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कतर में फंसे 1100 अफगान नागरिक: तालिबान बोला — वापस आओ, देश में कोई खतरा नहीं

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कतर में फंसे 1100 अफगान नागरिक: तालिबान बोला — वापस आओ, देश में कोई खतरा नहीं

सारांश

कतर के कैंप अस सयलियाह में 1,100 से अधिक अफगान नागरिक अनिश्चितता में हैं। अमेरिका उन्हें कांगो भेजने पर विचार कर रहा है, जबकि तालिबान ने स्वदेश लौटने का न्योता दिया है। संयुक्त राष्ट्र ने 'नॉन-रिफाउलमेंट' सिद्धांत के उल्लंघन की चेतावनी दी है।

मुख्य बातें

तालिबान सरकार ने 25 अप्रैल को दावा किया कि अफगानिस्तान में कोई सुरक्षा खतरा नहीं है।
कतर के कैंप अस सयलियाह में 1,100 से अधिक अफगान नागरिक अमेरिकी वीजा की प्रतीक्षा में हैं।
अमेरिकी प्रशासन इन नागरिकों को डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो भेजने पर विचार कर रहा है।
कई अमेरिकी सांसदों और सीनेटरों ने कांगो भेजने के प्रस्ताव का विरोध किया है।
संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत रिचर्ड बेनेट ने अफगान नागरिकों की जबरन वापसी को 'नॉन-रिफाउलमेंट' सिद्धांत का उल्लंघन बताया।
इन नागरिकों में अमेरिकी सेना के पूर्व सहयोगी, दुभाषिए और अफगान विशेष बलों के सदस्य शामिल हैं।

काबुल, 25 अप्रैल। अफगानिस्तान की सत्तारूढ़ तालिबान सरकार ने शनिवार को स्पष्ट किया कि देश में किसी प्रकार का सुरक्षा खतरा मौजूद नहीं है और कतर में अमेरिकी वीजा की प्रतीक्षा कर रहे 1,100 से अधिक अफगान नागरिक पूरे विश्वास और सम्मान के साथ अपने वतन लौट सकते हैं। यह बयान उन मीडिया रिपोर्टों के बाद आया जिनमें दावा किया गया था कि इन नागरिकों को डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो भेजा जा सकता है।

क्या है पूरा मामला

कतर के कैंप अस सयलियाह (CAS) में 1,100 से अधिक अफगान नागरिक अनिश्चितता की स्थिति में दिन गुजार रहे हैं। इनमें वे लोग शामिल हैं जिन्हें 2021 में तालिबान के सत्ता में वापसी के बाद अफगानिस्तान से निकाला गया था। इनमें अमेरिकी सेना के पूर्व सहयोगी, दुभाषिए, अफगान विशेष बलों के सदस्य और उनके परिवारजन शामिल हैं।

अफगान मीडिया आउटलेट अमू टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से कई लोग अमेरिका में पुनर्वास के लिए सुरक्षा जांच पूरी कर चुके हैं, लेकिन एक वर्ष से अधिक समय से अपने भविष्य को लेकर अंधेरे में हैं।

तालिबान विदेश मंत्रालय का बयान

अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल कहार बल्खी ने कहा, "अफगानिस्तान में किसी प्रकार का सुरक्षा खतरा नहीं है और किसी को भी सुरक्षा कारणों से देश छोड़ने के लिए मजबूर नहीं किया जा रहा।" उन्होंने यह भी कहा कि जो नागरिक किसी अन्य देश जाना चाहते हैं, वे उचित समय पर कानूनी और सम्मानजनक माध्यमों से यात्रा कर सकते हैं।

काबुल प्रशासन ने यह भी कहा कि अफगानिस्तान सभी अफगानों की साझा मातृभूमि है और चिंतित परिस्थितियों में रह रहे सभी नागरिकों का स्वागत है।

कांगो भेजने का प्रस्ताव और विरोध

अमेरिकी प्रशासन इन नागरिकों में से कुछ को डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो स्थानांतरित करने पर विचार कर रहा है। इस प्रस्ताव की अमेरिकी सांसदों और सीनेटरों ने कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि इससे इन लोगों पर नए और गंभीर खतरे उत्पन्न हो सकते हैं।

गौरतलब है कि कांगो स्वयं एक अस्थिर देश है जहां दशकों से सशस्त्र संघर्ष जारी है। ऐसे में अफगान शरणार्थियों को वहां भेजना मानवीय दृष्टि से भी प्रश्नों के घेरे में है।

संयुक्त राष्ट्र की चिंता और 'नॉन-रिफाउलमेंट' सिद्धांत

इस सप्ताह की शुरुआत में अफगानिस्तान के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत रिचर्ड बेनेट ने उन खबरों पर गहरी चिंता जताई जिनमें कहा गया था कि यूरोपीय अधिकारी अफगान प्रवासियों की वापसी पर चर्चा के लिए तालिबान प्रतिनिधियों को आमंत्रित कर सकते हैं।

