9 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सुप्त मत्स्येंद्रासन: पीठ की अकड़न और कब्ज दूर करने का सबसे असरदार योगासन

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सुप्त मत्स्येंद्रासन: पीठ की अकड़न और कब्ज दूर करने का सबसे असरदार योगासन

सारांश

घंटों बैठकर काम करने वालों के लिए सुप्त मत्स्येंद्रासन एक सरल लेकिन असरदार उपाय है। आयुष मंत्रालय द्वारा अनुशंसित यह आसन बिना किसी बल के रीढ़ को घुमाता है, पाचन सुधारता है और मन को शांत करता है — बशर्ते इसे सही तरीके से किया जाए।

मुख्य बातें

सुप्त मत्स्येंद्रासन को आयुष मंत्रालय ने रीढ़ के लचीलेपन, पीठ दर्द और पाचन सुधार के लिए उत्कृष्ट अभ्यास माना है।
यह आसन संस्कृत के तीन शब्दों — सुप्त (लेटना), मत्स्येंद्र (पौराणिक योगी) और आसन (मुद्रा) — से बना है।
इसे अंग्रेज़ी में 'सुपाइन स्पाइनल ट्विस्ट' या 'रिक्लाइंड ट्विस्ट' कहा जाता है।
नियमित अभ्यास से पैरासिम्पेथेटिक तंत्रिका तंत्र सक्रिय होता है, जिससे तनाव घटता है और पाचन बेहतर होता है।
रीढ़, कूल्हे, घुटने या कंधों में हाल की चोट या सर्जरी की स्थिति में यह आसन नहीं करना चाहिए।
पहली बार अभ्यास करने वालों को प्रमाणित योग शिक्षक की देखरेख में शुरुआत करनी चाहिए।

आयुष मंत्रालय द्वारा अनुशंसित सुप्त मत्स्येंद्रासन उन लोगों के लिए विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है जो पीठ की अकड़न, कमर दर्द और कब्ज जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। नई दिल्ली में स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, दफ्तरों में घंटों बैठकर काम करने और शारीरिक गतिविधि में कमी के कारण ये समस्याएँ आज शहरी आबादी में तेज़ी से बढ़ रही हैं। केंद्र सरकार के आयुष मंत्रालय ने इस आसन को रीढ़ की हड्डी के लचीलेपन, पीठ दर्द से राहत और पाचन तंत्र को बेहतर बनाने के लिए एक उत्कृष्ट अभ्यास के रूप में मान्यता दी है।

सुप्त मत्स्येंद्रासन क्या है और इसका अर्थ

सुप्त मत्स्येंद्रासन संस्कृत के तीन शब्दों से मिलकर बना है — सुप्त (लेटना), मत्स्येंद्र (पौराणिक योगी मत्स्येंद्रनाथ) और आसन (मुद्रा)। अंग्रेज़ी में इसे 'सुपाइन स्पाइनल ट्विस्ट' या 'रिक्लाइंड ट्विस्ट' कहा जाता है।

यह आसन अर्ध मत्स्येंद्रासन का लेटा हुआ और पुनर्स्थापनात्मक रूप है। इसमें बिना किसी बाहरी बल के, गुरुत्वाकर्षण की सहायता से रीढ़ की हड्डी को धीरे-धीरे घुमाया जाता है, जिससे यह उन लोगों के लिए भी उपयुक्त है जो बैठकर किए जाने वाले कठिन आसन नहीं कर सकते।

आसन करने का तरीका

इस आसन में अभ्यासकर्ता पीठ के बल लेटता है और एक घुटने को शरीर के आर-पार मोड़ता है, जबकि उसी दिशा का हाथ बाहर की ओर फैला रहता है। इस स्थिति में रीढ़ की हड्डी कमर से गर्दन तक धीरे-धीरे घूमती है।

यह मुद्रा निष्क्रिय होती है, यानी इसमें मांसपेशियों पर ज़ोर देने की ज़रूरत नहीं पड़ती। यही कारण है कि यह योग की हठ योग और पारंपरिक योग दोनों परंपराओं में सबसे अधिक चिकित्सकीय रूप से उपयोगी आसनों में गिना जाता है।

स्वास्थ्य लाभ और वैज्ञानिक आधार

नियमित अभ्यास से रीढ़ की हड्डी की गतिशीलता बढ़ती है और कूल्हों का तनाव कम होता है। इसके अतिरिक्त, यह पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है क्योंकि रीढ़ का घुमाव आंतरिक अंगों की मालिश का काम करता है, जिससे कब्ज जैसी समस्याओं में राहत मिल सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस आसन से पैरासिम्पेथेटिक तंत्रिका तंत्र सक्रिय होता है — जो शरीर की 'आराम और पाचन' प्रणाली है। इससे तनाव कम होता है और मन को शांति मिलती है। यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक है जब शहरी जीवनशैली से जुड़ा तनाव और बैठे रहने की आदत स्वास्थ्य समस्याओं की एक बड़ी वजह बन चुकी है।

