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कपालभाति के 3 प्रकार: सर्दी-जुकाम, साइनस और डायबिटीज में आयुष मंत्रालय की सलाह

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कपालभाति के 3 प्रकार: सर्दी-जुकाम, साइनस और डायबिटीज में आयुष मंत्रालय की सलाह

सारांश

सिर्फ एक नहीं, तीन — आयुष मंत्रालय ने कपालभाति के तीन अलग प्रकार बताए हैं जो सर्दी-जुकाम से लेकर डायबिटीज तक, कफ दोष से लेकर मानसिक स्पष्टता तक असर करते हैं। वातक्रम, व्युत्क्रम और शीतक्रम — तीनों की विधि, लाभ और प्रयोग अलग-अलग हैं।

मुख्य बातें

आयुष मंत्रालय ने कपालभाति के 3 प्रकार — वातक्रम, व्युत्क्रम और शीतक्रम — को षट्कर्म शुद्धीकरण के लिए मान्यता दी है।
वातक्रम कपालभाति सर्दी, अस्थमा, साइनोसाइटिस, मधुमेह और मोटापे में उपयोगी मानी जाती है।
व्युत्क्रम कपालभाति में गुनगुना नमकयुक्त जल नाक से खींचकर मुँह से निकाला जाता है; साइनस में राहत देती है।
शीतक्रम कपालभाति व्युत्क्रम की विपरीत क्रिया है — पानी मुँह से लेकर नाक से निकाला जाता है; कफ दोष नाश और त्वचा की चमक के लिए प्रभावी।
मंत्रालय के अनुसार, कपालभाति शरीर से 20 प्रकार के कफ दोषों का नाश करती है और फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ाती है।

कपालभाति प्राणायाम को आयुष मंत्रालय द्वारा शरीर के शुद्धीकरण (षट्कर्म) की एक प्रमुख तकनीक के रूप में मान्यता दी गई है। मंत्रालय के अनुसार, इसके तीन विशिष्ट प्रकार — वातक्रम, व्युत्क्रम और शीतक्रम — कफ दोषों को दूर करने, श्वसन तंत्र को स्वस्थ रखने और मधुमेह व मोटापे को नियंत्रित करने में सहायक माने जाते हैं। यह क्रिया केवल प्राणायाम नहीं, बल्कि एक समग्र शुद्धिकरण पद्धति है।

वातक्रम कपालभाति: सबसे प्रचलित और मूल रूप

वातक्रम कपालभाति इस श्रृंखला का सर्वाधिक प्रचलित प्रकार है, जिसका अभ्यास सामान्यतः प्राणायाम की भाँति किया जाता है। इसमें सांस को तेज़ गति से बाहर छोड़ा जाता है, जिससे फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है।

आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह क्रिया सर्दी, राइनाइटिस, साइनोसाइटिस और अस्थमा जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में उपयोगी है। नाभि के सक्रिय संकुचन से जठराग्नि प्रदीप्त होती है, जिससे पाचन में सुधार होता है और मोटापा व मधुमेह (डायबिटीज) को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।

इसके नियमित अभ्यास से तंत्रिका तंत्र मज़बूत होता है, मानसिक स्पष्टता आती है और डिफ़ॉल्ट मोड नेटवर्क को नियंत्रित करने में भी सहायता मिलती है।

व्युत्क्रम कपालभाति: जल-आधारित शोधन क्रिया

व्युत्क्रम कपालभाति एक जल-आधारित शुद्धीकरण क्रिया है। इसमें गुनगुने नमकयुक्त जल को नासिका-छिद्रों से अंदर खींचकर मुँह के रास्ते बाहर निकाला जाता है।

यह प्रक्रिया साइनस की समस्याओं — विशेष रूप से सामान्य सर्दी-जुकाम, साइनोसाइटिस और राइनाइटिस — में उल्लेखनीय राहत प्रदान करती है। गौरतलब है कि यह क्रिया खोपड़ी के अग्र भाग को उत्तेजित करती है, जिससे मानसिक स्पष्टता बढ़ती है और चेहरे पर प्राकृतिक चमक (भाति) आती है।

शीतक्रम कपालभाति: कफ दोष नाश की विपरीत क्रिया

शीतक्रम कपालभाति व्युत्क्रम के ठीक विपरीत है। इसमें गुनगुना पानी मुँह में लेकर नासिका-छिद्रों के रास्ते बाहर निकाला जाता है।

आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह क्रिया सिर और श्वसन तंत्र से संबंधित सभी प्रकार के कफ दोषों को दूर करने में विशेष रूप से प्रभावी है। योगिक मान्यताओं के अनुसार, इसके नियमित अभ्यास से चेहरे की झुर्रियाँ कम होती हैं और त्वचा में प्राकृतिक चमक आती है। साथ ही, यह नाक के मार्ग को साफ़ करती है और वायुमार्ग में फँसे अतिरिक्त बलगम को बाहर निकालती है।

आयुष मंत्रालय की समग्र अनुशंसा

आयुष मंत्रालय के अनुसार, कपालभाति मुख्य रूप से कपाल और ऊपरी श्वसन तंत्र के शोधन के लिए एक श्रेष्ठ तकनीक है। यह शरीर से 20 प्रकार के कफ दोषों का नाश करती है, फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ाती है और मधुमेह एवं मोटापे से ग्रस्त लोगों के लिए अत्यंत लाभकारी मानी जाती है।

यह ऐसे समय में प्रासंगिक है जब भारत में मधुमेह और श्वसन रोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है और जीवनशैली-आधारित उपचारों की माँग तेज़ हो रही है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि इन क्रियाओं को किसी प्रशिक्षित योग गुरु के मार्गदर्शन में ही प्रारंभ करना चाहिए।

संपादकीय दृष्टिकोण

व्युत्क्रम और शीतक्रम के लाभ योगिक परंपरा में स्थापित हैं, फिर भी इनमें से अधिकांश दावों को आधुनिक यादृच्छिक नियंत्रित परीक्षणों (RCT) की कसौटी पर अभी पूरी तरह परखा नहीं गया है। भारत में डायबिटीज और श्वसन रोगों का बोझ बढ़ते वक्त ऐसी सरल, सस्ती पद्धतियों को प्रोत्साहित करना सराहनीय है; असली ज़रूरत यह है कि इनके साथ प्रशिक्षित मार्गदर्शन और contraindications की स्पष्ट चेतावनी भी उतनी ही मुखरता से दी जाए।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कपालभाति के तीन प्रकार कौन-से हैं?
आयुष मंत्रालय के अनुसार कपालभाति के तीन प्रकार हैं — वातक्रम, व्युत्क्रम और शीतक्रम। तीनों की विधि और उद्देश्य अलग-अलग हैं; वातक्रम सांस-आधारित है, जबकि व्युत्क्रम और शीतक्रम जल-आधारित शुद्धीकरण क्रियाएँ हैं।
कपालभाति से डायबिटीज में कैसे फायदा होता है?
वातक्रम कपालभाति में नाभि के सक्रिय संकुचन से जठराग्नि प्रदीप्त होती है, जिससे पाचन में सुधार होता है और मधुमेह (डायबिटीज) को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। आयुष मंत्रालय ने इसे मोटापे और मधुमेह से ग्रस्त लोगों के लिए लाभकारी बताया है।
व्युत्क्रम कपालभाति कैसे की जाती है?
व्युत्क्रम कपालभाति में गुनगुने नमकयुक्त जल को नासिका-छिद्रों से अंदर खींचकर मुँह के रास्ते बाहर निकाला जाता है। यह एक जल-आधारित शुद्धीकरण क्रिया है, जो साइनोसाइटिस, राइनाइटिस और सामान्य सर्दी-जुकाम में राहत देती है।
शीतक्रम और व्युत्क्रम कपालभाति में क्या अंतर है?
शीतक्रम कपालभाति व्युत्क्रम की विपरीत क्रिया है — इसमें गुनगुना पानी मुँह से लेकर नासिका-छिद्रों के रास्ते बाहर निकाला जाता है। यह कफ दोषों के नाश और त्वचा की प्राकृतिक चमक के लिए विशेष रूप से प्रभावी मानी जाती है।
क्या कपालभाति सभी के लिए सुरक्षित है?
आयुष मंत्रालय ने कपालभाति को श्वसन और पाचन स्वास्थ्य के लिए लाभकारी बताया है, परंतु विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इसे किसी प्रशिक्षित योग गुरु के मार्गदर्शन में ही प्रारंभ करना चाहिए। उच्च रक्तचाप, हृदय रोग या गर्भावस्था की स्थिति में चिकित्सक से परामर्श आवश्यक है।
राष्ट्र प्रेस
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