योग साधक के लिए आदर्श आहार और परहेज की आवश्यकताएँ
सारांश
Key Takeaways
- सात्विक भोजन का सेवन करें
- फल और हरी सब्जियाँ आवश्यक हैं
- अत्यधिक मसालेदार भोजन से बचें
- मांसाहार और शराब से दूर रहें
- साफ पानी का सेवन करें
नई दिल्ली, 27 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। योग का अभ्यास करने वालों के लिए केवल आसन और प्राणायाम करना ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि उनका आहार भी उतना ही आवश्यक है। यदि आप एक योग साधक हैं, तो आपको यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आप क्या खा रहे हैं और किन चीजों से बचना चाहिए। एक सही आहार न केवल शरीर को हल्का और ऊर्जा से भरा रखता है, बल्कि मन को भी शांत और एकाग्र बनाता है।
योग साधकों के लिए सात्विक भोजन को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है, यानी ऐसा भोजन जो हल्का, शुद्ध और आसानी से पचने वाला हो, जैसे गेहूं, चावल, जौ, मूंग दाल और साठी चावल। ये सभी खाद्य पदार्थ शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं। इसके अतिरिक्त, दूध, घी, मक्खन, शहद और मिश्री जैसे मीठे और पौष्टिक पदार्थ भी योग साधकों के लिए लाभदायक होते हैं। ये शरीर को शक्ति देते हैं और साधना में सहायक होते हैं।
फल और हरी सब्जियाँ भी अति महत्वपूर्ण हैं। परवल, बथुआ, अमरनाथ (चौलाई), जीवंटी और पुनर्नवा जैसी सब्जियाँ शरीर को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करती हैं और पाचन को संतुलित रखती हैं। ताजे फल खाने से शरीर में जल और ऊर्जा बनी रहती है। जहाँ तक संभव हो, शुद्ध और साफ पानी का सेवन करना चाहिए। प्राचीन समय में वर्षा का शुद्ध जल भी बहुत अच्छा माना जाता था।
अब हम उन चीजों के बारे में चर्चा करें, जिनसे योग साधकों को बचना चाहिए। सबसे पहले, बहुत अधिक तीखा, खट्टा, नमकीन और कड़वा भोजन कम करना चाहिए। अत्यधिक मसालेदार और गर्म तासीर वाले खाद्य पदार्थ शरीर में असंतुलन उत्पन्न कर सकते हैं, जिससे मन भी अशांत हो सकता है। इसके अलावा, अधिक तेल में बने खाद्य पदार्थ, सरसों और तिल का अत्यधिक उपयोग भी उचित नहीं माना जाता।
योग करने वालों को मांसाहार, शराब और अन्य भारी खाद्य पदार्थों से दूर रहना चाहिए। मछली, बकरा का मांस और शराब शरीर को भारी बनाते हैं और साधना में बाधा डाल सकते हैं। इसके अलावा, लहसुन, हींग, अत्यधिक खट्टी चीजें, दही, छाछ और कुल्थी का सेवन भी सीमित करना चाहिए, क्योंकि ये पाचन और मानसिक स्थिरता पर प्रभाव डाल सकते हैं।