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अर्ध मत्स्येन्द्रासन: मधुमेह, कब्ज और तनाव में राहत देने वाला हठ योग का यह आसन कैसे करें

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अर्ध मत्स्येन्द्रासन: मधुमेह, कब्ज और तनाव में राहत देने वाला हठ योग का यह आसन कैसे करें

सारांश

हठ योग का 'अर्ध मत्स्येन्द्रासन' सिर्फ एक आसन नहीं — यह मधुमेह, कब्ज और दमा जैसी तीन बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों का एक समग्र उत्तर है। आयुष मंत्रालय के दिशानिर्देशों में शामिल यह आसन पैनक्रियाज को सक्रिय करता है और रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है।

मुख्य बातें

अर्ध मत्स्येन्द्रासन हठ योग की प्राचीन परंपरा का आसन है, जिसे आयुष मंत्रालय ने अनुशंसित किया है।
यह आसन एड्रिनल ग्रंथि की कार्यप्रणाली सुधारता है और पैनक्रियाज को सक्रिय करता है।
मधुमेह , कब्ज और दमा के रोगियों के लिए विशेष रूप से लाभकारी बताया गया है।
प्रत्येक ओर 30 सेकंड तक अभ्यास करें; सूर्योदय या सूर्यास्त का समय सर्वोत्तम है।
आसन करने से पहले कुशल योग प्रशिक्षक से परामर्श अनिवार्य है।

अर्ध मत्स्येन्द्रासन हठ योग की प्राचीन परंपरा का एक महत्वपूर्ण आसन है, जो रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाने, पाचन तंत्र को सुदृढ़ करने और शरीर की मांसपेशियों को सक्रिय रखने में सहायक माना जाता है। आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के अनुसार, इस आसन का नियमित अभ्यास मधुमेह, कब्ज और दमा जैसी स्थितियों में लाभकारी हो सकता है।

अर्ध मत्स्येन्द्रासन क्या है और इसका महत्व

यह आसन हठ योग की सुदृढ़ परंपरा से आता है और शरीर, मन तथा आत्मा के संतुलित विकास के लिए योग शास्त्र में इसका विशेष उल्लेख मिलता है। आयुष मंत्रालय ने अपने दिशानिर्देशों में स्पष्ट किया है कि इस आसन के नियमित अभ्यास से एड्रिनल ग्रंथि की कार्यप्रणाली में सुधार होता है। यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक हो जाता है जब भारत में मधुमेह रोगियों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है।

स्वास्थ्य लाभ

आयुष मंत्रालय के अनुसार, अर्ध मत्स्येन्द्रासन के प्रमुख स्वास्थ्य लाभ इस प्रकार हैं:

पाचन तंत्र: यह आसन कब्ज और पाचन संबंधी समस्याओं से राहत दिलाने में सहायक बताया जाता है। मधुमेह: पैनक्रियाज को सक्रिय करने में मदद करता है, जिससे इंसुलिन उत्पादन बेहतर हो सकता है। श्वसन: दमा के रोगियों के लिए भी यह लाभकारी माना जाता है। इसके अतिरिक्त, यह आसन मांसपेशियों को लचीला बनाता है, रक्त संचार बेहतर करता है और शरीर को डिटॉक्स करने में सहायता करता है।

आसन करने की विधि

इस आसन को सही तरीके से करने के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन करें:

सबसे पहले योगा मैट बिछाएँ और दंडासन की मुद्रा में बैठ जाएँ। रीढ़ को सीधा रखते हुए दाएं पैर के घुटने को मोड़कर बाहर की ओर निकालें। बाएं पैर का तल जमीन पर पूरी तरह टिका होना चाहिए। अब सिर को दाईं ओर घुमाएँ और कंधे की दिशा में देखें। इस दौरान सामान्य और गहरी साँस लेते रहें। इस मुद्रा को लगभग 30 सेकंड तक बनाए रखने के बाद सामान्य स्थिति में लौट आएँ। ध्यान रखें कि अभ्यास के दौरान ध्यान रीढ़ की हड्डी और साँस पर केंद्रित रहे।

