5 नवंबर 2026
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अफगानिस्तान-पाकिस्तान तनाव से मध्य एशिया व्यापार महत्वाकांक्षा को झटका, कजाखस्तान लक्ष्य $645 मिलियन तक सिमटा

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अफगानिस्तान-पाकिस्तान तनाव से मध्य एशिया व्यापार महत्वाकांक्षा को झटका, कजाखस्तान लक्ष्य $645 मिलियन तक सिमटा

सारांश

पाकिस्तान की मध्य एशिया तक बंदरगाह-आधारित व्यापार पहुँच की महत्वाकांक्षा अफगानिस्तान से जारी तनाव की भेंट चढ़ रही है। कजाखस्तान से व्यापार लक्ष्य एक अरब डॉलर से घटकर 645 मिलियन डॉलर पर आ गया है, और उज्बेकिस्तान के साथ दो अरब डॉलर का लक्ष्य भी दूर की कौड़ी लग रहा है।

मुख्य बातें

कजाखस्तान के साथ सालाना व्यापार का अनुमान एक अरब डॉलर से घटाकर करीब 645 मिलियन डॉलर किया गया — 1 नवंबर 2026 को अस्ताना में हुई वार्ता के दौरान।
उज्बेकिस्तान के साथ दो अरब डॉलर का पाँच-वर्षीय व्यापार लक्ष्य चुनौतीपूर्ण; 2024 में द्विपक्षीय व्यापार कुल मिलाकर लगभग 386 मिलियन डॉलर रहा।
अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा चौकियों के बंद रहने से माल की आवाजाही प्रभावित; पाकिस्तानी निर्यातकों को सीधा नुकसान।
TTP पर मतभेद के चलते अक्टूबर 2026 की मास्को फॉर्मेट बैठक में संयुक्त बयान जारी नहीं हो सका।
पाकिस्तान की कमज़ोर पड़ती क्षेत्रीय संपर्क भूमिका से भारत के चाबहार और INSTC मार्ग की रणनीतिक प्रासंगिकता बढ़ी।

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच गहराता तनाव अब केवल सुरक्षा और राजनयिक दायरे तक सीमित नहीं रहा — इसने पाकिस्तान की उस महत्वाकांक्षी क्षेत्रीय व्यापार रणनीति को भी गंभीर नुकसान पहुँचाया है, जिसके तहत इस्लामाबाद अपने बंदरगाहों को मध्य एशिया का प्रवेश द्वार बनाना चाहता था। यूरेशियानेट की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, कजाखस्तान के साथ सालाना व्यापार एक अरब डॉलर से अधिक पहुँचने का जो अनुमान था, उसे अब घटाकर करीब 645 मिलियन डॉलर कर दिया गया है।

कजाखस्तान से व्यापार लक्ष्य में कटौती

1 नवंबर 2026 को अस्ताना में कजाखस्तान के उप प्रधानमंत्री सेरिक झुमांगारिन और पाकिस्तान के निवेश मंत्री कासिम अहमद शेख के बीच हुई बातचीत में यह संशोधित आकलन सामने आया। पाकिस्तान के निवेश मंत्री ने अस्ताना निवेश मंच पर कराची, ग्वादर और अन्य बंदरगाहों को मध्य एशियाई देशों के लिए 'रणनीतिक प्रवेश द्वार' बताया — लेकिन जमीनी हकीकत इस दावे से मेल नहीं खाती।

गौरतलब है कि यह लक्ष्य में कटौती उस समय हुई है जब पाकिस्तान अपनी अर्थव्यवस्था को क्षेत्रीय व्यापार के ज़रिये पुनर्जीवित करने की कोशिश में है।

उज्बेकिस्तान के साथ भी लक्ष्य चुनौतीपूर्ण

पाकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने अगले पाँच वर्षों में सालाना द्विपक्षीय व्यापार दो अरब डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा है। लेकिन उपलब्ध आँकड़े इस राह को आसान नहीं बताते। वर्ष 2024 में पाकिस्तान ने उज्बेकिस्तान को लगभग 129 मिलियन डॉलर का सामान निर्यात किया, जबकि उज्बेकिस्तान से आयात लगभग 257 मिलियन डॉलर रहा। 2025 के व्यापार आँकड़ों में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज नहीं हुई।

इस स्थिति में दो अरब डॉलर का लक्ष्य हासिल करना तब तक संभव नहीं दिखता, जब तक अफगानिस्तान से होकर गुज़रने वाले पारगमन मार्गों की स्थिति नहीं सुधरती।

अफगानिस्तान: भौगोलिक अड़चन और कूटनीतिक विवाद

अफगानिस्तान पाकिस्तान और मध्य एशिया के बीच भौगोलिक रूप से एक अनिवार्य संपर्क कड़ी है। मध्य एशियाई देशों का माल अफगानिस्तान के रास्ते ही पाकिस्तान के बंदरगाहों तक पहुँच सकता है और वहाँ से समुद्री मार्ग के ज़रिये वैश्विक बाज़ारों में जा सकता है। लेकिन दोनों देशों के बीच प्रमुख सीमा चौकियों के बंद रहने से माल की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है।

तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के विरुद्ध कार्रवाई की पाकिस्तान की माँग और काबुल की ओर से इन आरोपों को खारिज करने के बीच दोनों देशों के संबंध लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। यह तनाव सीमा पार व्यापार में बाधाओं के रूप में सामने आ रहा है, जिससे वे व्यापारी और निर्यातक सबसे अधिक प्रभावित हैं जो अफगानिस्तान को बाज़ार और मार्ग दोनों रूपों में इस्तेमाल करते थे।

मास्को फॉर्मेट बैठक में भी दिखी खाई

अक्टूबर 2026 में मास्को फॉर्मेट के तहत हुई क्षेत्रीय बैठक में आतंकवाद से जुड़े मुद्दों पर अफगानिस्तान और पाकिस्तान के प्रतिनिधियों के बीच मतभेद इतने गहरे थे कि संयुक्त बयान जारी नहीं हो सका। इस बैठक में भारत, चीन, ईरान, रूस और मध्य एशियाई देशों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए थे।

यह Nवीं ऐसी बहुपक्षीय बैठक थी जहाँ इस्लामाबाद-काबुल की खाई ने क्षेत्रीय सहमति को बाधित किया।

भारत के क्षेत्रीय हितों पर असर

इस पूरे घटनाक्रम का असर भारत के क्षेत्रीय हितों के लिहाज़ से भी महत्वपूर्ण है। भारत लंबे समय से अफगानिस्तान और ईरान के रास्ते मध्य एशिया तक व्यापारिक और परिवहन संपर्क मज़बूत करने की पैरवी करता रहा है। चाबहार बंदरगाह और अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (INSTC) इसी व्यापक क्षेत्रीय संपर्क रणनीति के हिस्से हैं।

पाकिस्तान की अफगानिस्तान-निर्भर मध्य एशिया पहुँच जितनी कमज़ोर होती है, उतना ही भारत के वैकल्पिक मार्गों की रणनीतिक प्रासंगिकता बढ़ती है। आने वाले महीनों में यह भू-आर्थिक प्रतिस्पर्धा और तीखी होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि संरचनात्मक अवरोध मानना चाहिए। तब तक पाकिस्तान के बंदरगाह 'क्षेत्रीय प्रवेश द्वार' की जगह मंच पर दिए जाने वाले वादे बने रहेंगे।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अफगानिस्तान-पाकिस्तान तनाव का व्यापार पर क्या असर पड़ा है?
अफगानिस्तान से जारी तनाव के कारण प्रमुख सीमा चौकियाँ बंद रहने से पाकिस्तान और मध्य एशियाई देशों के बीच माल की आवाजाही बाधित हुई है। कजाखस्तान के साथ सालाना व्यापार का अनुमान एक अरब डॉलर से घटाकर करीब 645 मिलियन डॉलर कर दिया गया है।
पाकिस्तान और कजाखस्तान के बीच व्यापार लक्ष्य क्यों घटाया गया?
1 नवंबर 2026 को अस्ताना में कजाखस्तान के उप प्रधानमंत्री सेरिक झुमांगारिन और पाकिस्तान के निवेश मंत्री कासिम अहमद शेख की बातचीत में अफगानिस्तान के रास्ते व्यापार में आई बाधाओं को देखते हुए यह संशोधित आकलन पेश किया गया। अफगान सीमा की अनिश्चितता को इस कटौती का प्रमुख कारण माना जा रहा है।
पाकिस्तान और उज्बेकिस्तान के बीच व्यापार की स्थिति क्या है?
दोनों देशों ने पाँच वर्षों में सालाना व्यापार दो अरब डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा है, लेकिन 2024 में कुल द्विपक्षीय व्यापार लगभग 386 मिलियन डॉलर रहा और 2025 में भी खास बढ़त नहीं दर्ज हुई। अफगानिस्तान से पारगमन बाधित रहने तक यह लक्ष्य कठिन बना रहेगा।
मास्को फॉर्मेट बैठक में क्या हुआ और इसका क्षेत्रीय व्यापार से क्या संबंध है?
अक्टूबर 2026 में हुई मास्को फॉर्मेट बैठक में TTP पर मतभेद के कारण अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सहमति नहीं बन सकी और संयुक्त बयान जारी नहीं हुआ। इस विफलता ने क्षेत्रीय संपर्क और आर्थिक सहयोग की संभावनाओं पर भी नकारात्मक प्रभाव डाला।
इस घटनाक्रम का भारत के लिए क्या महत्व है?
पाकिस्तान की मध्य एशिया पहुँच जितनी कमज़ोर पड़ती है, भारत के चाबहार बंदरगाह और INSTC जैसे वैकल्पिक मार्गों की रणनीतिक अहमियत उतनी बढ़ती है। भारत लंबे समय से अफगानिस्तान और ईरान के रास्ते मध्य एशिया से संपर्क स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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