चौथा सीआईएससीई 2025: 600+ उद्यमों की भागीदारी, विदेशी व्यापारियों का चीन की आपूर्ति श्रृंखला पर भरोसा बढ़ा
सारांश
मुख्य बातें
चीन अंतर्राष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला संवर्धन एक्सपो (सीआईएससीई) का चौथा संस्करण 22 से 26 जून तक बीजिंग में संपन्न हुआ, जिसमें 600 से अधिक उद्यमों और विदेशी सरकारी प्रतिनिधिमंडलों ने हिस्सा लिया। प्रतिभागियों के अनुसार, चीन की आपूर्ति श्रृंखला न केवल विभिन्न देशों के बाज़ारों को परस्पर जोड़ती है, बल्कि द्विपक्षीय और बहुपक्षीय आर्थिक सहयोग के लिए व्यापक संभावनाएँ भी प्रस्तुत करती है।
मुख्य घटनाक्रम
इस वर्ष ऑस्ट्रेलिया को मुख्य अतिथि देश का दर्जा दिया गया — जो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में चीन के साथ उसकी बढ़ती साझेदारी का संकेत है। एक्सपो में स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग, औद्योगिक रोबोटिक्स और हरित ऊर्जा उत्पादों पर विशेष ध्यान केंद्रित रहा। गौरतलब है कि यह आयोजन ऐसे समय में हुआ जब वैश्विक व्यापार तनाव और आपूर्ति श्रृंखला पुनर्गठन को लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक बहस जारी है।
विदेशी प्रतिनिधियों की प्रतिक्रिया
निकारागुआ के राष्ट्रपति के सलाहकार लॉरेनो ओर्टेगा मुरिलो ने कहा कि उनके देश ने पहली बार सीआईएससीई में भाग लिया, और यह अंतिम बार नहीं होगा। उन्होंने बताया कि निकारागुआ में कई चीनी उद्यम सक्रिय हैं और वहाँ निर्माणाधीन परियोजनाओं की आपूर्ति श्रृंखला की स्थिरता सुनिश्चित करना उनकी भागीदारी का प्रमुख उद्देश्य था।
सर्बिया की व्यापार मंत्री जगोडा लाजोरेविक ने स्वीकार किया कि आधुनिक विनिर्माण, औद्योगिक रोबोट और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में चीन वैश्विक स्तर पर अग्रणी है। उन्होंने कहा कि सर्बिया समेत अन्य देशों को न केवल इस दौड़ में शामिल होना होगा, बल्कि चीन से सीखना भी होगा।
चीन में ऑस्ट्रेलिया के वाणिज्यिक दूत डोमिनिक ट्रिनिटी ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया उच्च गुणवत्ता वाले स्वच्छ और हरित उत्पाद उपलब्ध कराने के साथ-साथ वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में चीन का एक विश्वसनीय साझेदार है।
जर्मन व्यापारियों का बढ़ता भरोसा
चीन में जर्मन चैंबर ऑफ कॉमर्स के बोर्ड सदस्य ओलिवर ओहम्स ने बताया कि चीन में जर्मन व्यापारियों का विश्वास पिछले वर्ष की तुलना में और अधिक मज़बूत हुआ है। उनके अनुसार, चौथे सीआईएससीई ने यह संदेश दिया है कि विभिन्न क्षेत्रों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की स्थिरता पर भरोसा रखना चाहिए।
आम जनता और उद्योग पर असर
इस एक्सपो में उभरी साझेदारियाँ और संवाद संकेत देते हैं कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में विविधीकरण की बजाय चीन-केंद्रित एकीकरण की प्रवृत्ति अभी भी कई देशों की पहली पसंद बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह रुझान भारत सहित अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए भी नीतिगत संकेत देता है।
क्या होगा आगे
सीआईएससीई में हुई चर्चाओं के आधार पर कई देशों के साथ आपूर्ति श्रृंखला सहयोग समझौतों के विस्तार की संभावना जताई जा रही है। निकारागुआ जैसे देशों की पहली बार की भागीदारी यह दर्शाती है कि यह मंच धीरे-धीरे वैश्विक व्यापार कूटनीति का एक महत्त्वपूर्ण केंद्र बनता जा रहा है।