सावधानियाँ और विशेषज्ञ परामर्श

शुरुआती अभ्यासियों को अत्यधिक ज़ोर लगाने से बचना चाहिए और अभ्यास की अवधि धीरे-धीरे बढ़ानी चाहिए। योग विशेषज्ञों के अनुसार, यह आसन सूर्योदय या सूर्यास्त के समय करना सर्वोत्तम रहता है। दोपहर में, विशेषकर जब गर्मी चरम पर हो, इस आसन से बचना चाहिए। किसी भी नई योग दिनचर्या शुरू करने से पहले कुशल योग प्रशिक्षक से परामर्श लेना अनिवार्य है।

किसे विशेष सावधानी बरतनी चाहिए

गर्भवती महिलाओं, पीठ या रीढ़ की गंभीर समस्या से पीड़ित व्यक्तियों और हाल ही में पेट की सर्जरी करवाने वाले लोगों को यह आसन करने से पहले अपने चिकित्सक और योग विशेषज्ञ दोनों से सलाह अवश्य लेनी चाहिए। नियमित और सही अभ्यास से यह आसन दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभ प्रदान कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि अर्ध मत्स्येन्द्रासन जैसे आसन पूरक उपाय हैं, न कि चिकित्सीय उपचार के विकल्प। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर यह बताना भूल जाती है कि इन लाभों के दावे बड़े पैमाने पर नैदानिक परीक्षणों की बजाय पारंपरिक ज्ञान पर आधारित हैं। जब तक इन्हें आधुनिक शोध से प्रमाणित नहीं किया जाता, जनता को 'लाभकारी' और 'उपचारात्मक' के बीच का अंतर स्पष्ट रूप से बताना ज़रूरी है।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अर्ध मत्स्येन्द्रासन क्या है और यह किस योग परंपरा से आता है?
अर्ध मत्स्येन्द्रासन हठ योग की प्राचीन परंपरा का एक प्रमुख बैठकर किया जाने वाला मोड़ आसन है। यह रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाने और पाचन तंत्र को सुदृढ़ करने के लिए जाना जाता है।
अर्ध मत्स्येन्द्रासन मधुमेह रोगियों के लिए कैसे फायदेमंद है?
आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह आसन पैनक्रियाज को सक्रिय करता है, जो इंसुलिन उत्पादन में सहायक हो सकता है। मधुमेह रोगियों को इसे अपने चिकित्सक की सलाह के साथ अपनी दिनचर्या में शामिल करना चाहिए।
अर्ध मत्स्येन्द्रासन करने का सही समय कौन सा है?
योग विशेषज्ञों के अनुसार यह आसन सूर्योदय या सूर्यास्त के समय करना सर्वोत्तम रहता है। दोपहर में, विशेषकर गर्मी के चरम पर, इस आसन से बचना चाहिए।
क्या अर्ध मत्स्येन्द्रासन कब्ज और दमा में भी सहायक है?
आयुष मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अनुसार, इस आसन का नियमित अभ्यास कब्ज, पाचन संबंधी समस्याओं और दमा में राहत दिलाने में सहायक बताया गया है। हालाँकि, गंभीर स्थितियों में चिकित्सीय परामर्श अनिवार्य है।
अर्ध मत्स्येन्द्रासन करते समय किन सावधानियों का पालन करना चाहिए?
शुरुआती अभ्यासियों को अत्यधिक जोर लगाने से बचना चाहिए और अभ्यास की अवधि धीरे-धीरे बढ़ानी चाहिए। रीढ़ या पीठ की गंभीर समस्या, हाल की पेट की सर्जरी या गर्भावस्था की स्थिति में यह आसन करने से पहले योग विशेषज्ञ और चिकित्सक दोनों से परामर्श लेना आवश्यक है।
राष्ट्र प्रेस
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