लेटेंट टीबी: लक्षण, बचाव और गंभीरता को समझें
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, २४ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। टीबी एक गंभीर संक्रामक बीमारी है, जो बैक्टीरिया माइकोबैक्टेरियम ट्यूबरकुलोसिस के कारण होती है। यह मुख्यतः फेफड़ों को प्रभावित करती है, लेकिन दिमाग, हड्डी, किडनी और अन्य अंगों को भी नुकसान पहुंचा सकती है।
यह बीमारी हवा के माध्यम से फैलती है। यदि समय पर उपचार न किया जाए, तो टीबी बेहद खतरनाक हो सकती है और जानलेवा भी हो सकती है। लेकिन टीबी की एक स्थिति होती है, जिसे लेटेंट टीबी कहते हैं, जिसमें टीबी के बैक्टीरिया शरीर में होते हैं, लेकिन वे निष्क्रिय होते हैं।
हर वर्ष २४ मार्च को विश्व टीबी दिवस मनाया जाता है। इसी अवसर पर ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद लेटेंट टीबी के प्रति जागरूकता फैलाता है। इस स्थिति में व्यक्ति में कोई लक्षण नहीं दिखते हैं, न ही वह बीमार महसूस करता है, और न ही संक्रमण फैलाता है।
आयुर्वेद इंस्टीट्यूट के अनुसार, लेटेंट टीबी को सक्रिय टीबी से अलग समझना आवश्यक है। इसमें संक्रमित व्यक्ति टीबी का वाहक बना रहता है, लेकिन रोग नहीं फैलाता। हालांकि, यदि समय पर ध्यान न दिया जाए, तो यह निष्क्रिय संक्रमण किसी भी समय सक्रिय टीबी में बदल सकता है, जो खांसी, बुखार, वजन घटना, रात में पसीना आना और थकान जैसे लक्षण पैदा करता है।
लेटेंट टीबी आमतौर पर उन व्यक्तियों में पाई जाती है जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर होता है, जैसे एचआईवी संक्रमित, डायबिटीज के मरीज, कैंसर रोगी, या जो लंबे समय से स्टेरॉयड की दवाएं ले रहे हैं। छोटे बच्चे और बुजुर्ग भी इससे अधिक प्रभावित होते हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, पूरी दुनिया में बड़ी आबादी लेटेंट टीबी से संक्रमित है। भारत जैसे देशों में यह संख्या और भी अधिक है। विशेषज्ञों का कहना है कि लेटेंट टीबी का पता लगाना और समय पर इलाज करना बहुत जरूरी है। इसे आसानी से ब्लड टेस्ट या ट्यूबरकुलिन स्किन टेस्ट से पहचाना जा सकता है। यदि रिपोर्ट पॉजिटिव आती है, तो डॉक्टर सामान्यतः ३ से ९ महीने तक की दवा देते हैं, जिससे संक्रमण को सक्रिय होने से रोका जा सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि परिवार में किसी को लंबी खांसी, बुखार या वजन घटाने की समस्या है, तो तुरंत जांच कराएं। लेटेंट टीबी को नजरअंदाज करने पर यह सक्रिय टीबी में बदल सकती है, जो न केवल व्यक्ति के लिए, बल्कि पूरे परिवार और समाज के लिए एक बड़ा खतरा बन सकती है।