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हाइपरटेंशन: 'साइलेंट किलर' से बचाव के लिए रोज़ाना ब्लड प्रेशर मॉनिटरिंग क्यों है ज़रूरी

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हाइपरटेंशन: 'साइलेंट किलर' से बचाव के लिए रोज़ाना ब्लड प्रेशर मॉनिटरिंग क्यों है ज़रूरी

सारांश

हाइपरटेंशन कोई लक्षण नहीं दिखाता, लेकिन चुपचाप हृदय, मस्तिष्क और किडनी को नष्ट करता रहता है। WHO की चेतावनी और विशेषज्ञों की सलाह एक ही है — रोज़ाना ब्लड प्रेशर की जाँच ही इस साइलेंट किलर से बचाव की पहली और सबसे ज़रूरी कड़ी है।

मुख्य बातें

हाइपरटेंशन को 'साइलेंट किलर' कहा जाता है क्योंकि यह बिना स्पष्ट लक्षण के शरीर को नुकसान पहुँचाता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, 70 वर्ष से कम आयु में असमय मृत्यु का यह एक प्रमुख कारण है।
अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर से हार्ट अटैक , ब्रेन स्ट्रोक और किडनी फेलियर का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।
विशेषज्ञ दिन में एक से दो बार क्लिनिकली वैलिडेटेड डिवाइस से ब्लड प्रेशर जाँचने की सलाह देते हैं।
ब्लड प्रेशर लगातार 140/90 mmHg या उससे अधिक रहने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।
संतुलित आहार, व्यायाम, नमक में कटौती और तनाव प्रबंधन से हाइपरटेंशन को नियंत्रित किया जा सकता है।

हाइपरटेंशन यानी हाई ब्लड प्रेशर को चिकित्सा जगत में 'साइलेंट किलर' की संज्ञा दी जाती है — और इसकी वजह है इसका बिना किसी स्पष्ट चेतावनी के शरीर के भीतर नुकसान पहुँचाते रहना। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, अनियंत्रित हाइपरटेंशन हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक और किडनी फेलियर जैसी जानलेवा जटिलताओं को जन्म दे सकता है। यह ऐसे समय में विशेष रूप से चिंताजनक है जब युवा पीढ़ी में भी यह बीमारी तेज़ी से पाँव पसार रही है।

हाइपरटेंशन क्यों है इतना ख़तरनाक

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, 70 वर्ष से कम आयु के लोगों में असमय मृत्यु के प्रमुख कारणों में हाइपरटेंशन शामिल है। जब रक्तचाप लगातार ऊँचा बना रहता है, तो रक्त वाहिकाओं पर असामान्य दबाव पड़ता है। इससे हृदय को सामान्य से कहीं अधिक परिश्रम करना पड़ता है, जो अंततः हृदय की मांसपेशियों को कमज़ोर कर देता है और हार्ट अटैक तथा स्ट्रोक का जोखिम कई गुना बढ़ा देता है।

गौरतलब है कि अधिकांश रोगियों को यह तब तक पता नहीं चलता जब तक कोई गंभीर जटिलता सामने न आ जाए, क्योंकि इसके लक्षण प्रायः देर से प्रकट होते हैं। यही कारण है कि इसे 'साइलेंट किलर' कहा जाता है।

युवाओं में बढ़ता ख़तरा: कारण क्या हैं

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक जीवनशैली में हाइपरटेंशन के कई प्रमुख कारण हैं — व्यस्त दिनचर्या, अनियमित खान-पान, मानसिक तनाव, शारीरिक गतिविधि की कमी और अत्यधिक नमक का सेवन। यह संयोजन विशेष रूप से कामकाजी युवाओं को जोखिम में डालता है, जो अपनी सेहत की नियमित जाँच से प्रायः चूक जाते हैं।

