राघव चड्ढा ने ट्रैफिक जाम के आर्थिक प्रभाव पर उठाई चिंता, ‘नेशनल अर्बन डीकंजेशन मिशन’ की माँग

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राघव चड्ढा ने ट्रैफिक जाम के आर्थिक प्रभाव पर उठाई चिंता, ‘नेशनल अर्बन डीकंजेशन मिशन’ की माँग

सारांश

आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने ट्रैफिक जाम के बढ़ते मुद्दे पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने ‘नेशनल अर्बन डीकंजेशन मिशन’ की स्थापना की मांग की है, जिससे आर्थिक संकट को टाला जा सके।

Key Takeaways

  • ट्रैफिक जाम का आर्थिक प्रभाव गंभीर है।
  • राघव चड्ढा ने ‘नेशनल अर्बन डीकंजेशन मिशन’ की मांग की।
  • बड़े शहरों में ट्रैफिक जाम की समस्या बढ़ती जा रही है।
  • सरकार को पब्लिक ट्रांसपोर्ट को मजबूत करना चाहिए।
  • हर साल 2.5 करोड़ नए वाहनों का रजिस्ट्रेशन समस्या को बढ़ा सकता है।

नई दिल्ली, 27 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद राघव चड्ढा ने शुक्रवार को बड़े महानगरों में बढ़ते ट्रैफिक जाम पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए ‘नेशनल अर्बन डीकंजेशन मिशन’ की स्थापना की मांग की।

संसद के उच्च सदन में शहरी समस्याओं पर चर्चा करते हुए चड्ढा ने कहा कि ट्रैफिक जाम ने मेट्रो शहरों को “विशाल पार्किंग स्थल” में बदल दिया है, जहाँ लोग अपने गंतव्य तक पहुँचने के बजाय सड़क पर घंटों फंसे रहते हैं।

उन्होंने दिल्ली, कोलकाता, बेंगलुरु, मुंबई, पुणे और चेन्नई जैसे शहरों में प्रमुख जाम वाले क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि दिल्ली में रिंग रोड, आश्रम चौक, धौला कुआं और एनएच-8 पर भारी जाम की समस्या रहती है। वहीं, कोलकाता में ए.जे.सी. बोस रोड और चौरंगी रोड, बेंगलुरु में सिल्क बोर्ड जंक्शन और आउटर रिंग रोड, और मुंबई में अंधेरी, बांद्रा और फोर्ट क्षेत्र लगातार जाम से प्रभावित हैं।

चड्ढा ने कहा, “जब आप इन स्थानों पर होते हैं, तो ऐसा लगता है कि आप सड़क पर नहीं, बल्कि किसी लंबी पार्किंग में खड़े हैं। लोग अब ट्रैफिक में फंसे होकर अपनी कार से ही वर्चुअल मीटिंग्स करने को मजबूर हैं।”

उन्होंने ट्रैफिक जाम को केवल एक असुविधा नहीं, बल्कि एक गंभीर आर्थिक संकट बताते हुए कहा कि बेंगलुरु में एक व्यक्ति औसतन साल में 168 घंटे ट्रैफिक में फंसा रहता है। इसके बाद पुणे में 152 घंटे, मुंबई में 126 घंटे, कोलकाता में करीब 110 घंटे, दिल्ली में लगभग 104 घंटे और चेन्नई में करीब 100 घंटे का समय बर्बाद होता है।

उन्होंने कहा, “औसतन एक व्यक्ति साल में 100 से 168 घंटे ट्रैफिक में फंसा रहता है। यह केवल समय की बर्बादी नहीं, बल्कि देश की उत्पादकता को भी नुकसान पहुँचाता है।”

चड्ढा ने चेतावनी दी कि हर साल लगभग 2.5 करोड़ नए वाहनों के रजिस्ट्रेशन से समस्या और गंभीर हो सकती है, क्योंकि इनमें अधिकांश निजी वाहन शामिल हैं।

उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि इस समस्या के समाधान के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार की जाए, जिसमें पब्लिक ट्रांसपोर्ट को मजबूत करना, स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन लागू करना और वैज्ञानिक पार्किंग नीति विकसित करना शामिल हो।

अंत में उन्होंने कहा, “अगर हमारे शहर ट्रैफिक जाम में ही फंसे रहेंगे, तो देश की अर्थव्यवस्था तेज गति नहीं पकड़ पाएगी।”

Point of View

बल्कि यह देश की आर्थिक उत्पादकता पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है। राघव चड्ढा की चिंता और सुझाव इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए एक सकारात्मक कदम हो सकते हैं।
NationPress
30/03/2026

Frequently Asked Questions

ट्रैफिक जाम का आर्थिक नुकसान क्या है?
ट्रैफिक जाम से समय की बर्बादी होती है, जिससे उत्पादकता में कमी आती है।
नेशनल अर्बन डीकंजेशन मिशन क्या है?
यह मिशन शहरी ट्रैफिक समस्याओं के समाधान हेतु एक व्यापक रणनीति तैयार करने का प्रस्ताव है।
राघव चड्ढा ने किस विषय पर चिंता जताई है?
उन्होंने ट्रैफिक जाम और उसके आर्थिक प्रभावों पर चिंता जताई है।
कौन से शहरों में ट्रैफिक जाम की समस्या अधिक है?
दिल्ली, बेंगलुरु, मुंबई, कोलकाता, पुणे और चेन्नई में ट्रैफिक जाम की समस्या अधिक है।
क्या ट्रैफिक जाम के कारण लोग वर्चुअल मीटिंग्स कर रहे हैं?
हाँ, लोग ट्रैफिक में फंसे रहने के कारण अपनी कार से वर्चुअल मीटिंग्स करने को मजबूर हो रहे हैं।
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