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मारीच्यासन के नियमित अभ्यास से रीढ़ लचीली, हार्मोन संतुलित और पाचन दुरुस्त — आयुष मंत्रालय की गाइडलाइन

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मारीच्यासन के नियमित अभ्यास से रीढ़ लचीली, हार्मोन संतुलित और पाचन दुरुस्त — आयुष मंत्रालय की गाइडलाइन

सारांश

मारीच्यासन महज़ एक ट्विस्टिंग आसन नहीं — यह रीढ़, हार्मोन और पाचन तंत्र तीनों को एक साथ साधने का प्राचीन योग विज्ञान है। आयुष मंत्रालय की गाइडलाइन ने इसे मधुमेह प्रबंधन में भी कारगर माना है। जानिए सही विधि, लाभ और किन्हें सावधानी बरतनी चाहिए।

मुख्य बातें

मारीच्यासन एक बैठकर किया जाने वाला ट्विस्टिंग योगासन है जो रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है।
आयुष मंत्रालय ने इसे मधुमेह प्रबंधन , पाचन सुधार और हार्मोन संतुलन के लिए उपयोगी बताया है।
यह आसन अधिवृक्क (एड्रिनल) ग्रंथियों और अग्न्याशय (पैंक्रियास) को सक्रिय कर हार्मोन स्राव बेहतर करता है।
श्रोणि (पेल्विक) क्षेत्र में रक्त संचार बढ़ने से प्रजनन तंत्र की कार्यप्रणाली में सुधार होता है।
गर्भवती महिलाओं , पेट की हालिया सर्जरी करा चुके और गंभीर पीठ दर्द से पीड़ित लोगों को चिकित्सक की सलाह के बाद ही अभ्यास करना चाहिए।
योग के साथ संतुलित आहार अपनाना भी उतना ही आवश्यक है।

मारीच्यासन — एक बैठकर किया जाने वाला ट्विस्टिंग योगासन — रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाने, पाचन तंत्र को सक्रिय करने और हार्मोन संतुलन में सुधार करने में सहायक माना जाता है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने इस आसन को लेकर दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिनमें इसे मधुमेह प्रबंधन और समग्र शारीरिक स्वास्थ्य के लिए उपयोगी बताया गया है। योग विशेषज्ञों के अनुसार, इस आसन का नियमित अभ्यास शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करने में प्रभावी भूमिका निभाता है।

मारीच्यासन का नाम और उत्पत्ति

यह आसन संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर बना है — 'मारीचि' और 'आसन'। 'मारीचि' ब्रह्माजी के मानस पुत्र और सूर्य वंश के प्रणेता महर्षि मारीचि का नाम है, जबकि 'आसन' का अर्थ है स्थिति या मुद्रा। इस प्रकार यह आसन प्राचीन ऋषि परंपरा से जुड़ा है और इसका अभ्यास सदियों से योग साधना का हिस्सा रहा है।

शरीर पर मुख्य लाभ

आयुष मंत्रालय की गाइडलाइन के अनुसार, मारीच्यासन के नियमित अभ्यास से शरीर के कई अंगों को लाभ मिलता है। यह आसन अधिवृक्क (एड्रिनल) ग्रंथियों और अग्न्याशय (पैंक्रियास) को सक्रिय करता है, जिससे हार्मोन का स्राव बेहतर होता है। रिब-केज खुलने से श्वसन क्षमता में भी उल्लेखनीय सुधार देखा जाता है।

इसके अतिरिक्त, यह आसन प्रजनन तंत्र की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाता है। श्रोणि (पेल्विक) क्षेत्र में रक्त संचार बढ़ता है और पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं। पेट के अंगों की प्राकृतिक मालिश होने से पाचन तंत्र सक्रिय रहता है। नियमित अभ्यास से तनाव कम होता है और शरीर में ऊर्जा तथा स्फूर्ति का अनुभव होता है।

मारीच्यासन करने की सही विधि

इस आसन का अभ्यास निम्न चरणों में किया जा सकता है:

