KGMU दवा घोटाला: कैंसर मरीजों के नाम पर करोड़ों की दवाइयां बाहर भेजने का आरोप, सख्त कार्रवाई का ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में कैंसर मरीजों के नाम पर लाई गई करोड़ों रुपए की महंगी दवाइयों के कथित घोटाले की पुष्टि करते हुए विश्वविद्यालय के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने सोमवार को कहा कि घोटाला हुआ है और प्रशासन सख्त से सख्त कार्रवाई के लिए तैयार है। मामले में वाइस चांसलर द्वारा गठित समिति की शुरुआती जांच में सामने आया कि ‘असाध्य योजना’ के तहत मरीजों के लिए लाई गई दवाइयां संस्थान से बाहर भेजी गईं।
प्रवक्ता ने क्या बताया
डॉ. केके सिंह ने बताया कि कुछ कर्मचारियों और कंसल्टेंट्स की कथित लापरवाही के चलते दवाइयों का उपयोग असामान्य रूप से बढ़ गया था। उनके अनुसार, पहले एक विभाग में हर माह लगभग ₹5 लाख से ₹7 लाख की दवाइयां इस्तेमाल होती थीं, लेकिन बाद में यह आँकड़ा लाखों रुपए तक पहुँच गया। मामला संज्ञान में आने पर वाइस चांसलर ने उसी दिन एक जांच समिति का गठन कर दिया।
शुरुआती जांच के संकेत
प्रवक्ता ने कहा, ‘शुरुआती जांच के दौरान हमें ऐसे संकेत मिले कि कुछ गड़बड़ है। कुछ मरीजों की मृत्यु हो चुकी थी, कुछ कैंसर के मरीज ही नहीं थे, और जिन दवाइयों को यहां दिया जाना था, वे असल में यहां नहीं दी गईं।’ उन्होंने बताया कि इन दवाइयों को कथित तौर पर कहीं और भेज दिया गया। शुरुआती रिपोर्ट वाइस चांसलर को सौंपी जा चुकी है, जिसके आधार पर अब विस्तृत जांच की तैयारी है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज
मामले पर सियासत भी गरमा गई है। समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता उदयवीर सिंह ने आरोप लगाया कि 2017 से ही KGMU लगातार लापरवाही और भ्रष्टाचार का अड्डा बनता जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘खुद स्वास्थ्य मंत्री ही गंभीर नहीं हैं। भाजपा के नेता और कार्यकर्ता वहां जाकर हंगामा करते हैं। मनमाने तरीके से काम किए जा रहे हैं, इसलिए ऐसी शिकायतें सामने आना स्वाभाविक है।’
दूसरी ओर, भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने कहा कि उन्हें इस विशेष मामले की जानकारी नहीं है, लेकिन मेडिकल कॉलेज प्रशासन जवाबदेह है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पहले सरकारी अस्पतालों से ऐसी शिकायतें मिली थीं कि सरकारी व्यवस्था में उपलब्ध दवाइयां मरीजों को बाजार से खरीदने के लिए लिखी जा रही थीं, और ऐसे मामलों में कार्रवाई भी हुई है।
क्यों मायने रखता है
KGMU उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा सरकारी मेडिकल संस्थान है, जहाँ हर दिन हजारों मरीज इलाज के लिए पहुँचते हैं। ‘असाध्य योजना’ खासतौर पर गंभीर बीमारियों — विशेष रूप से कैंसर — से जूझ रहे गरीब मरीजों के लिए राज्य सरकार की प्रमुख आर्थिक सहायता योजनाओं में से एक मानी जाती है। गौरतलब है कि यह आरोप ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक स्वास्थ्य खर्च और सरकारी अस्पतालों की पारदर्शिता पर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं।
आगे क्या
प्रवक्ता के अनुसार, दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी और सरकारी धन की रिकवरी कराई जाएगी। विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि घोटाले की वास्तविक राशि कितनी है और इसमें कितने कर्मचारी व कंसल्टेंट शामिल थे।