सावधानियाँ और किसे नहीं करना चाहिए

यदि आप पहली बार योगाभ्यास शुरू कर रहे हैं या किसी चिकित्सीय स्थिति से गुज़र रहे हैं, तो इस आसन को हमेशा किसी प्रमाणित योग शिक्षक की देखरेख में ही आरंभ करें। रीढ़ की हड्डी, कूल्हे, घुटने या कंधों में हाल ही में कोई चोट लगी हो अथवा सर्जरी हुई हो, तो इस आसन से परहेज़ करना उचित है।

योग विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि इस आसन को खाली पेट या भोजन के कम से कम तीन से चार घंटे बाद करना अधिक लाभकारी होता है। सुबह के समय इसका अभ्यास विशेष रूप से प्रभावी माना जाता है।

आगे क्या करें

स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सुप्त मत्स्येंद्रासन को सही खानपान और नियमित दिनचर्या के साथ अपनाने पर इसके परिणाम अधिक स्थायी होते हैं। आयुष मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अनुसार, इस आसन को अन्य पुनर्स्थापनात्मक आसनों के साथ मिलाकर एक संतुलित योग क्रम बनाया जा सकता है, जो समग्र स्वास्थ्य के लिए दीर्घकालिक लाभ प्रदान करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान देने योग्य है कि अधिकांश मीडिया कवरेज इस आसन के लाभों को सामान्यीकृत तरीके से पेश करती है, जबकि इसकी सीमाओं और व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थितियों पर ध्यान कम दिया जाता है। शहरीकरण और गतिहीन जीवनशैली के कारण पीठ दर्द एक सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है, और योग एक सुलभ समाधान है — परंतु बिना प्रशिक्षित मार्गदर्शन के स्व-अभ्यास जोखिम भरा हो सकता है। असली ज़रूरत यह है कि सरकार योग शिक्षा को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा से जोड़े, न कि इसे केवल जागरूकता अभियानों तक सीमित रखे।
RashtraPress
9 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्त मत्स्येंद्रासन क्या है और यह कैसे काम करता है?
सुप्त मत्स्येंद्रासन एक लेटकर किया जाने वाला योगासन है जिसमें एक घुटने को शरीर के आर-पार मोड़ा जाता है और रीढ़ को धीरे-धीरे घुमाया जाता है। यह गुरुत्वाकर्षण की सहायता से बिना बल लगाए रीढ़ में खिंचाव देता है, जिससे अकड़न और तनाव कम होता है।
क्या सुप्त मत्स्येंद्रासन कब्ज में फायदेमंद है?
हाँ, विशेषज्ञों के अनुसार रीढ़ का यह घुमाव आंतरिक अंगों की मालिश का काम करता है, जिससे पाचन क्रिया बेहतर होती है और कब्ज जैसी समस्याओं में राहत मिल सकती है। आयुष मंत्रालय ने भी इसे पाचन तंत्र सुधारने के लिए उत्कृष्ट अभ्यास माना है।
सुप्त मत्स्येंद्रासन किसे नहीं करना चाहिए?
जिन लोगों की रीढ़ की हड्डी, कूल्हे, घुटने या कंधों में हाल ही में चोट लगी हो या सर्जरी हुई हो, उन्हें यह आसन नहीं करना चाहिए। किसी भी चिकित्सीय स्थिति में इसे प्रमाणित योग शिक्षक की देखरेख में ही शुरू करें।
सुप्त मत्स्येंद्रासन को अंग्रेज़ी में क्या कहते हैं?
इसे अंग्रेज़ी में 'सुपाइन स्पाइनल ट्विस्ट' (Supine Spinal Twist) या 'रिक्लाइंड ट्विस्ट' (Reclined Twist) कहा जाता है। यह अर्ध मत्स्येंद्रासन का लेटा हुआ और पुनर्स्थापनात्मक रूप है।
सुप्त मत्स्येंद्रासन करने का सबसे अच्छा समय कौन सा है?
योग विशेषज्ञों के अनुसार इस आसन को खाली पेट या भोजन के कम से कम तीन से चार घंटे बाद करना सबसे उपयुक्त है। सुबह के समय इसका अभ्यास विशेष रूप से प्रभावी माना जाता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले