निकलीं।
सपा प्रवक्ता उदयवीर सिंह ने स्वास्थ्य मंत्री पर निशाना साधा; भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने कड़ी सज़ा का भरोसा दिलाया।
कुलपति द्वारा गठित समिति की रिपोर्ट के बाद रिकवरी और कार्रवाई होगी।

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU), लखनऊ में कैंसर मरीज़ों के नाम पर मँगाई गई करोड़ों रुपये की महंगी दवाइयों के कथित घोटाले की पुष्टि करते हुए विश्वविद्यालय के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने 2 जून को कहा कि गड़बड़ी हुई है और प्रशासन ‘सख्त से सख्त’ कार्रवाई के लिए तैयार है। मामला ‘असाध्य योजना’ के तहत मरीज़ों के लिए लाई गई दवाइयों को कथित तौर पर संस्थान से बाहर भेजे जाने से जुड़ा है, जिसकी प्रारंभिक रिपोर्ट कुलपति को सौंप दी गई है।

मुख्य घटनाक्रम

डॉ. सिंह के अनुसार, ‘असाध्य योजना’ के अंतर्गत आने वाली दवाइयाँ कुछ कर्मचारियों और कंसल्टेंट्स की कथित लापरवाही के चलते KGMU से हटाकर कहीं और भेज दी गईं। उन्होंने बताया कि पहले एक विभाग में मासिक खपत लगभग ₹5 लाख से ₹7 लाख की दवाइयों की होती थी, जो बाद में बढ़कर लाखों रुपये तक पहुँच गई — यही असामान्य उछाल जाँच का पहला बिंदु बना।

प्रवक्ता ने कहा, “शुरुआती जाँच में हमें ऐसे संकेत मिले कि कुछ गड़बड़ है। कुछ मरीज़ों की मृत्यु हो चुकी थी, कुछ कैंसर के मरीज़ ही नहीं थे, और जो दवाइयाँ यहाँ दी जानी थीं, वे असल में दी ही नहीं गईं।” मामला सामने आने के बाद कुलपति ने उसी दिन एक जाँच समिति का गठन कर दिया।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

डॉ. केके सिंह के मुताबिक, प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर कुलपति विस्तृत और कड़ी जाँच कराने की तैयारी में हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई होगी और गबन की गई राशि की रिकवरी भी सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा, “KGMU के अधिकार-क्षेत्र में जितनी कार्रवाई संभव है, वह की जाएगी।”

राजनीतिक घमासान तेज़

घोटाले के सामने आते ही सियासी प्रतिक्रियाएँ तेज़ हो गई हैं। समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता उदयवीर सिंह ने आरोप लगाया कि 2017 से ही KGMU ‘लापरवाही और भ्रष्टाचार का अड्डा’ बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री स्वयं गंभीर नहीं हैं और भाजपा कार्यकर्ताओं की दख़लंदाज़ी से संस्थान में मनमानी हो रही है।

दूसरी ओर, भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने मामले की विस्तृत जानकारी होने से इनकार किया, लेकिन कहा कि मेडिकल कॉलेज के पास जवाबदेह प्रशासन है। उन्होंने स्वीकार किया कि पहले भी सरकारी अस्पतालों से शिकायतें मिलती रही हैं कि सरकारी आपूर्ति की दवाइयों के बजाय मरीज़ों को बाहर से दवा खरीदने के लिए कहा जाता था, और ऐसे मामलों में कार्रवाई भी हुई है। उन्होंने भरोसा जताया कि सरकार दोषियों को ‘कड़ी से कड़ी सज़ा’ दिलवाएगी।

आम मरीज़ों पर असर

‘असाध्य योजना’ राज्य सरकार की उस पहल का हिस्सा है जिसके तहत कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों से जूझ रहे ज़रूरतमंद मरीज़ों को महंगी दवाइयाँ मुफ़्त या रियायती दरों पर उपलब्ध कराई जाती हैं। आलोचकों का कहना है कि यदि इन दवाइयों का दुरुपयोग हुआ है, तो इसका सीधा खामियाज़ा उन गरीब मरीज़ों ने भुगता होगा जिन्हें उपचार समय पर नहीं मिल पाया।