बेनेट ने स्पष्ट किया कि अफगान नागरिकों की जबरन वापसी अंतरराष्ट्रीय कानून के 'नॉन-रिफाउलमेंट' सिद्धांत का उल्लंघन हो सकती है, क्योंकि अफगानिस्तान में महिलाओं, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और पूर्व सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ व्यापक मानवाधिकार उल्लंघन की आशंकाएं बनी हुई हैं।

गहरा विश्लेषण: किसे फायदा, किसे नुकसान

यह विरोधाभास ध्यान देने योग्य है — तालिबान, जिस पर महिलाओं की शिक्षा पर प्रतिबंध और मानवाधिकार हनन के गंभीर आरोप हैं, वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर खुद को 'सुरक्षित देश' के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। यह कूटनीतिक रणनीति तालिबान को वैधता दिलाने और अंतरराष्ट्रीय मान्यता की ओर ले जाने का प्रयास भी माना जा सकता है।

दूसरी ओर, अमेरिकी प्रशासन का कांगो वाला प्रस्ताव उन लोगों के साथ विश्वासघात जैसा है जिन्होंने अमेरिकी सेना के लिए जान जोखिम में डाली। 2021 की अफगानिस्तान वापसी के बाद से यह सवाल लगातार उठता रहा है कि अमेरिका ने अपने सहयोगियों के साथ न्याय किया या नहीं।

आगे देखें तो इन 1,100 नागरिकों का भविष्य अमेरिकी कांग्रेस के दबाव, तालिबान की कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की सक्रियता पर निर्भर करेगा। आने वाले हफ्तों में इस मामले में कोई ठोस निर्णय संभव है।

संपादकीय दृष्टिकोण

सच्चाई नहीं। जो सरकार महिलाओं को स्कूल जाने से रोकती है, वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर 'सुरक्षित देश' का दावा कर रही है — यह विरोधाभास बेहद महत्वपूर्ण है। दूसरी ओर, अमेरिका का कांगो प्रस्ताव उन सहयोगियों के साथ धोखा है जिन्होंने अमेरिकी मिशन के लिए अपनी जान दांव पर लगाई। मुख्यधारा की मीडिया इसे शरणार्थी संकट की तरह पेश कर रही है, लेकिन असली सवाल यह है — क्या महाशक्तियाँ अपने वादों की जिम्मेदारी लेती हैं?
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कतर में कितने अफगान नागरिक अमेरिकी वीजा का इंतजार कर रहे हैं?
कतर के कैंप अस सयलियाह में 1,100 से अधिक अफगान नागरिक अमेरिकी वीजा की प्रतीक्षा में हैं। इनमें अमेरिकी सेना के पूर्व सहयोगी, दुभाषिए और उनके परिवार शामिल हैं।
तालिबान ने अफगान नागरिकों को वापस बुलाने पर क्या कहा?
अफगान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल कहार बल्खी ने कहा कि अफगानिस्तान में कोई सुरक्षा खतरा नहीं है और नागरिक पूरे विश्वास के साथ स्वदेश लौट सकते हैं। सरकार ने सभी अफगानों का स्वागत करने की बात कही।
अमेरिका अफगान शरणार्थियों को कांगो क्यों भेजना चाहता है?
रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी प्रशासन कतर में रह रहे कुछ अफगान नागरिकों को डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो स्थानांतरित करने पर विचार कर रहा है। हालांकि, अमेरिकी सांसदों ने इस प्रस्ताव की आलोचना करते हुए कहा है कि इससे इन लोगों पर नए खतरे उत्पन्न हो सकते हैं।
नॉन-रिफाउलमेंट सिद्धांत क्या है और यह अफगानिस्तान पर कैसे लागू होता है?
नॉन-रिफाउलमेंट अंतरराष्ट्रीय कानून का वह सिद्धांत है जो किसी व्यक्ति को ऐसे देश में वापस भेजने से रोकता है जहां उसे उत्पीड़न या खतरे का सामना करना पड़ सकता है। संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत रिचर्ड बेनेट ने कहा कि अफगानिस्तान में महिलाओं और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के लिए खतरा बना हुआ है।
2021 में अफगानिस्तान से निकाले गए लोगों की अभी क्या स्थिति है?
2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद निकाले गए हजारों अफगान नागरिक अभी भी विभिन्न देशों में अनिश्चितता की स्थिति में हैं। कतर में रह रहे 1,100 से अधिक नागरिक सुरक्षा जांच पूरी करने के बावजूद एक वर्ष से अधिक समय से अपने भविष्य को लेकर अंधेरे में हैं।
राष्ट्र प्रेस
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