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KGMU दवा घोटाला: कैंसर मरीजों के नाम पर करोड़ों की दवाइयां बाहर भेजने का आरोप, सख्त कार्रवाई का ऐलान

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KGMU दवा घोटाला: कैंसर मरीजों के नाम पर करोड़ों की दवाइयां बाहर भेजने का आरोप, सख्त कार्रवाई का ऐलान

सारांश

लखनऊ के KGMU में कैंसर मरीजों के नाम पर लाई गई करोड़ों की दवाइयां कथित तौर पर बाहर भेजे जाने का मामला उजागर। प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने घोटाले की पुष्टि करते हुए सख्त कार्रवाई और पैसों की रिकवरी का भरोसा दिया, जबकि सपा और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।

मुख्य बातें

केके सिंह ने कैंसर मरीजों के नाम पर हुए दवा घोटाले की पुष्टि की।
‘ असाध्य योजना ’ के तहत आई महंगी दवाइयां कथित तौर पर संस्थान से बाहर भेजी गईं।
पहले एक विभाग में मासिक ₹5–7 लाख की दवाइयां इस्तेमाल होती थीं, बाद में खर्च लाखों रुपए तक बढ़ गया।
जांच में पाया गया कि कुछ ‘मरीजों’ की मृत्यु हो चुकी थी और कुछ कैंसर रोगी थे ही नहीं।
सपा प्रवक्ता उदयवीर सिंह ने 2017 से KGMU में भ्रष्टाचार बढ़ने का आरोप लगाया; भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने सख्त सजा का भरोसा दिया।

लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में कैंसर मरीजों के नाम पर लाई गई करोड़ों रुपए की महंगी दवाइयों के कथित घोटाले की पुष्टि करते हुए विश्वविद्यालय के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने सोमवार को कहा कि घोटाला हुआ है और प्रशासन सख्त से सख्त कार्रवाई के लिए तैयार है। मामले में वाइस चांसलर द्वारा गठित समिति की शुरुआती जांच में सामने आया कि ‘असाध्य योजना’ के तहत मरीजों के लिए लाई गई दवाइयां संस्थान से बाहर भेजी गईं।

प्रवक्ता ने क्या बताया

डॉ. केके सिंह ने बताया कि कुछ कर्मचारियों और कंसल्टेंट्स की कथित लापरवाही के चलते दवाइयों का उपयोग असामान्य रूप से बढ़ गया था। उनके अनुसार, पहले एक विभाग में हर माह लगभग ₹5 लाख से ₹7 लाख की दवाइयां इस्तेमाल होती थीं, लेकिन बाद में यह आँकड़ा लाखों रुपए तक पहुँच गया। मामला संज्ञान में आने पर वाइस चांसलर ने उसी दिन एक जांच समिति का गठन कर दिया।

शुरुआती जांच के संकेत

प्रवक्ता ने कहा, ‘शुरुआती जांच के दौरान हमें ऐसे संकेत मिले कि कुछ गड़बड़ है। कुछ मरीजों की मृत्यु हो चुकी थी, कुछ कैंसर के मरीज ही नहीं थे, और जिन दवाइयों को यहां दिया जाना था, वे असल में यहां नहीं दी गईं।’ उन्होंने बताया कि इन दवाइयों को कथित तौर पर कहीं और भेज दिया गया। शुरुआती रिपोर्ट वाइस चांसलर को सौंपी जा चुकी है, जिसके आधार पर अब विस्तृत जांच की तैयारी है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज

मामले पर सियासत भी गरमा गई है। समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता उदयवीर सिंह ने आरोप लगाया कि 2017 से ही KGMU लगातार लापरवाही और भ्रष्टाचार का अड्डा बनता जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘खुद स्वास्थ्य मंत्री ही गंभीर नहीं हैं। भाजपा के नेता और कार्यकर्ता वहां जाकर हंगामा करते हैं। मनमाने तरीके से काम किए जा रहे हैं, इसलिए ऐसी शिकायतें सामने आना स्वाभाविक है।’