रोज़ाना मॉनिटरिंग क्यों है अनिवार्य

डॉक्टरों का कहना है कि हाइपरटेंशन को शुरुआती अवस्था में पकड़ने का सबसे प्रभावी तरीका नियमित ब्लड प्रेशर मॉनिटरिंग है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि दिन में एक से दो बार ब्लड प्रेशर की जाँच की जानी चाहिए और इसके लिए हमेशा क्लिनिकली वैलिडेटेड डिवाइस का ही उपयोग करें, ताकि रीडिंग सटीक हो और उपचार की दिशा सही रहे।

यदि ब्लड प्रेशर लगातार 140/90 mmHg या उससे अधिक बना रहे, तो बिना देरी किए चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।

बचाव और नियंत्रण के उपाय

चिकित्सकों के अनुसार, जीवनशैली में कुछ बुनियादी बदलाव हाइपरटेंशन को रोकने और नियंत्रित करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इनमें शामिल हैं: संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, वज़न नियंत्रण, नमक का सीमित सेवन और तनाव प्रबंधन। नियमित मॉनिटरिंग के साथ इन उपायों को अपनाने से बीमारी को प्रारंभिक चरण में ही काबू किया जा सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय में, घर पर ब्लड प्रेशर जाँचने की आदत विकसित करना आज की ज़रूरत बन चुकी है — यह छोटी-सी आदत बड़े जोखिम को टाल सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि रोकथाम और शीघ्र पहचान पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता। भारत में जहाँ स्वास्थ्य अवसंरचना की पहुँच असमान है, घरेलू ब्लड प्रेशर मॉनिटरिंग एक सस्ता और प्रभावी विकल्प है — लेकिन जागरूकता की कमी इसे अपनाने में सबसे बड़ी बाधा है। युवाओं में बढ़ता प्रसार यह संकेत देता है कि यह केवल बुज़ुर्गों की बीमारी नहीं रही, फिर भी स्कूल और कार्यस्थल स्तर पर स्क्रीनिंग कार्यक्रम नदारद हैं। जब तक नीतिगत स्तर पर निवारक स्वास्थ्य को उपचार के बराबर प्राथमिकता नहीं मिलती, 'साइलेंट किलर' का बोझ बढ़ता रहेगा।
RashtraPress
21 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हाइपरटेंशन को 'साइलेंट किलर' क्यों कहते हैं?
हाइपरटेंशन को 'साइलेंट किलर' इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह अधिकांश मामलों में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाता, लेकिन धीरे-धीरे हृदय, मस्तिष्क और किडनी को नुकसान पहुँचाता रहता है। लक्षण तब सामने आते हैं जब बीमारी गंभीर रूप ले चुकी होती है।
ब्लड प्रेशर कितना होने पर खतरनाक माना जाता है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यदि ब्लड प्रेशर लगातार 140/90 mmHg या उससे अधिक बना रहे, तो इसे हाइपरटेंशन की श्रेणी में माना जाता है और तुरंत चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। समय पर जाँच से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।
घर पर ब्लड प्रेशर मॉनिटरिंग कैसे करें?
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि घर पर हमेशा क्लिनिकली वैलिडेटेड ब्लड प्रेशर मॉनिटरिंग डिवाइस का उपयोग करें और दिन में एक से दो बार जाँच करें। रीडिंग नोट करते रहें ताकि डॉक्टर को सटीक जानकारी दी जा सके।
हाइपरटेंशन से कौन-कौन सी बीमारियाँ हो सकती हैं?
अनियंत्रित हाइपरटेंशन हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक और किडनी फेलियर जैसी गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है। WHO के अनुसार यह 70 वर्ष से कम आयु के लोगों में असमय मृत्यु का एक प्रमुख कारण है।
हाइपरटेंशन से बचाव के लिए क्या करें?
डॉक्टरों के अनुसार संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, वज़न नियंत्रण, नमक का सीमित सेवन और तनाव प्रबंधन हाइपरटेंशन को रोकने में प्रभावी हैं। इनके साथ नियमित ब्लड प्रेशर मॉनिटरिंग की आदत बीमारी को शुरुआती अवस्था में ही काबू करने में मदद करती है।
राष्ट्र प्रेस
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