क्या साधारण कमर दर्द स्लिप डिस्क का संकेत हो सकता है? जानें इसके उपचार
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 17 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। वर्तमान जीवनशैली में कमर दर्द एक सामान्य समस्या बन चुकी है, क्योंकि अधिकांश कार्य कुर्सी पर घंटों बैठकर किए जाते हैं।
इस स्थिति में पीठ और मांसपेशियों में दर्द और जकड़न महसूस होती है, लेकिन यह ध्यान रखना आवश्यक है कि हर दर्द सामान्य कमर दर्द नहीं होता; यह स्लिप डिस्क की शुरुआत भी हो सकती है। स्लिप डिस्क एक ऐसी समस्या है जिसमें व्यक्ति न ठीक से बैठ सकता है न ही लंबे समय तक खड़ा रह सकता है।
आयुर्वेद में स्लिप डिस्क को अस्थि मज्जा विकार कहा जाता है। डिस्क रीढ़ की हड्डियों के बीच होती है और यह हड्डी की तुलना में नरम होती है, जिसका कार्य रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाना और शरीर को झटकों से बचाना होता है। जब यह डिस्क अपने स्थान से खिसकती है, तो ऊपरी हिस्सों की नसों पर दबाव पड़ता है, जिससे पीठ दर्द की समस्या उत्पन्न हो जाती है। यह दर्द पीठ से लेकर पैरों तक फैल सकता है, जिससे व्यक्ति को कमर पकड़कर झुककर चलना पड़ता है।
स्लिप डिस्क के कई कारण हो सकते हैं, जैसे लंबे समय तक बैठे रहना, अधिक वजन उठाना, हमेशा झुककर काम करना, मोटापा, एक ही पोजीशन में वाहन चलाना, झटके लगना और चोट लगना। प्रारंभिक स्तर पर कुछ बदलाव करके दर्द में राहत पाई जा सकती है, लेकिन यदि दर्द अधिक हो जाए तो सर्जरी और फिजियोथेरेपी की सलाह डॉक्टर देते हैं।
स्लिप डिस्क से बचने और दर्द को नियंत्रित करने के लिए कुर्सी पर बैठते समय नरम कुशन का उपयोग करें और बीच-बीच में चलने-फिरने की आदत डालें। लगातार कुर्सी पर बैठने से बचें। इसके अलावा, गर्म पानी से सिकाई और दर्द वाले हिस्से पर तिल के तेल से मालिश करें, जिससे रीढ़ की हड्डी के चारों ओर रक्त का संचार बेहतर हो और दर्द में राहत मिले।
कुछ आसन भी रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाने में मदद कर सकते हैं। इसमें कैट-काउ, चाइल्ड्स पोज, कोबरा पोज, ब्रिज पोज और मरकटासन शामिल हैं। ये आसन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाने में सहायक होते हैं। अधिक दर्द होने पर डॉक्टर से सलाह और दवा लेना न भूलें।