कर्नाटक में टैटू पर नियामक ढाँचे की तैयारी, स्वास्थ्य जोखिमों पर केंद्र को भेजी रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग ने 12 अगस्त 2026 को पुष्टि की कि राज्य सरकार टैटू बनवाने से जुड़े संभावित स्वास्थ्य जोखिमों को देखते हुए इस उद्योग को विनियमित करने के लिए नई गाइडलाइंस और कानूनी ढाँचे पर सक्रिय रूप से विचार कर रही है। विभाग ने केंद्र सरकार को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपकर देशव्यापी नियमन की माँग की है।
मुख्य घटनाक्रम
खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग के कमिश्नर के. श्रीनिवास ने बुधवार को बताया कि विभाग ने उपलब्ध अध्ययनों का गहन विश्लेषण कर केंद्र सरकार को एक रिपोर्ट सौंपी है। उन्होंने कहा, 'टैटू में इस्तेमाल होने वाले केमिकल कई तरह की बीमारियों का कारण बन सकते हैं। हमने एक कमेटी बनाई है और केंद्र सरकार को पत्र लिखा है। इस रिपोर्ट के आधार पर टैटू बनवाने के लिए नियम बनाने की जरूरत है।'
श्रीनिवास ने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ टैटू स्याही में मौजूद रसायन और धातुएँ टैटू बनवाने की प्रक्रिया के दौरान रक्तप्रवाह में मिल सकती हैं। उनके अनुसार, 'जब केमिकल और धातुएँ खून में मिल जाती हैं तो समय के साथ रक्त पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है, जिससे गंभीर बीमारियाँ हो सकती हैं।'
स्वास्थ्य जोखिम और चिंताएँ
अधिकारियों के अनुसार, यदि उचित स्वच्छता और सुरक्षा मानकों का पालन न किया जाए तो टैटू बनवाने से हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी और अन्य गंभीर संक्रामक रोगों के फैलने का खतरा बना रहता है। टैटू स्याही में पाए जाने वाले रसायनों और धातुओं को लेकर विशेष चिंता जताई गई है। गौरतलब है कि अभी तक देश में टैटू बनवाने और इसकी स्याही से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों को नियंत्रित करने के लिए कोई विशेष राष्ट्रीय कानून मौजूद नहीं है।
प्रस्तावित नियामक ढाँचा
कर्नाटक सरकार की योजना के अनुसार, प्रस्तावित गाइडलाइंस में टैटू स्टूडियो में स्याही की गुणवत्ता और संरचना, स्वच्छता के मानक, उपकरणों की नसबंदी (स्टेरलाइज़ेशन) और सुरक्षा प्रक्रियाओं को शामिल किए जाने की उम्मीद है। विभाग एक विशेषज्ञ समिति गठित करने की प्रक्रिया में भी है, जो टैटू स्याही की संरचना, सुरक्षा मानकों और टैटू कलाकारों की कार्यप्रणाली का अध्ययन कर आवश्यक सिफारिशें देगी।
केंद्र से राष्ट्रीय नियमन की माँग
कर्नाटक सरकार ने केंद्र से आग्रह किया है कि टैटू बनवाने से संबंधित नियमों को पूरे देश में एकसमान रूप से लागू किया जाए, क्योंकि यह विषय जन-स्वास्थ्य और उपभोक्ता सुरक्षा दोनों से जुड़ा है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत में टैटू उद्योग तेज़ी से बढ़ रहा है और लाखों युवा हर वर्ष टैटू बनवाते हैं, परंतु इस क्षेत्र में कोई केंद्रीय नियामक व्यवस्था नहीं है।
आगे की राह
विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर राज्य सरकार नए नियम और संभवतः नया कानून लाने पर विचार करेगी। प्रस्तावित नियामक ढाँचे का उद्देश्य टैटू बनाने की प्रक्रिया को सुरक्षित बनाना और स्याही में हानिकारक रसायनों व धातुओं के उपयोग से उत्पन्न जोखिमों को कम करना है। केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया और विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट ही इस दिशा में अगले कदम तय करेगी।