तेनकासी के श्रीलंकाई तमिल कैंप में डेंगू से दो मौतें, 50 से अधिक बीमार; सफाई व्यवस्था पर उठे सवाल
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के तेनकासी जिले के कदायनाल्लूर के निकट स्थित बोगनाल्लूर श्रीलंकाई तमिल पुनर्वास कैंप में डेंगू बुखार ने दो जानें ले ली हैं — एक 27 वर्षीय महिला और एक 13 वर्षीय बच्ची — और पिछले लगभग एक महीने में 50 से अधिक निवासी बुखार की चपेट में आ चुके हैं। इस कैंप में 150 से अधिक शरणार्थी परिवार करीब 35 वर्षों से रह रहे हैं, और अब यहाँ स्वास्थ्य संकट गहराता जा रहा है।
मृतकों का विवरण
पहली मृतका की पहचान नर्मला के रूप में हुई है, जो दिनेश की पत्नी थीं और बोगनाल्लूर कैंप की निवासी थीं। डेंगू की पुष्टि होने के बाद उन्हें तिरुनेलवेली सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उपचार के बावजूद मंगलवार को उनकी मृत्यु हो गई।
दूसरी मृतका रिहाना मैरी, राजन और सैला श्री की 13 वर्षीय बेटी थीं, जिनकी मौत भी उसी तिरुनेलवेली सरकारी अस्पताल में डेंगू के उपचार के दौरान हुई। दोनों मौतें एक ही बस्ती से हुई हैं, जो स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई हैं।
बुखार का प्रकोप और स्थिति
निवासियों के अनुसार, कैंप में बुखार के मामले लगभग एक महीने से लगातार सामने आ रहे हैं। पिछले चार हफ्तों में 50 से अधिक लोगों ने क्षेत्र के सरकारी और निजी अस्पतालों में इलाज कराया है। यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु के कई जिलों में मानसून के बाद मच्छर-जनित बीमारियों में वृद्धि दर्ज की जा रही है।
गौरतलब है कि इस कैंप में रहने वाले परिवार श्रीलंकाई तमिल शरणार्थी हैं, जो दशकों से यहाँ बसे हुए हैं और बुनियादी सुविधाओं के लिए सरकारी व्यवस्था पर निर्भर हैं। ऐसे में बीमारी का यह प्रकोप न केवल स्वास्थ्य, बल्कि उनकी समग्र जीवन-स्थितियों पर भी सवाल खड़े करता है।
सफाई व्यवस्था पर निवासियों के आरोप
कैंप के निवासियों ने आरोप लगाया है कि आस-पास के इलाकों से एकत्र किया गया कचरा नियमित रूप से कैंप के पास लाकर डाला जाता रहा है। जमा कचरे के कुछ हिस्सों को जलाया भी जा रहा था, जिससे परिवार धुएं के संपर्क में आ रहे थे और पर्यावरणीय स्वच्छता और बिगड़ रही थी। निवासियों का मानना है कि यही खराब सफाई व्यवस्था मच्छरों के पनपने का मुख्य कारण बनी है।
सरकारी प्रतिक्रिया
दोनों मौतों और डेंगू के मामलों की सूचना मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने कैंप और उसके आस-पास स्वास्थ्य एवं सफाई उपाय बढ़ा दिए हैं। स्वास्थ्य कर्मचारी निवासियों की निगरानी कर रहे हैं, जबकि स्थानीय निकाय मच्छर-नियंत्रण और सफाई अभियान तेज कर रहे हैं।
निवासियों की माँगें और आगे की राह
कैंप के निवासियों ने जिला प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों से तत्काल कचरा हटाने, कैंप के पास कचरा डालने पर स्थायी रोक, नियमित फॉगिंग, जमा पानी की निकासी और बच्चों सहित कमज़ोर निवासियों के लिए बेहतर चिकित्सा निगरानी की माँग की है। उन्होंने यह भी अपील की है कि जब तक प्रकोप पूरी तरह नियंत्रण में न आ जाए, बुखार की नियमित जाँच और समय पर उपचार जारी रखा जाए। आस-पास के मच्छर-पनपने के स्रोतों का विस्तृत सर्वेक्षण करने की माँग भी उठाई गई है।