सबसे पहले योगा मैट पर दंडासन की मुद्रा में सीधे बैठ जाएँ। इसके बाद दाहिना घुटना मोड़ें और बाएँ हाथ को दाहिनी जाँघ के बाहर रखें। सांस छोड़ते हुए दाईं ओर मुड़ें और पीछे की तरफ देखें। संभव हो तो दोनों हाथों को पीठ के पीछे आपस में पकड़ें। 5 से 10 गहरी साँसें लें और फिर यही क्रिया दूसरी तरफ दोहराएँ। शुरुआत में आसन को धीरे-धीरे और योग प्रशिक्षक की देखरेख में करें; जल्दबाज़ी से बचें।

किन्हें सावधानी बरतनी चाहिए

योग विशेषज्ञों और चिकित्सकों की सलाह है कि गंभीर पीठ दर्द या चोट से पीड़ित व्यक्तियों, पेट की हालिया सर्जरी करा चुके लोगों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर बीमारी से ग्रसित लोगों को इस आसन का अभ्यास करने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श अवश्य लेना चाहिए। बिना मार्गदर्शन के किया गया अभ्यास लाभ के बजाय हानिकारक हो सकता है।

योग के साथ संतुलित आहार भी ज़रूरी

मारीच्यासन के अभ्यास से शरीर को अनेक लाभ मिलते हैं, परंतु विशेषज्ञ इस बात पर ज़ोर देते हैं कि योग के साथ-साथ संतुलित आहार ग्रहण करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। सही खान-पान पाचन को दुरुस्त रखता है, मन को शांत करता है और शारीरिक-मानसिक शुद्धि में सहायक होता है। आयुष मंत्रालय की गाइडलाइन भी योग को समग्र जीवनशैली के एक अंग के रूप में अपनाने की सिफारिश करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

मधुमेह प्रबंधन जैसे दावों के लिए नियंत्रित नैदानिक साक्ष्य अभी भी सीमित हैं और इन्हें 'सहायक' की श्रेणी में ही रखा जाना चाहिए, न कि चिकित्सकीय उपचार के विकल्प के रूप में। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस अंतर को नज़रअंदाज़ कर देती है। जनता के लिए यह ज़रूरी है कि योग के लाभों को प्रमाणिक रूप से अपनाएँ, लेकिन चिकित्सकीय सलाह को कभी न छोड़ें।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मारीच्यासन क्या है और इसका नाम कहाँ से आया?
मारीच्यासन एक बैठकर किया जाने वाला ट्विस्टिंग योगासन है। इसका नाम संस्कृत के 'मारीचि' (ब्रह्माजी के मानस पुत्र महर्षि मारीचि) और 'आसन' (मुद्रा) शब्दों से मिलकर बना है।
मारीच्यासन के नियमित अभ्यास से क्या-क्या फायदे होते हैं?
इस आसन के नियमित अभ्यास से रीढ़ की हड्डी लचीली होती है, पाचन तंत्र सक्रिय होता है और अधिवृक्क ग्रंथियों व अग्न्याशय के सक्रिय होने से हार्मोन संतुलन बेहतर होता है। इसके अलावा पेल्विक क्षेत्र में रक्त संचार बढ़ता है और तनाव कम होता है।
मारीच्यासन मधुमेह में कैसे सहायक है?
आयुष मंत्रालय की गाइडलाइन के अनुसार, यह आसन अग्न्याशय (पैंक्रियास) को सक्रिय करता है जो इंसुलिन स्राव से जुड़ा है, जिससे मधुमेह प्रबंधन में सहायता मिल सकती है। हालाँकि, इसे चिकित्सकीय उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए और मधुमेह रोगियों को डॉक्टर की सलाह ज़रूर लेनी चाहिए।
मारीच्यासन किन्हें नहीं करना चाहिए?
गंभीर पीठ दर्द या चोट से पीड़ित, पेट की हालिया सर्जरी करा चुके, गर्भवती महिलाएँ और गंभीर बीमारी से ग्रसित लोगों को इस आसन का अभ्यास करने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श लेना अनिवार्य है।
मारीच्यासन सही तरीके से कैसे करें?
योगा मैट पर दंडासन में बैठें, दाहिना घुटना मोड़ें, बाएँ हाथ को दाहिनी जाँघ के बाहर रखें और साँस छोड़ते हुए दाईं ओर मुड़ें। 5 से 10 गहरी साँसें लें और दूसरी तरफ दोहराएँ। शुरुआत में योग प्रशिक्षक की देखरेख में और धीरे-धीरे अभ्यास करें।
राष्ट्र प्रेस
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