आगे क्या

कुलपति द्वारा गठित समिति की विस्तृत जाँच रिपोर्ट के बाद ही दोषियों के नाम और कार्रवाई की प्रकृति स्पष्ट हो पाएगी। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थानों में शुमार KGMU पर पहले भी आपूर्ति-व्यवस्था में अनियमितताओं के आरोप लगते रहे हैं — ऐसे में यह जाँच संस्थागत सुधार की दिशा में निर्णायक मोड़ बन सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि कल्याणकारी योजना के भीतर बने तंत्र की विफलता का संकेत है — ‘असाध्य योजना’ जैसी पहल का अर्थ ही उन मरीज़ों तक पहुँच है जो बाज़ार की महंगी दवाइयाँ नहीं खरीद सकते। मासिक खपत के आँकड़ों में असामान्य उछाल वर्षों तक कैसे पकड़ में नहीं आया, यह सवाल सिर्फ़ KGMU का नहीं, पूरे आपूर्ति-ऑडिट तंत्र का है। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप अपनी जगह, असली परीक्षा यह है कि क्या जाँच सिर्फ़ ‘कुछ कर्मचारियों’ तक रुकेगी या ऊपरी जवाबदेही तक पहुँचेगी। उत्तर प्रदेश में पिछली स्वास्थ्य-क्षेत्र जाँचों का इतिहास इस मामले में सतर्क उम्मीद ही जगाता है।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

KGMU दवा घोटाला क्या है?
यह किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ में ‘असाध्य योजना’ के तहत कैंसर मरीज़ों के लिए मँगाई गई करोड़ों रुपये की महंगी दवाइयों के कथित दुरुपयोग का मामला है। प्रवक्ता डॉ. केके सिंह के अनुसार, ये दवाइयाँ मरीज़ों को दिए जाने के बजाय संस्थान से बाहर भेज दी गईं।
घोटाला सामने कैसे आया?
एक विभाग की मासिक दवा-खपत जो पहले लगभग ₹5 लाख से ₹7 लाख थी, असामान्य रूप से बढ़कर लाखों गुना हो गई। शुरुआती जाँच में पता चला कि कुछ कथित मरीज़ कैंसर पीड़ित नहीं थे और कुछ की मृत्यु हो चुकी थी, फिर भी उनके नाम पर दवाइयाँ जारी हुईं।
KGMU प्रशासन अब क्या कार्रवाई कर रहा है?
कुलपति ने मामले की जानकारी मिलते ही उसी दिन एक जाँच समिति का गठन कर दिया, जिसकी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी जा चुकी है। प्रवक्ता के अनुसार, दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई और गबन की राशि की रिकवरी सुनिश्चित की जाएगी।
राजनीतिक दलों की क्या प्रतिक्रिया रही?
समाजवादी पार्टी प्रवक्ता उदयवीर सिंह ने 2017 से KGMU में लगातार भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए स्वास्थ्य मंत्री पर सवाल उठाए। भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने कहा कि सरकार दोषियों को कड़ी सज़ा दिलवाएगी।
‘असाध्य योजना’ क्या है और इससे कौन प्रभावित होगा?
‘असाध्य योजना’ राज्य सरकार की पहल है, जिसके तहत कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के ज़रूरतमंद मरीज़ों को महंगी दवाइयाँ रियायती या मुफ़्त उपलब्ध कराई जाती हैं। आलोचकों का कहना है कि कथित घोटाले से सबसे बड़ा नुक़सान उन गरीब मरीज़ों को हुआ जिन्हें समय पर इलाज नहीं मिल पाया।
राष्ट्र प्रेस
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