दवाओं के साइड इफेक्ट्स: खुजली, नींद न आना और सिरदर्द को न करें नज़रअंदाज़ — WHO का अलर्ट
सारांश
मुख्य बातें
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 2 से 8 नवंबर 2026 तक चल रहे मेडसेफ्टी वीक के तहत लोगों को दवाओं के साइड इफेक्ट्स पहचानने और उनकी रिपोर्ट करने के प्रति जागरूक करने की अपील की है। WHO के अनुसार, त्वचा पर खुजली, लाल चकत्ते, सिरदर्द, पेट की गड़बड़ी, आँखों में जलन और नींद न आना — ये सभी दवाओं के संभावित दुष्प्रभाव हो सकते हैं, जिन्हें अक्सर मरीज़ सामान्य समझकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं।
मेडसेफ्टी वीक 2026: क्या है संदेश
WHO के इस वैश्विक अभियान का इस वर्ष का मुख्य संदेश है — दवाओं के साइड इफेक्ट्स को चुपचाप सहन न करें, बल्कि संबंधित स्वास्थ्य विशेषज्ञों को इसकी जानकारी दें। अभियान का उद्देश्य मरीज़ों, उनकी देखभाल करने वालों और स्वास्थ्यकर्मियों को दवाओं से होने वाली संभावित परेशानियों के प्रति सचेत करना है। यह ऐसे समय में आया है जब दुनियाभर में स्व-दवा (self-medication) का चलन बढ़ रहा है और दवा-प्रतिरोधकता एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता बन चुकी है।
दवाओं के सामान्य दुष्प्रभाव कौन से हैं
WHO के अनुसार, दवाओं के साइड इफेक्ट्स हर व्यक्ति में अलग-अलग रूप में सामने आ सकते हैं। कुछ लोगों को त्वचा पर खुजली या लाल चकत्ते, सिरदर्द, पेट खराब होना या आँखों में जलन जैसी परेशानियाँ होती हैं। वहीं कुछ मरीज़ों की नींद, मूड और रोज़मर्रा की गतिविधियाँ भी प्रभावित हो सकती हैं।
गौरतलब है कि हर साइड इफेक्ट दवा शुरू करते ही तुरंत नज़र नहीं आता। कुछ समस्याएँ दवा लेने के कुछ समय बाद उभरती हैं, जबकि कुछ लंबे समय तक दवा लेने, खुराक बदलने या एक साथ कई दवाएँ लेने के कारण सामने आती हैं। कतिपय मामलों में इलाज बंद करने के बाद भी लक्षण देखे जा सकते हैं।
दवा बाज़ार में आने के बाद भी निगरानी क्यों ज़रूरी
किसी भी दवा को बाज़ार में उतारने से पहले कठोर परीक्षण और नैदानिक परीक्षाओं से गुज़रना पड़ता है। इसके बावजूद सभी संभावित दुष्प्रभाव पहले से ज्ञात हो जाएँ, यह सुनिश्चित नहीं किया जा सकता। इसीलिए दवा के बाज़ार में आने के बाद भी उसकी सुरक्षा पर फार्माकोविजिलेंस (pharmacovigilance) के तहत लगातार निगरानी रखी जाती है।
जब मरीज़ या डॉक्टर किसी दवा से होने वाली परेशानी की रिपोर्ट करते हैं, तो उन सूचनाओं का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाता है। इससे दवाओं के नए जोखिमों की पहचान और मरीज़ों की सुरक्षा के लिए समय पर उपाय करने में मदद मिलती है।
आम जनता पर असर
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में अधिकांश मरीज़ साइड इफेक्ट्स को या तो सहन कर लेते हैं या खुद ही दवा बदल लेते हैं, जो कि खतरनाक हो सकता है। नई दिल्ली सहित देश के शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में इस बारे में जागरूकता की ज़रूरत है। डॉक्टर और फार्मासिस्ट से खुलकर संवाद करना ही दवा-सुरक्षा की पहली शर्त है।
क्या करें यदि साइड इफेक्ट दिखे
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि दवा लेने के बाद कोई असामान्य लक्षण दिखे — चाहे वह हल्का ही क्यों न हो — तो तुरंत अपने डॉक्टर को सूचित करें। भारत में केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) और WHO के साथ मिलकर काम करने वाला फार्माकोविजिलेंस प्रोग्राम ऑफ इंडिया (PvPI) नागरिकों को दवा के दुष्प्रभाव रिपोर्ट करने की सुविधा देता है। आने वाले समय में डिजिटल माध्यमों से इस रिपोर्टिंग को और सरल बनाने की दिशा में प्रयास जारी हैं।