रात में भूख लगने का संकेत: स्वास्थ्य पर पड़ता है नकारात्मक असर
सारांश
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नई दिल्ली, 12 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भूख लगना और खाना दोनों हमारे स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक हैं, क्योंकि भोजन के माध्यम से ही शरीर को ऊर्जा मिलती है। रात के समय अचानक भूख लगने की समस्या बढ़ जाती है, जिसके लिए हम अक्सर पैक्ड फूड्स का सहारा लेते हैं। कभी-कभी हम बिस्किट या नूडल्स के माध्यम से अपनी छोटी भूख को शांत कर लेते हैं, लेकिन रात के समय भूख क्यों लगती है?
यह तथ्य बहुत कम लोग जानते हैं कि इसे विज्ञान की भाषा में नाइट ईटिंग सिंड्रोम कहा जाता है। यह एक ऐसी स्थिति है, जहां दिन में ओवरईटिंग को नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन रात में भूख इतनी तेज होती है कि बिना खाए रहना संभव नहीं होता। यही कारण है कि कई लोग रात के खाने पर संयम नहीं रख पाते और कभी-कभी नींद से उठकर भी खाने का प्रयास करते हैं। ये सभी लक्षण खराब जीवनशैली के संकेत हैं।
आयुर्वेद के अनुसार, यह अक्सर दिनचर्या और अग्नि के असंतुलन से जुड़ा होता है। देर रात तक जागना भी इसके पीछे का एक कारण हो सकता है। जब शरीर का प्राकृतिक भोजन समय बिगड़ता है, तो पाचन प्रणाली पर बुरा असर पड़ता है। रात का समय शरीर के आराम और मरम्मत का होता है। यदि इस समय बार-बार खाया जाए, तो इससे पाचन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। धीरे-धीरे इसके परिणामस्वरूप वजन बढ़ सकता है और सुबह भारीपन का अनुभव हो सकता है। इससे नींद भी प्रभावित होती है और पूरे दिन शरीर में भारीपन महसूस होता है।
इन सभी परिस्थितियों से निपटने के लिए आयुर्वेद में कई उपाय दिए गए हैं, जिनसे जीवनशैली में सुधार संभव है। इसके लिए रात में कोशिश करें कि सूर्यास्त से पहले भोजन कर लें और आहार हल्का हो। तली-भुनी चीजों से बचें, क्योंकि ये पाचन में कठिनाई उत्पन्न करती हैं।
एक अन्य तरीका है सोने से पहले गुनगुने दूध का सेवन करना। गुनगुना दूध अच्छी नींद लाने में सहायक होता है। इसे पीने से मन और मस्तिष्क शांत होते हैं और गहरी नींद आती है। इसके अलावा रात के समय मोबाइल से दूरी बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि फोन की रोशनी नींद को प्रभावित कर सकती है।