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क्या मल्टीटास्किंग से मस्तिष्क को मिल रहा है अधिक दबाव?

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क्या मल्टीटास्किंग से मस्तिष्क को मिल रहा है अधिक दबाव?

सारांश

क्या आप जानते हैं कि मल्टीटास्किंग वास्तव में मस्तिष्क के लिए हानिकारक हो सकती है? जानिए इसके प्रभाव और क्यों यह आपकी याददाश्त को कमजोर कर सकती है।

मुख्य बातें

मल्टीटास्किंग मस्तिष्क पर दबाव डालती है।
यह याददाश्त और ध्यान की क्षमता को कमजोर कर सकती है।
स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल का स्तर बढ़ सकता है।
ब्रेन फॉग समस्या को जन्म दे सकता है।
एक समय में एक कार्य पर ध्यान केंद्रित करना अधिक फायदेमंद है।

नई दिल्ली, 13 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। वर्तमान की तेज़ ज़िंदगी में मल्टीटास्किंग को एक महत्वपूर्ण कौशल माना जाता है, लेकिन वैज्ञानिक अनुसंधान दर्शाते हैं कि यह कौशल वास्तव में मस्तिष्क पर दबाव डाल सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि हमारा मस्तिष्क एक ही समय में केवल एक कार्य पर सही तरीके से ध्यान केंद्रित कर सकता है।

न्यूरोसाइंस के अध्ययन के अनुसार, जब हम एक साथ कई कार्य करने का प्रयास करते हैं, तो हमारा मस्तिष्क उन्हें एक साथ नहीं करता, बल्कि वह तेजी से एक कार्य से दूसरे कार्य पर स्विच करता है। यह निरंतर स्विचिंग मस्तिष्क की ऊर्जा को अधिक खर्च करती है।

अमेरिका की प्रमुख स्वास्थ्य अनुसंधान संस्था नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के अनुसार, मानव मस्तिष्क को मूल रूप से एक समय में एक कार्य पर ध्यान केंद्रित करने के लिए विकसित किया गया है। इसलिए जब हम लगातार कई कार्यों के बीच ध्यान बदलते हैं, तो मस्तिष्क को अतिरिक्त प्रयास करना पड़ता है। इस आदत का सबसे बड़ा प्रभाव हमारी याददाश्त और ध्यान की क्षमता पर पड़ता है। बार-बार कार्य बदलने से शॉर्ट-टर्म मेमोरी पर दबाव बढ़ता है और ध्यान कमजोर हो जाता है। यही कारण है कि मल्टीटास्किंग करने वाले लोग अक्सर छोटी-छोटी बातें भूल जाते हैं।

मल्टीटास्किंग का एक अन्य प्रभाव मानसिक तनाव के रूप में भी सामने आता है। जब मस्तिष्क कई कार्यों को संभालने की कोशिश करता है, तो वह ओवरलोड महसूस करने लगता है। इस स्थिति में शरीर में स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल का स्तर बढ़ सकता है। लंबे समय तक ऐसा होने पर व्यक्ति में चिंता, चिड़चिड़ापन और मानसिक अस्थिरता की समस्या बढ़ सकती है। जब मस्तिष्क को पर्याप्त शांति और विश्राम नहीं मिलता, तो भावनात्मक संतुलन भी प्रभावित होता है।

कई लोग यह मानते हैं कि एक साथ कई काम करने से समय की बचत होती है, लेकिन वास्तविकता इससे भिन्न हो सकती है। जब हम एक कार्य छोड़कर दूसरे कार्य की ओर बढ़ते हैं, तो मस्तिष्क को पुनः ध्यान केंद्रित करने में समय लगता है। यदि यह प्रक्रिया बार-बार होती है, तो कार्य की गति धीमी हो जाती है।

उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति हर कुछ मिनट में मोबाइल नोटिफिकेशन चेक करता है, तो उसका मुख्य कार्य बार-बार रुकता रहता है। इससे न केवल समय अधिक लगता है, बल्कि गलतियाँ होने की संभावना भी बढ़ जाती है।

लगातार मल्टीटास्किंग करने से मानसिक थकान भी जल्दी महसूस होने लगती है। कई लोग इसे ब्रेन फॉग कहते हैं। इस स्थिति में व्यक्ति को स्पष्ट रूप से सोचने, निर्णय लेने या किसी विषय को समझने में कठिनाई होती है। यदि इसके साथ नींद की कमी और लंबे समय तक स्क्रीन का उपयोग भी हो जाए, तो समस्या और गंभीर हो सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक डिजिटल मल्टीटास्किंग करने से मस्तिष्क के उन हिस्सों पर असर पड़ सकता है जो निर्णय लेने और भावनाओं को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह जीवनशैली के तनाव को बढ़ा सकती है और व्यक्तिगत उत्पादकता को कम कर सकती है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या मल्टीटास्किंग वास्तव में फायदेमंद है?
वास्तव में, शोध बताते हैं कि मल्टीटास्किंग से मस्तिष्क पर दबाव पड़ता है और यह याददाश्त को कमजोर कर सकता है।
मल्टीटास्किंग से मानसिक तनाव कैसे बढ़ता है?
जब हम कई कार्यों को एक साथ करने की कोशिश करते हैं, तो मस्तिष्क तनाव महसूस करता है, जिससे कोर्टिसोल स्तर बढ़ सकता है।
ब्रेन फॉग क्या होता है?
ब्रेन फॉग एक स्थिति है जिसमें व्यक्ति को सोचने, निर्णय लेने या समझने में कठिनाई होती है।
क्या मैं मल्टीटास्किंग से बच सकता हूँ?
हाँ, एक समय में एक कार्य पर ध्यान केंद्रित करना और मोबाइल नोटिफिकेशन को प्रबंधित करना मददगार हो सकता है।
क्या नींद की कमी और स्क्रीन समय से समस्या बढ़ती है?
हाँ, नींद की कमी और अधिक स्क्रीन समय ब्रेन फॉग की स्थिति को गंभीर बना सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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