वाई-ब्रेक: आयुष मंत्रालय का योग फॉर्मूला जो लंबी शिफ्ट में भी रखेगा फिट और फोकस्ड
सारांश
Key Takeaways
- आयुष मंत्रालय ने ऑफिस कर्मचारियों के लिए 'वाई-ब्रेक' (Yoga-Break) कार्यक्रम शुरू किया है जिसे कुर्सी पर बैठे-बैठे किया जा सकता है।
- इसमें ताड़ासन, कटिचक्रासन, ग्रीवा संचालन, नाड़ी शोधन प्राणायाम और सरल ध्यान शामिल हैं।
- मंत्रालय की सलाह है कि प्रत्येक कर्मचारी दिन में कम से कम 2-3 बार यह ब्रेक लें।
- नियमित वाई-ब्रेक से कमरदर्द, गर्दन की जकड़न, तनाव और मोटापे जैसी समस्याओं में राहत मिलती है।
- वाई-ब्रेक की पूरी विधि आयुष मंत्रालय के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर निःशुल्क उपलब्ध है।
- अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (21 जून) से पहले इस कार्यक्रम को व्यापक स्तर पर प्रचारित किया जा रहा है।
नई दिल्ली, 22 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। आयुष मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत 'वाई-ब्रेक' एक विशेष योग-आधारित कार्यक्रम है, जो ऑफिस कर्मचारियों को लंबी शिफ्ट के दौरान शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रखने के लिए तैयार किया गया है। इसे कुर्सी पर बैठे-बैठे ही किया जा सकता है और यह सिर्फ कुछ मिनटों में दिनभर की थकान को दूर करने में सक्षम है। आज की भागदौड़ भरी कार्यसंस्कृति में यह पहल कर्मचारियों के स्वास्थ्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
क्या है 'वाई-ब्रेक' और इसकी जरूरत क्यों पड़ी?
आधुनिक कार्यस्थलों पर घंटों एक ही मुद्रा में बैठे रहना अब एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन चुका है। गर्दन में जकड़न, कमरदर्द, कंधों में तनाव, घुटनों की तकलीफ और मानसिक थकान — ये सब लंबे समय तक बैठकर काम करने के दुष्परिणाम हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार शारीरिक निष्क्रियता वैश्विक स्तर पर मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है।
इसी समस्या के समाधान के रूप में भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने 'Y-Break' (Yoga-Break) कार्यक्रम की शुरुआत की। यह कार्यक्रम विशेष रूप से कॉर्पोरेट और सरकारी कर्मचारियों को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किया गया है, जो दिन के अधिकांश समय अपनी सीट पर बंधे रहते हैं।
वाई-ब्रेक में क्या-क्या शामिल है?
'वाई-ब्रेक' में कई सरल और प्रभावशाली अभ्यास शामिल हैं जिन्हें बिना किसी विशेष स्थान या उपकरण के किया जा सकता है। इनमें प्रमुख हैं:
ताड़ासन (बैठे हुए शरीर को ऊपर की ओर खींचना) — इससे रीढ़ की हड्डी सीधी होती है और कमर का दर्द कम होता है। कटिचक्रासन (कमर को दाएं-बाएं घुमाना) — इससे पीठ की मांसपेशियां सक्रिय होती हैं। ग्रीवा संचालन (गर्दन की हल्की स्ट्रेचिंग) — इससे गर्दन की जकड़न दूर होती है।
इसके अलावा नाड़ी शोधन प्राणायाम और सरल ध्यान भी इस अभ्यास का हिस्सा हैं, जो मानसिक शांति और एकाग्रता बढ़ाने में सहायक हैं। आयुष मंत्रालय ने इस पूरी विधि का वीडियो अपने आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर उपलब्ध कराया है।
स्वास्थ्य पर क्या पड़ता है असर?
विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित वाई-ब्रेक करने से शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है, मांसपेशियों की जकड़न घटती है और मेटाबॉलिज्म सक्रिय रहता है। लगातार बैठे रहने से शरीर में जमा होने वाली अतिरिक्त चर्बी, जो मोटापे और डायबिटीज जैसी बीमारियों को आमंत्रित करती है, भी इससे नियंत्रित रहती है।
मानसिक स्वास्थ्य के लिहाज से देखें तो यह अभ्यास तनाव (Stress), चिंता (Anxiety) और बर्नआउट को कम करने में कारगर पाया गया है। कर्मचारियों की उत्पादकता और कार्यस्थल पर सकारात्मक माहौल बनाने में भी यह योगदान देता है।
आयुष मंत्रालय की सिफारिश और वैश्विक संदर्भ
आयुष मंत्रालय की सलाह है कि प्रत्येक कर्मचारी को दिन में कम से कम दो से तीन बार यह ब्रेक लेना चाहिए। उल्लेखनीय है कि जापान, स्वीडन और कनाडा जैसे देशों में कार्यस्थल पर योग और माइंडफुलनेस ब्रेक को आधिकारिक नीति का हिस्सा बनाया जा चुका है। भारत में वाई-ब्रेक इसी दिशा में एक सार्थक पहल है।
गौरतलब है कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (21 जून) से पहले इस कार्यक्रम को और अधिक प्रचारित किया जा रहा है। आने वाले समय में केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और सार्वजनिक उपक्रमों में इसे अनिवार्य रूप से लागू करने की संभावना भी जताई जा रही है, जो भारत की कार्यसंस्कृति में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।