दूसरी ओर, भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने कहा कि उन्हें इस विशेष मामले की जानकारी नहीं है, लेकिन मेडिकल कॉलेज प्रशासन जवाबदेह है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पहले सरकारी अस्पतालों से ऐसी शिकायतें मिली थीं कि सरकारी व्यवस्था में उपलब्ध दवाइयां मरीजों को बाजार से खरीदने के लिए लिखी जा रही थीं, और ऐसे मामलों में कार्रवाई भी हुई है।

क्यों मायने रखता है

KGMU उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा सरकारी मेडिकल संस्थान है, जहाँ हर दिन हजारों मरीज इलाज के लिए पहुँचते हैं। ‘असाध्य योजना’ खासतौर पर गंभीर बीमारियों — विशेष रूप से कैंसर — से जूझ रहे गरीब मरीजों के लिए राज्य सरकार की प्रमुख आर्थिक सहायता योजनाओं में से एक मानी जाती है। गौरतलब है कि यह आरोप ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक स्वास्थ्य खर्च और सरकारी अस्पतालों की पारदर्शिता पर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं।

आगे क्या

प्रवक्ता के अनुसार, दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी और सरकारी धन की रिकवरी कराई जाएगी। विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि घोटाले की वास्तविक राशि कितनी है और इसमें कितने कर्मचारी व कंसल्टेंट शामिल थे।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि गरीब कैंसर मरीजों के साथ सीधा विश्वासघात है। असली सवाल यह नहीं कि घोटाला हुआ — प्रवक्ता खुद इसकी पुष्टि कर रहे हैं — बल्कि यह है कि वर्षों तक खर्च के असामान्य उछाल पर ऑडिट सिस्टम क्यों नहीं जागा। ‘मृत मरीजों’ और ‘गैर-कैंसर मरीजों’ के नाम पर दवा निकासी की बात अगर सही है, तो यह डेटा-स्तर की धोखाधड़ी है, जिसकी ज़िम्मेदारी अकेले निचले कर्मचारियों पर डालना पर्याप्त नहीं होगा। जब तक स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट और स्पष्ट टाइमलाइन सामने नहीं आती, ‘सख्त कार्रवाई’ का वादा पिछली ऐसी कई जाँचों जैसा खोखला रह सकता है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

KGMU दवा घोटाला क्या है?
यह किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ में ‘असाध्य योजना’ के तहत कैंसर मरीजों के लिए मंगाई गई करोड़ों रुपए की महंगी दवाइयों के कथित गबन से जुड़ा मामला है। प्रवक्ता डॉ. केके सिंह के अनुसार, ये दवाइयां मरीजों को देने के बजाय कथित तौर पर संस्थान से बाहर भेज दी गईं।
घोटाले का पता कैसे चला?
एक विभाग में जहाँ पहले हर महीने लगभग ₹5 से ₹7 लाख की दवाइयां इस्तेमाल होती थीं, वहां खर्च बढ़कर लाखों रुपए तक पहुँच गया था। यह असामान्य उछाल सामने आने पर मामला वाइस चांसलर के संज्ञान में लाया गया, जिन्होंने उसी दिन जांच समिति गठित कर दी।
जांच में अब तक क्या सामने आया है?
शुरुआती जांच में पाया गया कि कुछ ‘लाभार्थी मरीजों’ की पहले ही मृत्यु हो चुकी थी, कुछ कैंसर रोगी थे ही नहीं, और कई मामलों में दर्ज दवाइयां मरीजों को वास्तव में दी ही नहीं गई थीं। शुरुआती रिपोर्ट वाइस चांसलर को सौंपी जा चुकी है।
दोषियों पर क्या कार्रवाई होगी?
KGMU प्रवक्ता के अनुसार, दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों और कंसल्टेंट्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और सरकारी पैसों की रिकवरी कराई जाएगी। विस्तृत जांच के नतीजों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।
मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रिया क्या रही है?
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता उदयवीर सिंह ने आरोप लगाया कि 2017 से KGMU में भ्रष्टाचार बढ़ा है और स्वास्थ्य मंत्री गंभीर नहीं हैं। वहीं भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने कहा कि सरकार जिम्मेदार है और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलवाना सुनिश्चित करेगी।
राष्ट्र प्रेस
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